जब भी दिवाली आती है…

जब भी दिवाली आती है…

जब जब ढलते मौसम में दिल पे वो शीत हवाएं चलती है |

मेरे प्यारे वतन , तेरी सुबह तेरी शाम मुझे बहुत रूला जाती है ||

फिर चमकती रात आई ले कर जलाने मेरे अरमानों की मशालें
तेरे दर से आने वाली ठंडी हवा इसकी तपश को मिटा जाती है |

वो कलाईयों में खनकती मचलती नयी नवेली दुल्हन की चूड़ियाँ

वो दिये लिए हाथो में यूँ अपने साजन की निगाहों में झांकती है ||

तब मेरी झुके नयनों के प्यालो में बसे मेरे वतन से दूर वो दिलदार
उसके फूल से लबो पे मचलती वो कहानियां अक्सर याद आती है |

एक वो भी दिवाली थी एक यह भी दिवाली है तुम पास थे कभी
अब रह गयी तुम्हारी यादें , संग संग तेरी जुदाई और मेरी तन्हाई है ||

लेखिका : कमलेश चौहान (गौरी)
कॉपी राईट : कमलेश चौहान (गौरी)

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