History of Lamiya Fort लामिया का इतिहास

History of Lamiya Fort: इतिहास में राजा रायसल दरबारी के नाम से प्रसिद्ध रायसलजी को सात गांवों की जमींदारी मिली थी | राजा रायसल दरबारी अमरसर के शासक राव सूजाजी के पुत्र थे | वि. सं. 1611 में रायसलजी ने अपनी जमींदारी में एक छोटे से किले का निर्माण कर लामिया नाम से गांव बसाया […]

गौरक्षा के लिये मर मिटे थे ये मुसलमान

गौरक्षा के लिए किसी मुसलमान द्वारा प्राणों की आहुति देने की बात की जाय तो शायद ही कम लोग पचा पायेंगे | लेकिन इतिहास में मुसलमानों द्वारा गौरक्षा के लिए प्राणों के उत्सर्ग के उदाहरण मिल जाते हैं | रघुनाथसिंह कालीपहाड़ी द्वारा लिखित “शेखावाटी प्रदेश का राजनैतिक इतिहास” पढ़ते हुये मुझे चुरू जिले के आसलसर […]

माण्डण युद्ध, जब राजपूत व जाटों ने मिलकर सबक सिखाया मुगलों को

माण्डण युद्ध 6 जून, 1775 ई. के दिन रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी व शेखावतों के मध्य हुआ था | यह युद्ध इतना भीषण था कि विजयी शेखावत पक्ष की हर शाखा उपशाखा के वीरों ने अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने के लिए प्राणों की आहुति दी थी | शाही सेना का […]

ये था देश की गुलामी का सबसे बड़ा कारण -1

भारत में एक से बढ़कर एक योद्धा हुए हैं | यहाँ की हर घाटी व मैदान रणक्षेत्र रहा है, फिर सवाल उठता है कि भारत गुलाम क्यों हुआ ? इस सवाल के जबाब में कई किताबें लिखी जा सकती है और लिखी भी गई है और ज्यादातर इतिहासकारों ने इस विषय पर गहन मंथन भी […]

आमेर के ये पांच युवराज इसलिये नहीं बैठ सके राजगद्दी पर

आमेर के इतिहास पर नजर डाली जाये तो आमेर के पांच युवराज राजगद्दी के अधिकारी होते हुए भी गद्दी पर नहीं बैठ सके | इन सभी युवराजों को भिन्न भिन्न कारणों से आमेर की राजगद्दी नसीब नहीं हुई | इनमें सबसे पहले थे – युवराज कुम्भाजी | कुम्भाजी आमेर नरेश चंद्रसेनजी के बड़े पुत्र थे […]

ठाकुर हणूंतसिंह डूण्डलोद, मांडण युद्ध के योद्धा

बिसाऊ के ठा. केसरीसिंह शार्दूलसिंहोत के दोनों पुत्रों में ठाकुर हणूंतसिंह ज्येष्ठ थे। उन्होंने डूण्डलोद में गढ़ बनवा कर अपना अलग ठिकाना कायम कर लिया। बिसाऊ पर उनके छोटे भाई सूरजमल का अधिकार रहा। द्वितीय जाट अभियान के समय (सं. 1731 वि.) नवाब नजफकुली ने झुंझुनू पर भी चढ़ाई करनी चाही थी, किन्तु अपने सलाहकारों […]

राजपूत व जाटों के खिलाफ यूँ लामबंद हुये थे मुग़ल व मराठा

विक्रम सम्वत् 1830 की आसोज शुक्ला पंचमी के दिन मुग़ल बादशाह शाहआलम द्वितीय प्रकट हुआ। दिल्ली निवासियों ने पहली बार यह जाना कि बादशाह जीवित है और दिल्ली आ रहा है। मराठों की विशाल सेना उसके साथ थी। मुगल सेना का संचालक मिर्जा नजफखां सेना के अग्रभाग में चल रहा था। रुहेला पठानों के प्रदेश […]

राजा जयसिंहजी व शिवाजी महाराज के मध्य हुई संधि के पीछे का सच

मिर्जा राजा जयसिंहजी व शिवाजी के मध्य पुरन्दर की संधि हुई थी, इससे पहले इतिहास में पढाया जाता है कि राजा जयसिंहजी ने शिवाजी की सोते समय पगड़ी मंगावा ली थी और उनके सिरहाने पत्र रखवा दिया था कि या तो सुबह आकर मुझसे मिलना, नहीं तो आज पगड़ी मंगवाई है वैसे ही आपका मस्तक […]

युवराज सूरजमलजी जिन्हें इस कारण नहीं मिली आमेर की गद्दी

युवराज सूरजमलजी आमेर के राजा पूरणमलजी के पुत्र थे | राजा पूरणमलजी शिखरगढ़ युद्ध में शेखावतों की सहायतार्थ हुमायूँ के छोटे भाई मिर्जा हिंदाल के साथ युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे | मिर्जा हिंदाल ने शेखावत राज्य अमरसर पर आक्रमण किया था | राजा पूरणमलजी शेखावतों के पक्ष में युद्ध करने आये […]

जखोड़ा का इतिहास हैरिटेज शराब के प्रसारक ठा.करणीसिंह से जुड़ा है

जखोड़ा ग्राम चिड़ावा से 17 किलोमीटर, मंड्रेला से 7 किलोमीटर, झुंझुनू से 30 किलोमीटर और पिलानी से 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित है l यह गांव भैरुंसिंह जी को जागीर में मिला था | ठाकुर भैरुंसिंहजी ने यहाँ एक ऊँचे टीले पर किला बनवाया था, पर देखरेख के अभाव व गड़ा धन निकालने के लोभी […]

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