प्रतिहार राजवंश पर इतिहासकार जगदीशसिंह गहलोत ने जो लिखा

प्रतिहार राजवंश  क्षत्रिय या गुर्जर :  इतिहासकार जगदीशसिंह गहलोत ने राजपूत शासनकाल की कमियों पर बेबाकी से कलम चलाई है, जिसे पढने के बाद उन पर यह आरोप कोई नहीं लगा सकता कि वे राजपूतों के दरबारी इतिहासकार थे | उन्होंने प्रतिहार राजवंश के गुर्जर जाति से सम्बन्ध होने के मामले में भी अपने शोध […]

सीकर आन्दोलन सन् 1938

सीकर आन्दोलन सन् 1938 (  ठाकुर सुरजन सिंह जी-झाझड के संसमरणों से) : सन् 1938 में शेखावाटी में एक इतिहास प्रभावी आंदोलन छिड़ गया था। राव राजा कल्याण सिंह सीकर को बंदी बना कर जयपुर ले जाने के विवाद पर सैनिक युद्ध का सा दृश्य उपस्थित हो गया था। सीकरवाटी के सभी स्वामिभक्त राजपूत और […]

कौन था सीकर का वीरभान Veerbhan ka Bas Sikar

सीकर का वीरभान : सीकर शेखावाटी का एक महत्त्वपूर्ण ठिकाना था | इस ठिकाने पर कछवाह वंश के राव तिरमलजी शेखावत के वंशजों का आजादी पूर्व शासन था | राव तिरमलजी के वंशज रावजी का शेखावत कहलाते हैं | सीकर से पूर्व राव तिरमलजी के वंशजों की राजधानी पहले कासली और बाद में दूजोद रही […]

गौरक्षा के लिये मर मिटे थे ये मुसलमान

गौरक्षा के लिए किसी मुसलमान द्वारा प्राणों की आहुति देने की बात की जाय तो शायद ही कम लोग पचा पायेंगे | लेकिन इतिहास में मुसलमानों द्वारा गौरक्षा के लिए प्राणों के उत्सर्ग के उदाहरण मिल जाते हैं | रघुनाथसिंह कालीपहाड़ी द्वारा लिखित “शेखावाटी प्रदेश का राजनैतिक इतिहास” पढ़ते हुये मुझे चुरू जिले के आसलसर […]

माण्डण युद्ध, जब राजपूत व जाटों ने मिलकर सबक सिखाया मुगलों को

माण्डण युद्ध 6 जून, 1775 ई. के दिन रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी व शेखावतों के मध्य हुआ था | यह युद्ध इतना भीषण था कि विजयी शेखावत पक्ष की हर शाखा उपशाखा के वीरों ने अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने के लिए प्राणों की आहुति दी थी | शाही सेना का […]

ये था देश की गुलामी का सबसे बड़ा कारण -1

भारत में एक से बढ़कर एक योद्धा हुए हैं | यहाँ की हर घाटी व मैदान रणक्षेत्र रहा है, फिर सवाल उठता है कि भारत गुलाम क्यों हुआ ? इस सवाल के जबाब में कई किताबें लिखी जा सकती है और लिखी भी गई है और ज्यादातर इतिहासकारों ने इस विषय पर गहन मंथन भी […]

राजपूत व जाटों के खिलाफ यूँ लामबंद हुये थे मुग़ल व मराठा

विक्रम सम्वत् 1830 की आसोज शुक्ला पंचमी के दिन मुग़ल बादशाह शाहआलम द्वितीय प्रकट हुआ। दिल्ली निवासियों ने पहली बार यह जाना कि बादशाह जीवित है और दिल्ली आ रहा है। मराठों की विशाल सेना उसके साथ थी। मुगल सेना का संचालक मिर्जा नजफखां सेना के अग्रभाग में चल रहा था। रुहेला पठानों के प्रदेश […]

राजा जयसिंहजी व शिवाजी महाराज के मध्य हुई संधि के पीछे का सच

मिर्जा राजा जयसिंहजी व शिवाजी के मध्य पुरन्दर की संधि हुई थी, इससे पहले इतिहास में पढाया जाता है कि राजा जयसिंहजी ने शिवाजी की सोते समय पगड़ी मंगावा ली थी और उनके सिरहाने पत्र रखवा दिया था कि या तो सुबह आकर मुझसे मिलना, नहीं तो आज पगड़ी मंगवाई है वैसे ही आपका मस्तक […]

महार कलां गांव के चमत्कारी संत सालागनाथजी

महार कलां Mahar Kalan गांव में सुरम्य पहाड़ी की तलहटी में संत सालगनाथजी का स्थान है, कभी यहाँ गांव बसने से पूर्व एक छोटे से तिबारे में नाथ संत सालगनाथजी विराजते थे | महार गांव आमेर के राजा चंद्रसेन जी के युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी ने बसाया था | युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी […]

रणसी गांव की रहस्यमयी भूत बावड़ी का सच

जोधपुर से लगभग 86 और मेड़ता से 45 किलोमीटर जोधपुर जिले में बसा है रणसी गांव | आजादी से पूर्व यह गांव मारवाड़ के राठौड़ साम्राज्य के अधीन चांपावत राठौड़ों की जागीर था | इसी गांव में बना है एक महल और एक बावड़ी, जिसके लिए इतिहास में प्रचलित है कि ये महल व बावड़ी […]

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