कर्नल टॉड ने फैलाई कई ऐतिहासिक भ्रांतियां

कर्नल टॉड ने फैलाई कई ऐतिहासिक भ्रांतियां : राजस्थान के इतिहास व इतिहासकारों के नाम की चर्चा चलती है तो बतौर इतिहासकार कर्नल टॉड का नाम शीर्ष पर आता है|  ज्यादातर आधुनिक इतिहासकारों की कथित शोध (Colonel Tod)कर्नल टॉड द्वारा लिखित इतिहास के आगे पीछे ही घूमती है. हर कोई अपनी बात को प्रमाणिक साबित […]

कन्हैयालाल सेठिया की कविता “अरे घास री रोटी ही” का ये है सच

भारत में इतिहास लेखन कभी रुचिकर नहीं रहा| भारतीय शासक इतिहास लेखन को लेकर प्राचीन काल से उदासीन रहे| लेकिन भारत के साहित्यकारों ने अपने साहित्य में ऐतिहासिक घटनाकर्मों का जमकर जिक्र किया| यही कारण है कि राजस्थान सहित भारत का ज्यादातर साहित्य वे ही लोग समझ सकते है जो इतिहास के जानकार है| और […]

काव्य कथा ने बना दिया इस देशभक्त राजा को देशद्रोही : फ़िल्में कितना इतिहास बिगड़ेगी सोचो

काव्य कथा ने बना दिया इस देशभक्त राजा को देशद्रोही : फ़िल्में कितना इतिहास बिगड़ेगी सोचो

ज्ञान दर्पण पर पिछली पोस्ट में भी आपने पढ़ा कि पत्रकार, साहित्यकार डा. आनन्द शर्मा ने कैसे जयचंद पर शोध किया और उन्हें जयचंद के खिलाफ इतिहास में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले कि जिनके आधार पर जयचंद को गद्दार ठहराया जा सके| डा. आनंद शर्मा अपने ऐतिहासिक उपन्यास “अमृत पुत्र” के पृष्ठ 48 पर […]

गद्दार नहीं धर्मपरायण और देशभक्त राजा थे जयचंद

गद्दार नहीं धर्मपरायण और देशभक्त राजा थे जयचंद

जयचंद का नाम आते ही हर किसी व्यक्ति के मन में एक गद्दार की छवि उभर आती है| यही नहीं जयचंद नाम को गद्दार के पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किया जाने लगा है| जबकि जयचंद जिन पर आरोप है कि उन्होंने पृथ्वीराज से बदला लेने के लिए गौरी को बुलाया और उसकी सहायता की| […]

शोषक नहीं प्रजा पोषक थे राजा

शोषक नहीं प्रजा पोषक थे राजा

आजादी के बाद देश के सभी राजनैतिक दलों द्वारा सामंतवाद और देशी रियासतों के राजाओं को कोसना फैशन के समान रहा है| जिसे देखो मंच पर माइक हाथ में आते ही मुद्दे की बात छोड़ राजाओं को कोसने में थूक उछालकर अपने आपको गौरान्वित महसूस करता है| इस तरह नयी पीढ़ी के दिमाग में देशी […]

अकबर – आमेर संधि के मायने

अकबर – आमेर संधि के मायने

अकबर के साथ आमेर के राजा भारमल द्वारा राजनैतिक संधि करने व बाद में उसके वंशजों द्वारा उसे निभाने को लेकर आज उस काल की परिस्थितियों को बिना समझे कई तरह की बातें की जाती है| कई अति कट्टर धार्मिक प्रवृति के लोग मुस्लिम शासकों की आलोचना करते समय आमेर के राजाओं का चरित्र हनन […]

आबू पर्वत पर अग्निकुण्ड से कैसे उत्पन्न हुये थे क्षत्रिय ?

आबू पर्वत पर अग्निकुण्ड से कैसे उत्पन्न हुये थे क्षत्रिय  ?

आबू पर्वत क्षत्रियों की उत्पत्ति के बारे में अक्सर सुनने पढने को मिलता है कि क्षत्रिय राजस्थान में आबू पर्वत पर आयोजित यज्ञ से उत्पन्न हुये है पर क्या यज्ञ के अग्निकुण्ड से मानव की उत्पत्ति संभव है ? यदि नहीं तो फिर यह कहानी व मान्यता कैसे प्रचलित हुई ? क्षत्रियों की अग्निकुंड से […]

दुष्प्रचार का शिकार : जयचंद

किसी भी धोखेबाज, देशद्रोही या गद्दार के लिए जयचंद नाम मुहावरे की तरह प्रयोग किया जाता है| साहित्यिक रचनाएँ हो, कवियों की काव्य रचनाएँ हो या देशवासियों के आम बोलचाल की भाषा में धोखेबाज, गद्दार, घर के भेदी, देशद्रोही को जयचंद की तुरंत उपमा दे दी जाती है| बेशक उपमा देने वाला व्यक्ति जयचंद के […]

जोधा-अकबर : कहाँ से शुरू हुआ भ्रम और विवाद ?

जोधा-अकबर : कहाँ से शुरू हुआ भ्रम और विवाद ?

गोवरिकर की फिल्म जोधा-अकबर को श्री राजपूत करणी सेना ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए विरोध कर राजस्थान के किसी सिनेमाघर में आजतक प्रदर्शित नहीं होने दी| यह विवाद अभी ठीक से शांत ही नहीं हुआ था कि एकता कपूर की बालाजी टेलीफिल्म्स ने इसी विषय जोधा-अकबर पर सीरियल बना जी टीवी […]

चक्रवर्ती सम्राट विचित्रवीर्य का नाम चित्र-रथ से विचित्र वीर्य क्यों पड़ा ?

महाभारत कालीन महाराज धृतराष्ट्र और पांडू के जन्म पर हमें पढाया व टीवी में दिखाया जाता है कि वे वेद व्यास की संतानें है क्या वाकई महाराज धृतराष्ट्र और पांडू वेद व्यास जो ब्राह्मण थे की संतान है ? या वेद व्यास ने चक्रवर्ती सम्राट विचित्र वीर्य जिनका असली नाम चित्र रथ था के संरक्षित […]