हिन्दुत्त्व के रक्षक महाराजा कर्णसिंह जी बीकानेर

हिन्दुत्त्व के रक्षकों का इतिहास खंगाला जाय तो राजस्थान के इतिहास में कई राजाओं के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे पाये जायेंगे। हिन्दुत्त्व की रक्षा के लिए अपने प्राणों व बड़े से बड़ा त्याग करने वाले वीरों की राजस्थान में लम्बी श्रंखला रही है। इसी श्रंखला में बीकानेर के महाराजा कर्णसिंह जी का नाम इतिहास […]

रानी पद्मिनी ने करवाया था सर्जिकल स्ट्राइक, खिलजी को दिया था धोखे का जबाब

अलाउद्दीन खिलजी जब चितौड़ दुर्ग को सैनिक ताकत से फतह नहीं कर सका, तब उसने कपट का सहारा लिया। खिलजी ने राणा को सन्देश भेजा कि- मेरा इरादा आपसे लड़ने का नहीं है। मैं तो आपसे दोस्ती करने का इच्छुक हूँ। आपके पास सिंहल द्वीप से लाये पांच मुझे दे दें तो मैं चला जाऊंगा […]

इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने चीर डाला था मुगलों को, खदेड़ दिया था मेवाड़ से

पिछले दिनों मेवाड़ के महाराणा प्रताप द्वारा अकबर पर विजय बताने वाली इतिहास की पुस्तक के प्रकाशन के बाद, एक खास विचारधारा के लेखकों व व्यक्तियों के बीच खलबली मच गई। वे सरकार पर इतिहास का भगवाकरण करने का आरोप लगाने लगे। इसका कारण था- ‘‘इस कथित विचारधारा के लेखकों ने आजतक सिर्फ हल्दीघाटी युद्ध […]

प्रतिहार क्षत्रिय राजवंश संक्षिप्त परिचय

प्रतिहार क्षत्रिय वंश का बहुत ही वृहद इतिहास रहा है इन्होंने हमेशा ही अपनी मातृभूमि के लिए बलिदान दिया है, एवं अपने नाम के ही स्वरुप प्रतिहार यानी रक्षक बनकर हिंदू सनातन धर्म को बचाये रखा एवं विदेशी आक्रमणकारियों को गाजर मूली की तरह काटा डाला, हमें गर्व है ऐसे हिंदू राजपूत वंश पर जिसने […]

प्रतिहार राजपूतों की उत्पत्ति गुर्जरों से ना होने का ये है बड़ा सबूत

प्रतिहार राजपूतों को गुर्जर देश के शासक होने के कारण गुर्जर नरेश संबोधित किया जाता था, इसी संबोधन से भ्रम पैदा कर आज प्रतिहारों की उत्पत्ति गुर्जरों से प्रचारित की जाती है| इस सबंध में इतिहासकार  देवीसिंह, मंडवा अपनी पुस्तक “प्रतिहारों का मूल इतिहास” में लिखते है- “व्हेनसांग ई. 629-650 तक भारत में रहा था। […]

जाने – प्रतिहार राजपूतो को क्यों कहते है गुर्जर-प्रतिहार या ऐसा ही कुछ और

भारत के महान साम्राज्यों में प्रतिहारों का भी एक बड़ा साम्राज्य रहा है। इसकी एक विशेषता रही है कि जैसे मौर्य, नागवंश तथा गुप्तवंश आदि थे उनके विरोधी दुश्मन एक तरफ ही थे जिससे उपरोक्त वंशों के शासकों को अपने राज्यों तथा साम्राज्य के एक ही दिशा में शत्रु का सामना करना पड़ता था जिसमें […]

इतिहास व महापुरुष हथियाने की कोशिश

भारत में सदियों से जाति व्यवस्था रही है। सभी जातियां अन्य दूसरी जातियों का सम्मान करते हुए, एक साझी संस्कृति में प्रेमपूर्वक रहती आई है। देश के महापुरुष भले किसी जाति के हों, वे सबके लिए आदरणीय व प्रेरणास्त्रोत होते थे। लेकिन आजादी के बाद देश के नेताओं ने एक तरफ जहाँ जातिवाद खत्म करने […]

प्रतिहार क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोजदेव

सम्राट रामभद्र के बाद उसके पुत्र भोजदेव को प्रतिहार साम्राज्य का सम्राट बनाया गया| यह रामभद्र की रानी अप्पादेवी का पुत्र तथा भगवती का उपासक था| भोजदेव को मिहिर तथा आदिवराह भी कहते है| सम्राट भोजदेव के राज्य सिंहासन ग्रहण करने के साथ ही सबसे पहला कार्य बिखरे हुए साम्राज्य को वापस सुसंगठित करने का […]

रानी पद्मावती फिल्म के प्रोमो में झलका भंसाली को पड़े थप्पड़ का असर

चितौड़ की रानी पद्मावती पर बनी विवादित फिल्म का प्रोमो जारी हो चूका है। जिसे सोशियल मिडिया पर करोड़ों लोग देख चुके है। ज्ञात हो रानी पद्मावती पर बनी इस फिल्म का श्री राजपूत करणी सेना ने तीव्र विरोध किया था। करणी सैनिकों ने जयपुर के जयगढ़ में फिल्म की शूटिंग के दौरान के फिल्म […]

क्या प्रतिहार क्षत्रिय वंश की उत्पत्ति गुर्जर जाति से हुई है !

प्रतिहार क्षत्रिय वंश का इतिहास वृहद व गौरवशाली रहा है| आठवीं शती के मध्य भारतीय राजनीति में व्याप्त शुन्यता भरने में जो राजनैतिक शक्तियां सक्रीय हुई, उनमें प्रतिहार क्षत्रियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है| गुर्जर देश पर शासन करने के कारण इतिहासकारों ने प्रतिहारों को गुर्जर प्रतिहार लिख कर भ्रम पैदा कर दिया और वर्तमान […]