ठाकुर भाखरसिंह कूंपावत गजसिंहपुरा के भौमिया महाराज

ठाकुर भाखरसिंह कूंपावत : गजसिंहपुरा गांव के तालाब किनारे एक छतरी के रूप स्मारक बना है | इस छतरी के मध्य घोड़े पर सवार एक योद्धा की प्रतिमा बनी है, प्रतिमा में योद्धा के घोड़े के आगे एक महिला की भी छवि बनी है | गजसिंहपुरा गांव के रहने वाले ठाकुर सुमेरसिंह कूंपावत के अनुसार […]

ठाकुर नाहरखान आसोप जो आज भी लोकदेवता के रूप में पूजे जाते हैं

ठाकुर नाहरखान आसोप : वीरवर कूंपाजी राठौड़ की वंश परम्परा में एक से बढ़कर एक कई वीरों ने जन्म लिया | कूंपाजी के वंशज कूंपावत राठौड़ कहलाये और आसोप इनका प्रमुख ठिकाना था, जो मारवाड़ रियासत में महत्त्वपूर्ण था | मारवाड़ की रक्षार्थ यहाँ के वीरों ने एक से बढ़कर एक बलिदान दिए | वीरों […]

नटवर निकेतन मंदिर रामगढ शेखावाटी राजस्थान

नटवर निकेतन मंदिर : शेखावाटी आंचल के रामगढ सेठान कस्बे में बना बना यह मंदिर वास्तुकला का सुन्दर उदाहरण है | इस मंदिर का निर्माण आज से 176 वर्ष पूर्व शेखावाटी इतिहास के विख्यात दानवीर सेठ अणतराम पौद्दार ने बनवाया था | नटवर निकेतन मंदिर नाम वाले इस भव्य मंदिर की कई चमत्कारिक कहानियां जनमानस […]

इसलिए आज भी स्थानीय लोगों द्वारा पूजे जाते हैं सामंत अलखाजी

अलखाजी रियासती काल में शेखावाटी के एक छोटे से जमींदार थे | उनके अधीन महज कुछ गांव ही थे, पर उन्होंने ऐसा क्या किया कि लोग आज भी जगह जगह उनके पगलिये यानी पैरों के निशानों की पूजा करते हैं | इस लेख में आज हम अलखा जी के बारे में जानकारी देंगे और साथ […]

लोक देवता हड़बूजी सांखला

शक्ति और भक्ति के संगम हड़बूजी (नागौर) के महाराज सांखला के पुत्र और राव जोधाजी (1438-89 ई.) के समकालीन थे। पिता की मृत्यु के पश्चात् ये फलौदी के गाँव हरभजमाल में रहने लगे जहाँ इन्होंने बालीनाथ जी से दीक्षा ली। लोक-देवता रामदेवजी हड़बूजी के मौसी के बेटे भाई थे। रामदेवजी ने जब समाधि ली तो […]

इस देवी ने दिखाया था मुग़ल सेना को चमत्कार

सन 1679 के मार्च  महीने में मुगल सेना देवी के इस मंदिर को तोड़ने के लिए जूझ रही थी | मंदिर को बचाने के लिए मुग़ल सेना का प्रतिरोध करने वाले योद्धा भी नहीं थे, बावजूद मुग़ल सेना का मंदिर तोड़ने का मनसुबा सफल नहीं हो रहा था | जबकि इससे पूर्व खंडेला, हर्षनाथ व […]

अम्बिकेश्वर महादेव आमेर के कछवाह राजवंश के कुलदेवता

अम्बिकेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर आमेर में स्थित है| अम्बिकेश्वर महादेव कछवाह राजवंश के कुलदेवता है| यानी शेखावत, राजावत, नरुका, खंगारोत, कुम्भावत, क्ल्यानोत आदि कछवाह राजपूतों के कुलदेवता हैं| इस मंदिर के युवा पुजारी के अनुसार यह मंदिर पांच हजार वर्ष पुराना है और भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा है| युवा पुजारी के अनुसार भगवान […]

ऐतिहासिक, पौराणिक व चमत्कारी ज्वालामाता शक्तिपीठ जोबनेर

जोबनेर स्थित ज्वालामाता मंदिर राजस्थान की प्राचीन व प्रसिद्ध शक्तिपीठ है| जोबनेर अरावली पर्वतमाला की विशाल पहाड़ी के शिखर की गोद में बसा है और इसी पहाड़ी की ढलान पर पहाड़ के बीचों बीच उसके हृदय स्थल पर ज्वालामाता का भव्य मंदिर बना है| सफ़ेद संगमरमर से बना यह मंदिर दूर से ही सुन्दर व […]

जडूला (बाल) ना चढाने पर बच्चों को रुलाते हैं यहाँ के भैरूंजी महाराज

विवधताओं से भरी हमारे देश की संस्कृति में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित है। इन्हीं मान्यताओं में से है एक है, भैरूंजी महाराज  को बच्चे का जडूला चढ़ाना। किसी भी बच्चे के पहली बार बाल काट कर देवता को चढ़ाना, जड़ूला चढ़ाना कहा जाता है। ज्यादातर जगह यह जडू़ला भैरूंजी महाराज के चढ़ता है। पर […]

लोक देवता गोगाजी

लोक देवता गोगाजी ‘पीर के रूप में समूचे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हैं। चौहान वंश में “धंधरान धंगजी’ नामक शासक हुए जिन्होंने धांधू (जिला-चुरू) नगर बसाया था। राणा धंग के दो रानियां थी। पहली रानी से दो पुत्र हर्ष और हरकरण तथा एक पुत्री जीण हुए। सीकर से 10 कि.मी. दूर दक्षिण पूर्व में हर्ष एवं […]

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