युवराज महासिंह जो इसलिए नहीं बैठ सके आमेर की गद्दी पर

युवराज महासिंह आमेर के कुंवर जगतसिंह के ज्येष्ठ पुत्र और राजा मानसिंहजी के पौत्र थे | आपका जन्म असोज बदि 12, वि.सं. 1642 (ई.सं.1585) को हुआ था | कुंवर जगतसिंह की मृत्यु पिता के सामने ही हुई थी | अत: उनके पुत्र महासिंह को युवराज बनाया गया | वंश परम्परा के अनुसार महा सिंह आमेर […]

युवराज जगतसिंह आमेर जो नहीं बैठ सके सिंहासन पर

युवराज जगतसिंह आमेर के राजा मानसिंहजी के ज्येष्ठ पुत्र थे | इनका जन्म कार्तिक सुदी १ वि.सं. 1625 (ई.सं. 1568) को आमेर की रानी कनकावती की कोख से हुआ था | रानी कनकावती जैतारण के राठौड़ रतनसिंह उदावत की पुत्री थी | कुंवर जगतसिंह 12 वर्ष की उम्र में ही मुग़ल दरबार में जाने लगे […]

मायरा व भात भरने की परम्परा में भी जुड़ा है पर्यावरण प्रेम

मायरा यानी भात भरने की परम्परा में भी जुड़ा है पर्यावरण प्रेम : हमारे देश में बहन की पुत्री या पुत्र की शादी में मायरा भरने की परम्परा सदियों पुरानी है | मायारा भरने को भात भरना भी कहते हैं | कोई भी महिला अपने पुत्र या पुत्री की शादी तय होते ही गुड़ की […]

महार कलां का इतिहास History of Mahar Kalan

आमेर के युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी ने महार गांव बसाया था | युवराज कुम्भाजी के वंशज कुम्भावत कछवाह कहलाते हैं | आजादी पूर्व महार  कुम्भावत कछवाहों का प्रमुख ठिकाना रहा है | वर्तमान में महार कलां के नाम से जाना जाने वाला यह गांव जयपुर से 42 किलोमीटर और चौमू से 15 किलोमीटर दूर […]

महार कलां गांव के चमत्कारी संत सालागनाथजी

महार कलां Mahar Kalan गांव में सुरम्य पहाड़ी की तलहटी में संत सालगनाथजी का स्थान है, कभी यहाँ गांव बसने से पूर्व एक छोटे से तिबारे में नाथ संत सालगनाथजी विराजते थे | महार गांव आमेर के राजा चंद्रसेन जी के युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी ने बसाया था | युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी […]

नटवर निकेतन मंदिर रामगढ शेखावाटी राजस्थान

नटवर निकेतन मंदिर : शेखावाटी आंचल के रामगढ सेठान कस्बे में बना बना यह मंदिर वास्तुकला का सुन्दर उदाहरण है | इस मंदिर का निर्माण आज से 176 वर्ष पूर्व शेखावाटी इतिहास के विख्यात दानवीर सेठ अणतराम पौद्दार ने बनवाया था | नटवर निकेतन मंदिर नाम वाले इस भव्य मंदिर की कई चमत्कारिक कहानियां जनमानस […]

खेजड़ला ठिकाने का इतिहास | History of Khejrla Fort

खेजड़ला ठिकाने का इतिहास | History of Khejrla Fort : जैसलमेर के रावल केहर के छोटे भाई हमीर के वंशज जैसलमेर से मछवाला गांव आये और मछवाला से पोकरण | पोकरण रहने के कारण भाटियों की यह शाखा पोकरणा भाटी कहलाई | पोकरण रहने के काफी समय बाद भाटी वंश की यह शाखा बीकानेर क्षेत्र […]

रणसी गांव का इतिहास : History of Ransi Gaon

रणसी गांव का इतिहास : History of Ransi Gaon | जोधपुर की बिलाड़ा तहसील में बसा है रणसी गांव | रणसी गांव बहुत ही प्राचीन गांव है | गांव में बने तालाब किनारे कुछ स्मारक रूपी छतरियां बनी है, जिनके बारे में कहा जाता है कि यह पालीवाल ब्राह्मणों की है | ये स्मारक साबित […]

रामगढ सेठान के गंगा माई मंदिर से जुड़ा है एक सेठानी का रोचक किस्सा

रामगढ सेठान में बना एक गंगा माई का मंदिर और इस मंदिर के निर्माण के पीछे जुड़ी है एक नेत्रहीन सेठानी की रोचक कहानी | रामगढ सेठान क़स्बा राजस्थान के शेखावाटी आँचल में बसा है, इसे रामगढ शेखावाटी के नाम से भी जाना जाता है | रामगढ सेठान कस्बे को सेठों ने बसाया था और […]

रणसी गांव की रहस्यमयी भूत बावड़ी का सच

जोधपुर से लगभग 86 और मेड़ता से 45 किलोमीटर जोधपुर जिले में बसा है रणसी गांव | आजादी से पूर्व यह गांव मारवाड़ के राठौड़ साम्राज्य के अधीन चांपावत राठौड़ों की जागीर था | इसी गांव में बना है एक महल और एक बावड़ी, जिसके लिए इतिहास में प्रचलित है कि ये महल व बावड़ी […]