परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-2

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-2

भाग-1 से आगे ………….. राजस्थान का प्रथम परमार वंश – राजस्थान में ई 400 के करीब राजस्थान के नागवंशों के राज्यों पर परमारों ने अधिकार कर लिया था। इन नाग वंशों के पतन पर आसिया चारण पालपोत ने लिखा है-परमारा रुंधाविधा नाग गया पाताळ। हमै बिचारा आसिया, किणरी झुमै चाळ।।मालवा के परमार- मालव भू-भाग पर […]

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-1

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-1

परमार अग्नि वंशीय हैं। श्री राधागोविन्द सिंह शुभकरनपुरा टीकमगढ़ के अनुसार तीन गोत्र हैं-वशिष्ठ, अत्रि व शाकृति। इनकी शाखा वाजसनेयी, सूत्र पारसकर, ग्रहसूत्र और वेद यजुर्वेद है। परमारों की कुलदेवी दीप देवी है। देवता महाकाल, उपदेवी सिचियाय माता है। पुरोहित मिश्र, सगरं धनुष, पीतध्वज और बजरंग चिन्ह है। उनका घोड़ा नीला, सिलहट हाथी और क्षिप्रा […]

दिल्ली के तोमर

दिल्ली के तोमर

History of Tomar Rajvansh in Hindi चंदरबरदाई की रचना पृथ्वीराज रासो में अनंगपाल को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि उसने ही ‘‘लाल-कोट’’ (वर्तमान लाल किला) का निर्माण करवाया था। दिल्ली में तोमर वंश का शासनकाल 900-1200 ई. तक माना जाता है। ‘‘दिल्ली’’ या ‘‘दिल्लिका’’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उदयपुर […]

History of Bhonsla Rajvansh in Hindi भौंसला वंश

History of Bhonsla Rajvansh in Hindi भौंसला वंश

वीरों की तीर्थस्थली रहे चितौड़ के सिसोदिया वंश से उत्पन्न भौंसला वंश में देश के प्रसिद्ध वीर छत्रपति महाराज शिवाजी ने जन्म लिया, जिन्होंने स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए कठिनतम संघर्ष कर भौंसला वंश की कीर्ति को उज्जवल किया। भौंसला वंश की उत्पत्ति चित्तौड़ के सिसोदिया कुल से हैं। इनका गोत्र वैजपायण तथा कहीं-कहीं कौशिक […]

चौल राजवंश

Chaul Rajvansh चौल वंश दक्षिण भारत का प्राचीन राजवंश है| इसकी चर्चा बाल्मीकि रामायण, पाणिनि की अष्टाध्ययी तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मिलती है| इन प्रश्नों में इस वंश को पांडव वंश की शाखा माना गया है| ये चन्द्रवंशीय राजा थे| चन्द्रवंशीय तीन भाइयों पांड्य, चोड़ (चोल) तथा चेरी के अपने अपने नाम से ये […]

गौड़ क्षत्रिय राजवंश : संक्षिप्त परिचय

गौड़ क्षत्रिय राजवंश : संक्षिप्त परिचय

गौड़ क्षत्रिय भगवान श्रीराम के छोटे भाई भरत के वंशज हैं। ये विशुद्ध सूर्यवंशी कुल के हैं। जब श्रीराम अयोध्या के सम्राट बने तब महाराज भरत को गंधार प्रदेश का स्वामी बनाया गया। महाराज भरत के दो बेटे हुये तक्ष एवं पुष्कल जिन्होंने क्रमशः प्रसिद्द नगरी तक्षशिला (सुप्रसिद्ध विश्वविधालय) एवं पुष्कलावती बसाई (जो अब पेशावर […]

बल्ला क्षत्रिय

सिंधु पार बल्लभी जो बल्ला क्षत्रियों की प्रथम राजधानी थी। पाकिस्तान स्थित मुल्तान जो कभी बल्ला क्षत्रियों की द्वितीय राजधानी रही, जिसे मूलजी नामक बल्ला शासक ने बसाया था, बलूचिस्तान जो कभी बल्ला क्षत्रियों का बल्ल क्षेत्र साम्राज्य कहलाता था, सौराष्ट्र स्थित ढाक पाटण जो आज 2200 वर्ष पूर्व सौराष्ट्र प्रान्त में बल्ला क्षत्रियों के […]

शेखावत

शेखावत सूर्यवंशी कछवाह क्षत्रिय वंश की एक शाखा है देशी राज्यों के भारतीय संघ में विलय से पूर्व मनोहरपुर, शाहपुरा, खंडेला, सीकर, खेतडी, बिसाऊ,सुरजगढ़, नवलगढ़, मंडावा, मुकन्दगढ़, दांता, खुड, खाचरियाबास, दूंद्लोद, अलसीसर, मलसिसर, रानोली आदि प्रभाव शाली ठिकाने शेखावतों के अधिकार में थे जो शेखावाटी नाम से प्रशिध है वर्तमान में शेखावाटी की भौगोलिक सीमाएं […]

शेखावत वंश की शाखाएँ -3

-रायसलोत शेखावत :- लाम्याँ की छोटीसी जागीर जागीर से खंडेला व रेवासा का स्वतंत्र राज्य स्थापित करने वाले राजा रायसल दरबारी के वंशज रायसलोत शेखावत कहलाये !राजा रायसल के १२ पुत्रों में से सात प्रशाखाओं का विकास हुवा जो इस प्रकार है !A- लाड्खानी :- राजा रायसल जी के जेस्ठ पुत्र लाल सिंह जी के […]

शेखावत वंश की शाखाएँ -1

* टकनॆत शॆखावत‍‍‍‍- शेखा जी के ज्येष्ठ पुत्र दुर्गा जी के वंशज टकनॆत शॆखावत‍‍‍‍ कहलाये !खोह,पिपराली,गुंगारा आदि इनके ठिकाने थे जिनके लिए यह दोहा प्रशिध हैखोह खंडेला सास्सी गुन्गारो ग्वालेर !अलखा जी के राज में पिपराली आमेर !! टकनॆत शॆखावत‍‍‍‍ शेखावटी में त्यावली,तिहाया,ठेडी,मकरवासी,बारवा ,खंदेलसर,बाजोर व चुरू जिले में जसरासर,पोटी,इन्द्रपुरा,खारिया,बड्वासी,बिपर आदि गावों में निवास करते है […]