शेखावाटी प्रदेश का मौर्यकाल

मौर्य सूर्यवंशी क्षत्रिय थे। शाक्यों के उस उच्च तथा पवित्र वंश की वे एक शाखा थे- जिसमें महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। मोर पक्षी के बाहुल्य वाला प्रदेश होने से उसका नाम मौर्य जनपद हुआ और वहां के शासक मौर्य कहलाए 15। बौद्ध धर्मानुयायी होने से ब्राह्मणों ने उन्हें शूद्र कहना प्रारंभ किया […]

शेखावाटी प्रदेश का प्राचीन इतिहास : मत्स्य जनपद

प्रारंभिक वैदिक युग में मत्स्यों का निवास स्थान सरस्वती और हषद्वती नामक वैदिक नदियों के, जो अब भू-गर्भ में विलुप्त हो चुकी हैं के बीच का प्रदेश था। उस काल उसे ब्रह्मऋषि देश या ब्रह्मावर्त का ही एक भाग मानते थे। सही अर्थो में वही आर्यावर्त था। आर्य ऋषियों की पवित्र तपस्थली नैमिषारण्य उसके समीप […]

मेवाड़ के पक्ष में इन कछवाह वीरों ने की थी मुगलों से बगावत

यह घटना उस काल की है, जब आमेर के महाराजा भारमल की मुगल सल्तनत से संधि हो चुकी थी और उनके वंशज मुगलों के सेनापति भी नियुक्त होते थे। तभी एक अदभुत् व अकल्पनीय वाक्या हुआ जिसकी तुलना इतिहास में अमर सिंह राठौड़ के शौर्य से की जा सकती है। लवाण के बाँके राजा भगवानदास […]

ठाकुर श्री हरिदेवजी महाराज, मथुरा

मथुरा स्थित गोर्वधन पर्वत युगों-युगों से विश्वविख्यात हैं। मथुरा चंद्रवंशी क्षत्रिय भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली एवं कर्मभूमि भी रही है। पूरा ब्रज श्रीकृष्ण की कई लीलाओं से कृतार्थ रहा है। यहाँ स्थित गोर्वधन पर्वत को बाल रूपी भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर उठाकर समस्त प्राणीजनों की भयंकर मुसलाधार वर्षा से रक्षा की थी। […]

लोहागढ़ महाराजा सूरजमल के शौर्य का प्रतीक

भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग जाट राजाओं की शौर्यगाथाओं का एक ऐसा किला है, जिसने मुगलों से लोहा लिया | अंग्रेजों ने इस किले पर कई बार आक्रमण किये पर जीत नहीं पाए| अंग्रेज सेनापति सर चार्ल्स मेटकाफ ने गवर्नर जनरल को लिखा था, “ब्रितानी फौजों की प्रतिष्ठा भरतपुर के दुर्भाग्यपूर्ण घेरे में दब गई| शायद […]

Rupgarh Fort रुपगढ़ किले का इतिहास

Rupgarh Fort रुपगढ़ किले का इतिहास  : अरावली के उबड़ खाबड़ मगरों और ऊँची नीची पहाड़ियों की चोटियों में से एक चोटी पर आकाश को कुदेरता, गुमसुम हुआ, यह गौरवशाली दुर्ग ऐसे खड़ा है, जैसे किसी विस्मृत सिद्धि की पुन: प्राप्ति के लिए कोई अनुष्ठान कर रहा हो | कभी इस छोटे से दुर्ग के […]

जिन्हें राजपूत अपना समझते हैं वे राजपूतों की पीठ पर यूँ करते हैं वार

जिन्हें राजपूत अपना समझते हैं वे राजपूतों की पीठ पर यूँ करते हैं वार : 1947 में सत्ता हस्तांतरण के बाद राजपूत जाति राजनेताओं के निशाने पर सबसे ज्यादा रही है| राजनेताओं ने राजपूतों के खिलाफ आम जनता के मन में कटुता घोलने हेतु किस तरह दुष्प्रचार किया,  इसका एक उदाहरण हम इस लेख में […]

जयपुर वासियों ने यूँ सिखाया था मराठों को सबक

जयपुर पर हमला करने आये मराठों को जयपुर की जनता के रोष का सामना करना पड़ा और देखते देखते ही जयपुर की जनता ने मारकाट मचाकर डेढ़ दो हजार मराठों को मार दिया | इसके बाद डेढ़ वर्ष तक राजपुताना में लूटने व चौथ वसूली करने के लिए आने वाले मराठा दस्तों का आना रुक […]

इसलिए नहीं लड़ा था महाराजा सूरजमल ने पानीपत युद्ध

फिल्म पानीपत को लेकर पिछले कई दिनों से भरतपुर के जाट महाराजा सूरजमल मीडिया की सुर्ख़ियों में है | आरोप है कि फिल्म में सूरजमल को लालची दिखाया गया और सोशियल मीडिया में वायरल हो रहे फिल्म के दृश्य में भी महाराजा सूरजमल मराठों से पानीपत युद्ध में सहायता देने के बदले आगरा का किला […]

जोधपुर किले का इतिहास History of Jodhpur Fort

रणबंका राठौड़ों की नगरी जोधपुर में, किसी ओर से भी प्रवेश करने पर कोसों दूर से चिड़ियानाथ पहाड़ी पर धरती का लाडला, मेहरानगढ़ दूर से चमकता दिखाई देता है | जोधपुर में सूरज की सर्वाधिक किरणें पड़ती है अंत: सूरज की रौशनी में नहाये किले की चमक देखते ही बनती है | धरातल से 121 […]

1 3 4 5 6 7 22