जब राजपुतानियों के हाथों में तलवारें देख भागा था मेजर फोरेस्टर

जब राजपुतानियों के हाथों में तलवारें देख भागा था मेजर फोरेस्टर

सन 1803 में राजस्थान में जयपुर रियासत की ईस्ट इंडिया कम्पनी से मैत्रिक संधि व कुछ अन्य रियासतों द्वारा भी मराठों और पिंडारियों की लूट खसोट से तंग राजस्थान की रियासतों ने सन 1818ई में शांति की चाहत में अंग्रेजों से संधियां की| शेखावाटी के अर्ध-स्वतंत्र शासकों से भी अंग्रेजों ने जयपुर के माध्यम से […]

रानी कर्मवती और हुमायूं, राखी प्रकरण का सच

रानी कर्मवती और हुमायूं, राखी प्रकरण का सच

इतिहास में चितौड़ की रानी कर्मवती जिसे कर्णावती भी कहा जाता है द्वारा हुमायूं को राखी भेजने व उस राखी का मान रखने हेतु हुमायूं द्वारा रानी की सहायता की बड़ी बड़ी लिखी हुईं है. इस प्रकरण के बहाने हुमायूं को रिश्ते निभाने वाला इंसान साबित करने की झूंठी चेष्टा की गई| चितौड़ पर गुजरात […]

पन्ना धाय

पन्ना धाय

गुजरात के बादशाह बहादुर शाह ने जनवरी १५३५ में चित्तोड़ पहुंचकर दुर्ग को घेर लिया इससे पहले हमले की ख़बर सुनकर चित्तोड़ की राजमाता कर्मवती (Karmvati)ने अपने सभी राजपूत सामंतों को संदेश भिजवा दिया कि- यह तुम्हारी मातृभूमि है इसे मै तुम्हे सौपती हूँ चाहो तो इसे रखो या दुश्मन को सौप दो | इस […]

चितौड़ की रानी कर्मवती

चितौड़ की रानी कर्मवती

सभी राजपूत रियासतों को एक झंडे के नीचे लाने वाले महाराणा सांगा Maharana Sanga के निधन के बाद चितौड़ Chittor की गद्दी पर महाराणा रतन सिंह बैठे. राणा रतन सिंह के निधन के बाद उनके भाई विक्रमादित्य चितौड़ के महाराणा बने. विक्रमादित्य ने अपनी सेना में सात हजार पहलवान भर्ती किये. इन्हें जानवरों की लड़ाई, […]

चितौड़ की रानी पद्मिनी का जौहर (विडियो सुनें)

विस्मृति बता रही है- यह तो रानी पद्मावती का महल है | इतिहास की बालू रेत पर किसी के पदचिन्ह उभरते हुए दिखाई दे रहे है| समय की झीनी खेह के पीछे दूर से कहीं आत्म-बलिदान का उत्सर्ग की महान परम्परा का कोई कारवां आ रहा है| उस कारवां के आगे चंडी नाच रही है| […]

कहानी एक राजपूतानी की….

कहानी एक राजपूतानी की….

गर्मियों का मौसम था बाड़मेर संभाग में रेत के टीले गर्मी से गर्म होकर अंगारों की तरह दहक रहे थे| लूएँ ऐसे चल रही थी कि बाहर बैठे जीव को झुलसा दे| इस तरह नीचे धरती गर्मी से तप रही थी तो ऊपर आसमान झुलस रहा था| वहीँ खेजडे के एक पेड़ की छाया में […]

साहित्य साधक शाही राजपूत नारियां

प्रताप कुंवरी भटियानी यह महाराजा मानसिंह जोधपुर की भार्या और देवावर ठिकाने के ठाकुर गोविन्ददास भाटी की पुत्री थी| इनका विवाह आषाढ़ सुदी 9वि.स.1889 में हुआ था| इन्होंने कुल 15 ग्रंथो की रचना कर सरस्वती के भण्डार की अभिवृद्धि की थी| उपलब्ध कृतियों की नामावली इस प्रकार है- ज्ञान सागर, ज्ञान प्रकाश, प्रताप पच्चीसी, रघुनाथ […]

अलवर की साहित्य साधक महारानी आनंद कुंवरी राणावत

राजस्थान की राजकुलीन महिला कवयित्रियों में महारानी आनंद कुंवरी का उल्लेखनीय स्थान है| यह महारानी शाहपुरा (मेवाड़) राज्य के राजधिराज माधव सिंह की बहन, राजाधिराज अमरसिंह की राजकुमारी थी और कछवाहों की अलवर रियासत के महाराजा विजयसिंह के साथ विवाही थी| महाराजा विजयसिंह का शासनकाल 1871 से 1914 विक्रमाब्द है| यही अवधि महारानी के काव्य […]

राघोगढ़ की कवयित्री रानी सुन्दर कुंवरी राठौड़

यह किशनगढ़ के महाराजा राजसिंह की पुत्री थी| इनका जन्म महाराणी बांकावतजी की कुक्षि से वि.स.१७९१,कार्तिक सुदि ९ के दिन मथुरा में हुआ था| सुन्दरकुंवरी का विवाह राघोगढ़(मालवा) के खींची नरेश महाराजा बलभद्र सिंह के राजकुमार बलवंत सिंह के साथ हुआ था| इस सम्बन्ध में इन्होंने अपने ग्रन्थ रस्पुंज में लिखा है कि- यह ग्रन्थ […]

रानी ब्रजकुंवरी बांकावत की साहित्य साधना

महारानी ब्रजकुंवरी जिसे कहीं कहीं ब्रजदासी नाम से भी संबोधित किया है, जयपुर के लवाण ठिकाने के राजा सुरजराम की पुत्री थी| लवाण आमेर के राजा भगवंतदास के अनुज राजा भगवानदास की संतति परम्परा का ठिकाना था| लवाण परिवार सदैव से ही धार्मिक प्रवृति का रहा है| इस परिवार की कन्याएं बड़ी धर्म प्रवण और […]