27.1 C
Rajasthan
Saturday, May 28, 2022

Buy now

spot_img

भूले बिसरे नायक : अदम्य साहसी कप्तान फुल सिंह (आई.एन.ए)

Freedom Fighter Capt.Phool Singh, INA

गुडगाँव के राजीव चैक से ,गुडगाँव-अलवर राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 248-ए पर(पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग-8), मात्र 11 किलो मीटर की दूरी पर एक गांव बसा है-भूबड़े सिंह, जिसका अपभ्रंश भोंडसी हो गया है। राव राजा भूबड़े सिंह के नाम पर बसाए गए इस राजपूत बहुल गाँव का सैन्य दृष्टि से एक विशेष महत्व है। इस अकेले गाँव से आई.एन.ए में दो कप्तान रैंक के अधिकारियों सहित (कुल तीन भगोड़े, दस गद्दार तथा एक राज द्रोही, चैदह सैनिक सम्मिलित हुए थे।) भोंडसी के आस पास भारद्धाज गोत्रीय रघुवंशी (राघव) राजपूतों के बारह गाँव बसे है जिनका मुख्य गाँव भोंडसी है। आज से सौ वर्ष पूर्व प्रथम विश्व युद्ध(1914-1919) में इस गाँव के 145 वीर सैनिकांे ने भाग लिया जिनमें से 16 सपूतों ने विदेशी धरती पर बलिदान किया। इसी प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध में यहां के 317 सेनानी युद्धरत रहे और 8 शहीद हुए। सन 1962 के चीन संग युद्ध में इस गाँव से 385 जांबाजों ने हिमालय की ऊंची-बर्फीली चोटियों पर चीनियों के छक्के छुडाए। इनमें से एक लापता रहा जिसे बाद में शहीद घोषित किया गया। सन 1965 में पाक के साथ हुए युद्ध में भोंडसी के 562 अधिकारी व अन्य रैंक के सैनिक पाक को सबक सिखाते छम्ब-जोड़ियां तक जा पहुंचे। लाहौर मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर ही था, कि सीज फायर हो गया। इस युद्ध में इस गाँव के दो रणबांकुरे वीर गति को प्राप्त हुए। इसी तरह सन 1971 के पाक युद्ध में यहां की वीर जननी भूमि से 711 सैनिक सीमाओ पर लड़े परन्तु एक भी वीर शहीद नहीं हुआ। अलबत्ता सैकड़ों नापाक इरादे वालों को सदैव मौत की नींद सुलाया।
तत्कालीन ईस्ट पंजाब (अब हरियाणा) के गुड़गाँव (गुरुगाँव) जिले में से चार और नए जिले यथा रेवाड़ी, फरीदाबाद, मेवात(नूह) तथा पलवल बना दिए गए है। मूल गुड़गाँव जिले से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज में 106 अधिकारी व 580 अन्य रैंक के सैनिक शामिल थ,े जबकि आज के समूचे हरियाणा से कुल 2715 सैनिक नेताजी की फौज में थे। 

हरियाणा के गुडगाँव के भोंडसी गाँव की पट्टी मंधाता के एक बड़े जमींदार ठाकुर देवी सिंह की चैथी पीढ़ी में फूल सिंह का जन्म हुआ। जिनकी छोटी दो बहनंे तथा छोटे छः भाई थे। 26 मार्च 1909 को जन्में इस शिशु ने सत्रह वर्ष की आयु में 26 मार्च 1926 को भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट से अपना सैनिक जीवन प्रारम्भ किया और सन 1936 ही में जूनियर कमीशंड अॉफिसर के रूप में पदोन्नत हो गया। इसी बीच दो छोटे भाई भी इसी रेजिमेंट में भर्ती हो फतेहगढ़ सेंटर पहुंच चुके थे।
भोंडसी गाँव का छः फुट एक इंच लम्बा सुडौल कद काठी का यह युवक फूल सिंह कंधे पर एक स्टार लगाकर दो माह के वार्षिक अवकाश पर जब गाँव आया, तो पुरे गाँव में जश्न मनाया गया। मात्र पन्द्रह दिन बाद ही उसे वापस बुला लिया गया। सोचा एक स्टार और लगने वाला है शायद इसीलिए बीच ही में वापस बुला लिया गया है। इस तरह सन 1937 में घर से निकला यह नौजवान सन 1946 के ज्येष्ठ माह में ही पुरे नौ वर्ष बाद घर लौट सका। प्रारम्भ के पांच वर्ष तक तो उसका अता पता तक भी मालूम न हो सका। उसके साथ दोनों छोटे भाई भी पांच वर्षों तक गुम रहे। कल्पना की जा सकती है कि उनके परिवार पर कैसे-कैसे पहाड़ टूटे होंगे। अक्तुबर 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध प्रारम्भ हो गया। फौज को अग्रिम मोर्चो पर तैनात कर दिया गया। अंग्रेजों ने भारत के राजनेताओं को भरोसे में लिए बिना ही ऐलान कर दिया कि भारतीय फौज जर्मनी के खिलाफ युद्ध लड़ेगी। भंयकर युद्ध शुरू हो चुका था। भारत को आजाद कराने की प्रबल इच्छा और अंग्रेजों के अत्याचारों की टीस-कसक मन में लिए भारतीय सैनिक मित्र रष्ट्रों की ओर से शत्रु से लोहा ले रहे थे। युद्ध लम्बा खिंच रहा था। अंग्रेजों का पलड़ा हल्का होते देख राष्ट्र भक्त सैनिकांे ने विद्रोह कर अंग्रेज अफसरों-जवानांे को ही मारना शुरू कर दिया। उधर जापानी सेना भारी पड़ रही थी। जापान ने भारतीय सेना के एक बड़े हिस्से को युद्ध बंदी बना लिया। विद्रोही देश भक्त सैनिक भी जापान से जा मिले। इस तरह ये तीनों भाई जापान के साथ मिल गए।

आजाद हिन्द सेना का गठन और द्वितीय विश्व युद्ध 

उसी समय नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने जर्मनी में इंडियन लिजन (प्दकपंद स्महपवद) की स्थापना की। 25 दिसंबर 1941 को उन्होंने 15 देश भक्त नागरिकों को सैनिक प्रशिक्षण हेतु फ्रैंकनबर्ग भेजा। और लगभग 3500 सैनिकां सेे आजाद हिन्द सेना का गठन पूरा हुआ। 
जब जर्मनी की रूस के हाथों हार की आशंका बढ़ी तो सुभाष चन्द्र बोस ने जापान जाने की योजना बनाई। जापान ने भी नेताजी को स्वागत संदेश भेजा। सैनिक इतिहास में यह पहला अवसर था कि कोई गैर सैनिक तथा विदेशी व्यक्ति जर्मन पनडुब्बी से दूसरे देश जाए। टर्की व रूस होते हुए अफ्रीका के समुद्र में नेताजी ने 28 अप्रैल 1943 को जर्मन पनडुब्बी से जापानी पनडुब्बी में सुरंग द्वारा प्रवेश किया। नेताजी विमान द्वारा टोक्यो पंहुचे।
पंजाब रेजिमेंट के कैप्टेन मोहन सिंह ने सिंगापुर व मलाया के हारे हुए सैनिकों का कुआलाल्मपुर में आजाद हिन्द फौज का गठन किया था जिसे उन्होंने नेताजी को सौप दिया। इस ही आजाद हिंद फौज की 3ध्9 गुरिल्ला रेजिमेंट की कमाण्ड नेताजी ने जे.सी.ओ फूल सिंह को कैप्टेन बना कर सौपी। आजाद हिंद फौज के इन गुरिल्ला सैनिकांे का युद्ध कौशल जग जाहिर है। 
नेताजी के आग्रह पर जापानी सैनिकों की मदद से आजाद हिंद फौज के राष्ट्र भक्त सैनिकों नें अंग्रेजों से अंडमान व निकोबार द्वीप छीन कर उन्हें अंग्रेजी-हकूमत से आजाद हिंद (स्वतंत्र भारत की अंतरिम सरकार) के आधीन कर लिया। किन्तु इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि इम्पाल व कोहिमा पर किए गए जबरदस्त आक्रमण के समय अंग्रेजों का पलड़ा भारी रहा और जापान के साथ-साथ आजाद हिंद फौज के सैनिकों को भी पीछे हटना पड़ा। अंग्रेजों ने उनकी फौज के बहुत सारे सैनिकों को बंदी बना लिया। युद्ध की समाप्ति पर अंग्रेजों ने आइ.एन.ए के युद्ध बंदियों को श्रेणी बद्द किया,
यथाः-व्हाइट कैटेगरी अर्थात भगोड़े। ग्रे कैटेगरी यानि गद्दार तथा ब्लैक कैटेगरी अर्थात राजद्रोही। अब इत्तेफाक देखिये कि तीनों भाई शंकर सिंह व्हाइट, सोहन सिंह ग्रे तथा कैप्टेन फूल सिंह ब्लैक श्रेणी में आए। भगोड़ों को कुछ आर्थिक मदद के साथ सेना से बरखास्त कर दिया गया। गद्दारों को सूखा घर भेज दिया गया तथा राजद्रोहियों को सीधा काला पानी-सजाए मौत देकर। उधर हिरोशिमा व नागासाकी पर परमाणु हमले से जापान टूट गया और इधर 1945 में राजद्रोहियों पर लाल किले में मुकदमा आरम्भ हुआ। बेशक अंग्रेजों व मित्र राष्ट्रों ने एक षडयंत्र के तहत 18-8-1945 को एक विमान दुर्घटना में सुभाष को मृत घोषित कर दुष्प्रचार किया ताकि आजाद हिंद फौज के सैनिकों का मनोबल टूट जाए, किन्तु 19-12-1945 को ठीक उसी समय जब लाल किले में मुकदमा चल रहा था नेताजी का मंचूरिया से प्रथम रेडियो भाषण प्रसारित हुआ। अंग्रेजों के साथ-साथ कांग्रेस को भी पसीने आ गए। लाल किले के मुकदमंे ने नेताजी का यश व कद इतना बढ़ाया कि हिंदुस्तान की आम जनता सड़कों पर उतर आई। घबरा कर अंग्रेजों ने मृत्यु दण्ड प्राप्त राजद्रोहियों की सजा को उम्र कैद में बदल दिया।

घर वापसी 

आजादी से पहले 1946 के ज्येष्ठ माह में जब गाँव वालो को पता चला कि कप्तान साहब घर लौट रहे है, तो गाँव से एक मील पहले ही सारा गाँव स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। फूलों व रंग-गुलाब से उनका जोर दार स्वागत हुआ। दूसरे दोनों भाई 1945 ही में घर लौट आए थे।
सन 1951 में कैप्टेन फूल सिंह को पंजाब पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण देने के लिए तदर्थ रूप से बतौर इस्पेक्टर पंजाब पुलिस में नियुक्त किया गया। उन्होंने थाना सोहना व गुडगाँव में तैनात पुलिस कर्मियों को सन 1955 तक प्रशिक्षण दिया। गाँव से क्रॉस बैल्ट वाली खाकी वर्दी में साइकल से जब वे सोहना-गुडगाँव जाते थे, तो सैकड़ांे हाथ उनके सम्मान में उठ जाते थे। सन 1955 ही में उन्हें भारत सरकार की नैशनल डिसिप्लिन स्कीम के अतंरगर्त बतौर सीनियर इंस्ट्रक्टर नियुक्ति मिली। दिल्ली, पश्चिमी व मध्य उतर प्रदेश तथा गुजरात में सन 1966 तक वे अपनी सेवाएं देते रहे। 
वर्ष 1972 में इंदिरा गांधी की ओर से उन्हें हरियाणा के राज्यपाल ने गुडगाँव के नेहरू स्टेडियम में ताम्रपत्र भेंट कर सम्मानित किया। वर्ष 1985 में हरियाणा के मुख्यमंत्री चैधरी बंसी लाल ने इसी स्टेडियम में उनकी पत्नी को एक और ताम्रपत्र भेंट कर सम्मानित किया और इसी प्रकार तीसरा व अंतिम ताम्रपत्र वर्ष 1987 में मुख्यमंत्री चैधरी भजन लाल द्वारा दिया गया। अंतिम दिनों में अभावों से जूझते हुए एक वर्ष की लम्बी-जानलेवा बीमारी के कारण 9 जनवरी 1975 की सांय 6-45 बजे तीन बार ॐ का उच्चारण करते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली।

अंतिम यात्रा

10 जनवरी की प्रातः उनके अंतिम संस्कार के लिए बहुत बड़ी संख्या में गाँव के लोग शमशान के लिए चले। सड़क पार करते समय भारी संख्या में भीड़ देख राजपुताना राइफल्स के बावर्दी मेजर ने किसी से पूछा, ‘‘कौन साहब चले गए?’’
‘‘स्वतंत्रता सेनानी कप्तान फूल सिंह साहब।’’ जवाब मिला तो मेजर ने जोर से तीन बार व्हिसल बजाई। उनके साथ पैदल जा रहे पचासों रंगरूट दौड़ कर आए। मेजर ने उन्हें कुछ आदेश दिया। वे सभी शमशान घाट में कप्तान साहब की चिता के पास पहुंचे पंक्तिबद्द खड़े हो गए। बड़े बेटे द्वारा मुखाग्रि देते समय सभी जवानों ने अपने शस्त्र उल्टे कर एक सैनिक को पूर्ण सैन्य सम्मान दिया। 

Freedom Fighter Capt.Phool Singh, INA Story in Hindi, Capt. Fool Singh, INA

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Stay Connected

0FansLike
3,333FollowersFollow
19,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles