भाग्य में लिखा वो मिला

“भाग्य में लिखा छप्पर फाड़ कर मिलता है” पूर्वजों की बनाई यह कहावत एकदम सटीक है ऐसे कई उदाहरण देखने, पढने को मिल जाते है कि जिसके भाग्य में राजा बनना लिखा था तो वह किसी राजा की रानी के गर्भ से पैदा नहीं होने के बावजूद भी राजा बना| जोधपुर के राजा मानसिंह हालाँकि […]

जब कवियों ने मनाई मित्र राजा की रूठी प्रेयसी

जब कवियों ने मनाई मित्र राजा की रूठी प्रेयसी

जोधपुर के राजा मानसिंह को इतिहास में शासक के रूप में कठोर, निर्दयी, अत्यंत क्रूर और कूटनीतिज्ञ माना जाता है पर साथ ही उनके व्यक्तित्त्व का एक दूसरा रूप भी था वे भक्त, कवि, कलाकार, उच्च कोटि के साहित्यकार, कला पारखी व कलाकारों, साहित्यकारों, कवियों को संरक्षण देने वाले दानी व दयालु व्यक्ति भी थे|  […]

निबटने (शौच जाने) का खर्च खाता

निबटने (शौच जाने) का खर्च खाता

रामगढ़ शेखावाटी कस्बे के पास एक गांव के पनघट पर पानी भरने आई औरतों में एक औरत का दुखी मुरझाया चेहरा देख दूसरी औरतें उससे कारण पूछ रही थी| हालाँकि वह औरत अपना दर्द उनसे बांटना नहीं चाह रही थी फिर भी गांव की एक औरत का चेहरा मुरझाया हो तो दूसरी औरतों को चैन […]

ठाकुर साहब की अकड़ और मूंछ की मरोड़ का राज

ठाकुर साहब की अकड़ और मूंछ की मरोड़ का राज

ठाकुर साहब की अकड़, मूंछ की मरोड़ आदि के बारे में तो आपने सुना ही होगा| अक्सर गांवों में ठाकुर साहबों की आपसी हंसी मजाक में कह दिया जाता कि- ठाकुर साहब “पेट से आधे भूखे जरुर है पर अकड़ पुरी” है| दरअसल राजस्थान में आजादी से पहले राजपूत राजाओं का राज था| बड़े भाई […]

ब्लॉगर ताऊ और यमराज

ब्लॉगर ताऊ और यमराज

एक बार चित्रगुप्त ने यमराज को हिंदी ब्लॉगरस् के बारे में बताया, सुनने के बाद यमराज के मन में एक हिंदी ब्लॉगर से मिलने की उत्सुकता जागृत हुई और उन्होंने चित्रगुप्त को आदेश दिया कि- “एक हिंदी ब्लॉगर को सशरीर यमलोक में लाया जाय ताकि वे उससे मिल सके, चर्चा कर सके, ब्लोगिंग के गुर […]

राजस्थान की प्रेम कहानियां

राजस्थान की प्रेम कहानियां

राजस्थान के इतिहास और साहित्य में जिस तरह अनगिनत वीरों की वीरता की कहानियां बिखरी पड़ी है ठीक वैसे ही अनगिनत प्रेम कहानियां भी साहित्य व इतिहास के अलावा कवियों की कविताओं, दोहों के साथ जन मानस द्वारा गाये जाने लोक गीतों व कहानियों में अमर है| इन प्रेम कहानियों में ढोला-मारू, मूमल-महिंद्रा, रामू-चनणा, बाघा-भारमली, […]

हुंकार की कलंगी : लोक कथा

हुंकार की कलंगी : लोक कथा

उदयपुर के महलों में राणा जी ने आपात सभा बुला रखी थी| सभा में बैठे हर सरदार के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ नजर आ रही थी, आँखों में गहरे भाव नजर आ रहे थे सबके हाव भाव देखकर ही लग रहा था कि किसी तगड़े दुश्मन के साथ युद्ध की रणनीति पर गंभीर […]

कहानी एक राजपूतानी की….

कहानी एक राजपूतानी की….

गर्मियों का मौसम था बाड़मेर संभाग में रेत के टीले गर्मी से गर्म होकर अंगारों की तरह दहक रहे थे| लूएँ ऐसे चल रही थी कि बाहर बैठे जीव को झुलसा दे| इस तरह नीचे धरती गर्मी से तप रही थी तो ऊपर आसमान झुलस रहा था| वहीँ खेजडे के एक पेड़ की छाया में […]

खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च

खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च = मौके पर आना| गांवों में आज भी शादी हो या अन्य समारोह इंतजाम के लिए गांव वाले मिलकर ही कार्य करते है| शादी समारोह में मिठाइयाँ आदि बनाने के लिए हलवाई तो जरुर आता है पर उसकी सहायता के लिए गांव वाले ही कार्य करते है और […]

मिलजुल कर कृषि कार्य करना और ल्हास रूपी दावत का मजा

मिलजुल कर कृषि कार्य करना और ल्हास रूपी दावत का मजा

भारत की समृद्ध भाषाओँ में हर कार्य के लिए अलग-अलग शब्द प्रयुक्त किये गए है। कृषि कार्य में भी किये जाने वाले हर कार्य को अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे फसल में खड़ी खरपतवार को निकालने के लिए हमारे यहाँ राजस्थान में “निनाण” करना कहते है, फसल में पानी देने को “पाणत”, बाजरे […]