जडूला (बाल) ना चढाने पर बच्चों को रुलाते हैं यहाँ के भैरूंजी महाराज

जडूला (बाल) ना चढाने पर बच्चों को रुलाते हैं  यहाँ के भैरूंजी महाराज

विवधताओं से भरी हमारे देश की संस्कृति में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित है। इन्हीं मान्यताओं में से है एक है, भैरूंजी महाराज  को बच्चे का जडूला चढ़ाना। किसी भी बच्चे के पहली बार बाल काट कर देवता को चढ़ाना, जड़ूला चढ़ाना कहा जाता है। ज्यादातर जगह यह जडू़ला भैरूंजी महाराज के चढ़ता है। पर […]

लोक देवता गोगाजी

लोक देवता गोगाजी

लोक देवता गोगाजी ‘पीर के रूप में समूचे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हैं। चौहान वंश में “धंधरान धंगजी’ नामक शासक हुए जिन्होंने धांधू (जिला-चुरू) नगर बसाया था। राणा धंग के दो रानियां थी। पहली रानी से दो पुत्र हर्ष और हरकरण तथा एक पुत्री जीण हुए। सीकर से 10 कि.मी. दूर दक्षिण पूर्व में हर्ष एवं […]

राणी भाटियाणी जसोल

राणी भाटियाणी जसोल

Mata Rani Bhatiyani Jasol Story in Hindi मालानी क्षेत्र सदैव ही सती, संत और शूरमाओं की खान रहा है| वीरों ने जहाँ इस भूमि को अपने रक्त से सींचा वहीं सतियों और संतों ने इसे अपनी भक्ति से पावन किया| मालानी क्षेत्र (वर्तमान बाड़मेर जिला) में जसोल ठिकाने पर रावल महेचों का शासन रहा है। […]

सचियाय माता

सचियाय माता

sachiyay Mata temple Osian Rajasthan सचियाय (सच्चिवाय) माता का भव्य मंदिर जोधपुर से लगभग 60 कि.मी. की दूरी पर उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर ओसियॉ में स्थित है। इसीलिये इसे ओसियॉ माता भी कहा जाता है। ओसियां प्राचीनकाल से धार्मिक व कला का महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ पर 8 वीं व 12 वीं सदी के […]

भाटी राजवंश की कुलदेवी स्वांगियां माता

भाटी राजवंश की कुलदेवी स्वांगियां माता

स्वांगियां माता : राजस्थान के जनमानस में आस्था की प्रतीक लोकदेवियों, कुलदेवियों के उद्भवसूत्र पर यदि दृष्टि डाली जाये तो हम पायेंगे कि शक्ति की प्रतीक बहुत सी प्रसिद्ध देवियों का जन्म चारणकुल में हुआ है। चारणकुल में जन्मी प्रसिद्ध देवियों में आवड़, स्वांगियां, करणी माता आदि प्रमुख है। विभिन्न राजवंशों की गौरवगाथाओं के साथ […]

पुण्डीर व दाहीमा क्षत्रियों की कुलदेवी दधिमती माता

पुण्डीर व दाहीमा क्षत्रियों की कुलदेवी दधिमती माता

दधिमती माता मंदिर : भारतीय स्थापत्यकला एवं मूर्तिकला का गौरव, प्रतिहारकालीन मंदिर स्थापत्य मूर्तिकला का सुन्दर उदाहरण, प्राचीन भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्ट कला का प्रतिनिधित्व करता, दधिमती माता का मंदिर राजस्थान के नागौर जिले के जायल कस्बे के पास गोठ मांगलोद गांव में स्थित है। महामारू शैली का श्वेत पाषाण से निर्मित शिखरबद्ध यह मंदिर […]

करणी माता मंदिर देशनोक बीकानेर

करणी माता मंदिर देशनोक बीकानेर

करणी माता मंदिर  : राजस्थान के बीकानेर शहर से 32 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में बीकानेर नागौर सड़क मार्ग पर देशनोक बसा हुआ है। इसी देशनोक में विश्व में चूहों वाले मंदिर के नाम विख्यात, शक्ति के उपासकों का श्रद्धास्थल, गौसेवा व शक्ति की प्रतीक श्री करणी माता का मंदिर है। श्री करणी मढ देशनोक […]

सामाजिक समरसता के प्रतीक लोक देवता बाबा रामदेव पीर

सामाजिक समरसता के प्रतीक लोक देवता बाबा रामदेव पीर

Lok Devta Baba Ramdev, Runicha भारत की इस पवित्र धरती पर समय समय पर अनेक संतों, महात्माओं, वीरों व सत्पुरुषों ने जन्म लिया है। युग की आवश्कतानुसार उन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के बल से, दुखों से त्रस्त मानवता को दुखों से मुक्ति दिला जीने की सही राह दिखाई। 15 वीं शताब्दी के आरम्भ में […]

लोक देवता हड़बू जी सांखला

लोक देवता हड़बू जी सांखला

राजस्थान के जन मानस में लोक देवताओं का बहुत महत्त्व है| इन लोक देवताओं के प्रति जन मानस में अटूट विश्वास का ही कमाल है कि इन लोक देवताओं के स्थान पर विभिन्न जातियों, वर्गों, सम्प्रदायों के लोग बिना किसी भेदभाव, छुआछुत के एक साथ एकत्र होकर अनेकता के एकता प्रदर्शित कर जातीय व साम्प्रदायिक […]

बिश्नोई समाज के प्रवर्तक संत जाम्भोजी पंवार

बिश्नोई समाज के प्रवर्तक संत जाम्भोजी पंवार

Bishnoi community promoter saint Jambhoji Panwar history in Hindi राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि में सिर्फ वीर ही नहीं, कई ऐसे संतों ने भी जन्म लिया जिन्होंने भक्ति, ईश्वर साधना, आत्मबोध के साथ ही तत्कालीन समाज में फैली बुराइयों को जड़ से समाप्त करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किये|  इन संतों को उनके सुकृत्यों […]

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