माण्डण युद्ध, जब राजपूत व जाटों ने मिलकर सबक सिखाया मुगलों को

माण्डण युद्ध 6 जून, 1775 ई. के दिन रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी व शेखावतों के मध्य हुआ था | यह युद्ध इतना भीषण था कि विजयी शेखावत पक्ष की हर शाखा उपशाखा के वीरों ने अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने के लिए प्राणों की आहुति दी थी | शाही सेना का […]

ये था देश की गुलामी का सबसे बड़ा कारण -1

भारत में एक से बढ़कर एक योद्धा हुए हैं | यहाँ की हर घाटी व मैदान रणक्षेत्र रहा है, फिर सवाल उठता है कि भारत गुलाम क्यों हुआ ? इस सवाल के जबाब में कई किताबें लिखी जा सकती है और लिखी भी गई है और ज्यादातर इतिहासकारों ने इस विषय पर गहन मंथन भी […]

राजपूत व जाटों के खिलाफ यूँ लामबंद हुये थे मुग़ल व मराठा

विक्रम सम्वत् 1830 की आसोज शुक्ला पंचमी के दिन मुग़ल बादशाह शाहआलम द्वितीय प्रकट हुआ। दिल्ली निवासियों ने पहली बार यह जाना कि बादशाह जीवित है और दिल्ली आ रहा है। मराठों की विशाल सेना उसके साथ थी। मुगल सेना का संचालक मिर्जा नजफखां सेना के अग्रभाग में चल रहा था। रुहेला पठानों के प्रदेश […]

राजा जयसिंहजी व शिवाजी महाराज के मध्य हुई संधि के पीछे का सच

मिर्जा राजा जयसिंहजी व शिवाजी के मध्य पुरन्दर की संधि हुई थी, इससे पहले इतिहास में पढाया जाता है कि राजा जयसिंहजी ने शिवाजी की सोते समय पगड़ी मंगावा ली थी और उनके सिरहाने पत्र रखवा दिया था कि या तो सुबह आकर मुझसे मिलना, नहीं तो आज पगड़ी मंगवाई है वैसे ही आपका मस्तक […]

महार कलां गांव के चमत्कारी संत सालागनाथजी

महार कलां Mahar Kalan गांव में सुरम्य पहाड़ी की तलहटी में संत सालगनाथजी का स्थान है, कभी यहाँ गांव बसने से पूर्व एक छोटे से तिबारे में नाथ संत सालगनाथजी विराजते थे | महार गांव आमेर के राजा चंद्रसेन जी के युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी ने बसाया था | युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी […]

रणसी गांव की रहस्यमयी भूत बावड़ी का सच

जोधपुर से लगभग 86 और मेड़ता से 45 किलोमीटर जोधपुर जिले में बसा है रणसी गांव | आजादी से पूर्व यह गांव मारवाड़ के राठौड़ साम्राज्य के अधीन चांपावत राठौड़ों की जागीर था | इसी गांव में बना है एक महल और एक बावड़ी, जिसके लिए इतिहास में प्रचलित है कि ये महल व बावड़ी […]

लोक कथाओं में स्वतंत्रता इतिहास

स्वतंत्रता सेनानी डूंगजी जवाहर जी को अंग्रेजों के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए धन की आवश्यकता थी, उन्होंने रामगढ के सेठों से सहायता मांगी पर उन्होंने यह सोचते हुए उन्हें मना कर दिया कि – ये बरोठिया (विद्रोही) दो दिन कूद फांद कर बैठ जायेंगे | कम्पनी की तोपों के आगे ये गिनती के लोग […]

राजपूत चरित्र को प्राणवान ऐसी भावना ने बनाया

राजपूत चरित्र को प्राणवान ऐसी भावना में बनाया : दो शत्रु युद्ध में तलवारों से खेल रहे हैं, एक दूसरे पर प्रहार कर रहे हैं, “काका-भतीजा” कहकर एक दूसरे से बात भी करते जा रहे हैं और आपस में अमल की मनवार भी कर रहे हैं | यह था मध्यकालीन भारत का राजपूत चरित्र | […]

कौन होते हैं भूमिया क्या कहता है इसके बारे में इतिहास

इतिहास में भूमिया शब्द भूस्वामियों के लिए प्रयोग हुआ है | यहाँ भूस्वामियों का मतलब कुछ एकड़ खेत के स्वामी से नहीं, वरन एक क्षेत्र पर राज्य करने वाले व्यक्ति के लिए भूमिया शब्द का प्रयोग मिलता है, क्योंकि शासक ही अपने राज्य की भूमि का स्वामी होता है, अत: इतिहास में उसे भूमिया कह […]

क्या आप राजपूत सरनेम के आगे जी लगाने का मतलब जानते है    

भारतीय संस्कृति में किसी भी उसके नाम के बाद “जी” लगाकर संबोधित करने की परम्परा है, पर क्या आप जानते हैं कि राजपूत सरनेम के बाद जी लगाने का क्या अर्थ  निकलता है | इस लेख में हम राजपूत समाज की एक ऐसी परम्परा की चर्चा करेंगे जिसमें सरनेम के आगे “जी” लगाते ही संबोधन […]

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