ठाकुर हणूंतसिंह डूण्डलोद, मांडण युद्ध के योद्धा

बिसाऊ के ठा. केसरीसिंह शार्दूलसिंहोत के दोनों पुत्रों में ठाकुर हणूंतसिंह ज्येष्ठ थे। उन्होंने डूण्डलोद में गढ़ बनवा कर अपना अलग ठिकाना कायम कर लिया। बिसाऊ पर उनके छोटे भाई सूरजमल का अधिकार रहा। द्वितीय जाट अभियान के समय (सं. 1731 वि.) नवाब नजफकुली ने झुंझुनू पर भी चढ़ाई करनी चाही थी, किन्तु अपने सलाहकारों […]

राजपूत व जाटों के खिलाफ यूँ लामबंद हुये थे मुग़ल व मराठा

विक्रम सम्वत् 1830 की आसोज शुक्ला पंचमी के दिन मुग़ल बादशाह शाहआलम द्वितीय प्रकट हुआ। दिल्ली निवासियों ने पहली बार यह जाना कि बादशाह जीवित है और दिल्ली आ रहा है। मराठों की विशाल सेना उसके साथ थी। मुगल सेना का संचालक मिर्जा नजफखां सेना के अग्रभाग में चल रहा था। रुहेला पठानों के प्रदेश […]

राजा जयसिंहजी व शिवाजी महाराज के मध्य हुई संधि के पीछे का सच

मिर्जा राजा जयसिंहजी व शिवाजी के मध्य पुरन्दर की संधि हुई थी, इससे पहले इतिहास में पढाया जाता है कि राजा जयसिंहजी ने शिवाजी की सोते समय पगड़ी मंगावा ली थी और उनके सिरहाने पत्र रखवा दिया था कि या तो सुबह आकर मुझसे मिलना, नहीं तो आज पगड़ी मंगवाई है वैसे ही आपका मस्तक […]

युवराज सूरजमलजी जिन्हें इस कारण नहीं मिली आमेर की गद्दी

युवराज सूरजमलजी आमेर के राजा पूरणमलजी के पुत्र थे | राजा पूरणमलजी शिखरगढ़ युद्ध में शेखावतों की सहायतार्थ हुमायूँ के छोटे भाई मिर्जा हिंदाल के साथ युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे | मिर्जा हिंदाल ने शेखावत राज्य अमरसर पर आक्रमण किया था | राजा पूरणमलजी शेखावतों के पक्ष में युद्ध करने आये […]

जखोड़ा का इतिहास हैरिटेज शराब के प्रसारक ठा.करणीसिंह से जुड़ा है

जखोड़ा ग्राम चिड़ावा से 17 किलोमीटर, मंड्रेला से 7 किलोमीटर, झुंझुनू से 30 किलोमीटर और पिलानी से 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित है l यह गांव भैरुंसिंह जी को जागीर में मिला था | ठाकुर भैरुंसिंहजी ने यहाँ एक ऊँचे टीले पर किला बनवाया था, पर देखरेख के अभाव व गड़ा धन निकालने के लोभी […]

युवराज किशनसिंह आमेर : Amer History

आमेर के युवराज किशनसिंह का जन्म भाद्रपद बदि 9 वि.सं. 1711 (ई.सं. 1654) में हुआ था | आप मिर्जा राजा जयसिंहजी के पौत्र व राजा रामसिंहजी के पुत्र थे | इनकी माता कोटा के राव मुकन्दसिंहजी हाड़ा की पुत्री थी | युवराज किशनसिंह एक मेधावी राजकुमार थे | आप कर्मठ, ओजस्वी, उत्साहवान और शूरवीर राजकुमार […]

ठाकुर बाघसिंह खेतड़ी : मांडण युद्ध के योद्धा

ठाकुर बाघसिंह खेतड़ी : खेतड़ी के स्वामी भोपालसिंह सं. 1828 वि. (भादवा बदी’ 10) में लोहारू के युद्ध में मारे गये। उनके निःसन्तान होने से बाघसिंह को खेतड़ी का स्वामी बनने का अवसर मिला। ठा. किशनसिंह शार्दूलसिंहोत के वे तृतीय पुत्र थे। भोपालसिंह और पहाडसिंह उनके बड़े भाई थे। वे क्रोधी स्वभाव के थे किन्तु […]

युवराज महासिंह जो इसलिए नहीं बैठ सके आमेर की गद्दी पर

युवराज महासिंह आमेर के कुंवर जगतसिंह के ज्येष्ठ पुत्र और राजा मानसिंहजी के पौत्र थे | आपका जन्म असोज बदि 12, वि.सं. 1642 (ई.सं.1585) को हुआ था | कुंवर जगतसिंह की मृत्यु पिता के सामने ही हुई थी | अत: उनके पुत्र महासिंह को युवराज बनाया गया | वंश परम्परा के अनुसार महा सिंह आमेर […]

युवराज जगतसिंह आमेर जो नहीं बैठ सके सिंहासन पर

युवराज जगतसिंह आमेर के राजा मानसिंहजी के ज्येष्ठ पुत्र थे | इनका जन्म कार्तिक सुदी १ वि.सं. 1625 (ई.सं. 1568) को आमेर की रानी कनकावती की कोख से हुआ था | रानी कनकावती जैतारण के राठौड़ रतनसिंह उदावत की पुत्री थी | कुंवर जगतसिंह 12 वर्ष की उम्र में ही मुग़ल दरबार में जाने लगे […]

मायरा व भात भरने की परम्परा में भी जुड़ा है पर्यावरण प्रेम

मायरा यानी भात भरने की परम्परा में भी जुड़ा है पर्यावरण प्रेम : हमारे देश में बहन की पुत्री या पुत्र की शादी में मायरा भरने की परम्परा सदियों पुरानी है | मायारा भरने को भात भरना भी कहते हैं | कोई भी महिला अपने पुत्र या पुत्री की शादी तय होते ही गुड़ की […]

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