आग्यो राज लुगायां को

आग्यो राज लुगायां को

काका-ताऊ ना भायां को आग्यो राज लुगायां को ।| कोंग्रेस का च्यारूं मेर सूं कर दिन्या है सफाया गहलोत सरकार की कुर्सी का तोड़ नाख्या पाया ना यो पराया जाया , और ना ही माँ का जाया को आग्यो राज लुगायां को ॥ जनता अर पाणी का रुख न कोई जाण ना पायो वोट दिन्या […]

गीत- गाओ टाबरों

गीत- गाओ टाबरों

गीत- गाओ टाबरों थारा मुलकबा सुं देश हरख सी थे ही तो हो आगला टेशन जमाना रे साथ करो खूब फैशन पण याद राखो बुजुर्गा री बातां बे मुस्किल घडी री रातां जोबन रो मद भी चढ़सी कुटुंब कबीलो भी बढसी प्रणय कि भूलभुलइया में प्रियतमा कि आकृष्ट सय्या में भूल मत जाज्यो ज्ञान री […]

जान – चढण को बखत (बारात रवाना होने का वक्त)

राजस्थान में 80- व् 90 के दशक तक बारातों का आनंद कुछ अलग तरह का होता था। उस समय बरातों का समय भी अलग था तो बाराती भी अलग श्रेणी के लोग होते थे। उस समय में बच्चों का बरातों में जाना एक तरह से वर्जित ही था। घर के मुखिया व बड़े, बुजुर्ग ही […]

बाळपणा नै झालौ

बाळपणा नै झालौ

सुण रै म्हारी सखी सहेली, किती सुखी है आ छोटी सी चिड़कली | जद मन करै रुंख पै आवै, जद मन करै आकास में फुर सूं उड़ जावै | सुण रै म्हारी सखी सहेली, आज्या चालां आपां भी उड़बा बाळपणा मै | खावां खाटा-मीठा बोरया, अर काचर-मतिरा आज्या मौज मनावां कांकड़ मै | आज्या घर […]