पगड़ी को भैंस खा गई

पगड़ी नै भैंस खायगी = पगड़ी को भैंस खा गई | सन्दर्भ कथा :- आज सुबह ताऊ के शनिवारीय खूंटे पर आपने पढ़ा कि कैसे ताऊ ने एक ईमानदार जज से भी हारने वाला केस जीत लिया|आज मै ताऊ के एक ऐसे ही मुकदमे का जिक्र कर रहा हूँ जिसकी सुनवाई करने वाली कचहरी का […]

कुछ राजस्थानी कहावतें हिंदी व्याख्या सहित

घोड़ा रो रोवणौ नीं,घोड़ा री चाल रौ रोवणौ है |=घोडे का रोना नही घोडे की चाल का रोना है | एक चोर किसी का घोड़ा ले गया | पर घोडे के मालिक को घोडे की चिंता नही थी | उसका रोना तो फकत इस बात का था कि अन्भिज्ञ चोर घोडे की चाल बिगाड़ देगा […]

एक कवि ने अपने नौकर को अमर किया

अमरता शरीर से नही अच्छे कर्म से प्राप्त होती है आज कितने ही देश भक्त वीरों का नाम मातृभूमि के लिए बलिदान करने से अमर है कितने ही शासक, जननायक,वैज्ञानिक,साधू महात्मा और अच्छे इन्सान अपने अच्छे कार्यों के लिए जाने जाते है वे मर कर भी अमर है, लेकिन अमरता प्राप्त करने लिए जरुरी नही […]

हट जा ताऊ पाछे ने

शनिवार के खूंटे पर कालेज की छोरियों से आई एम् सोरी और मेन्शन नॉट बोलने के चक्कर में ताऊ ने खूब लितर (सैंडिल)खाए लेकिन फ़िर भी ताऊ कहाँ मानने वाला था आज जालतंत्र पर विचरण करते हुए मैंने गूगल बाबा से ताऊ के बारे में पूछा तो गूगल बाबा ने ताऊ के लिए मुझे यु […]

एक राजा का साधारण औरत द्वारा मार्गदर्शन

एक राजा का साधारण औरत द्वारा मार्गदर्शन

गांवों में अक्सर एक साधारण सा आदमी जिसने न तो पढ़ाई लिखाई की हो और न ही कहीं बाहर घुमा हो, किसी बड़े मुद्दे पर एक छोटी सी बात बोलकर इतनी बड़ी सलाह दे जाता है कि सम्बंधित विषय के बड़े-बड़े जानकार भी सुन कर चकित हो जाते है, उसकी छोटी सी चुटीली बात में […]

ताऊ और सेठ की कलम

ताऊ और सेठ की कलम

ताऊ- सेठ जी थांरी छुरी निचे पड़गी !सेठ- डोफा आ तो म्हारी कलम है !ताऊ- सेठ जी म्हारे गलै तो आ इज फिरी !एक बनिया बगल में बही दबाये और कान में कलम खोसे हुए , पीली पगड़ी पहने और मुछे नीची किए अपनी दुकान की और जा रहा था ! उसके पीछे एक भुक्त-भोगी […]

ताऊ का कप टेढा

ताऊ का कप टेढा

दुनिया भर के उल्टे सीधे काम करने बाद भी ताऊ किसी काम में पुरी तरह कामयाब नही हो पाया, लूटपाट,डकैती,जालसाजी करने के बावजूद भी ताऊ रहा कड़का का कड़का | और अपने जी को कई लफडे भी पाल लिए उल्टे सीधे कारनामों की वजह से पुलिस का डर भी ताऊ को सता रहा था | […]

बातां की ब्यालू (बातों ही बातों में डिनर)

बात बहुत पुराणी है उस ज़माने में यातायात के लिए मोटर-गाड़ी नही हुआ करती थी और राजस्थान में तो ऊंट गाड़ी ही यातायात का मुख्य साधन था | रेत के टिल्लो के बीच से दूर-दूर तक सफर बिना ऊंट के सम्भव ही नही था इसीलिए गांवों में लोग यातायात और खेती बाड़ी के कामों के […]

धरती का बीच – सेंटर पॉइंट

धरती का बीच – सेंटर पॉइंट

गांव के चौपाल पर हथाई (बातें करने वालों की भीड़) जुटी हुई थी इन हथाइयों में गांववासी हर मसले पर अपने हिसाब से चर्चा करते रहते है |राजनीती,विज्ञान,खेतीबाड़ी,मौसम,धर्म,अर्थव्यवस्था और विदेश नीति तक पर बड़े मजेदार और चुटीली भाषा में चर्चाएँ होती सुनी जा सकती है| इन चर्चाओं में कई मुद्दों पर ताउओं की सीधी साधी […]

कांग्रेसी, कामरेड तंग करते है, बीजेपी अनाज नही होने देती

कांग्रेसी, कामरेड तंग करते है, बीजेपी अनाज नही होने देती

कांग्रेसी पुरे चौमासे तंग करते है कामरेड हमेशा परेशान करतें है और बीजेपी खेतों में अनाज पैदा नही होने देती | ये सब पढ़कर शायद आप चौंक रहे होंगे लेकिन ये सच है अभी दो दिन पहले राजस्थान के सीकर जिले स्थित अपने गांव के प्रवास के दौरान गुवाड़ (चौपाल) में किसानों द्वारा की जा […]

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