कौन होते हैं भूमिया क्या कहता है इसके बारे में इतिहास

इतिहास में भूमिया शब्द भूस्वामियों के लिए प्रयोग हुआ है | यहाँ भूस्वामियों का मतलब कुछ एकड़ खेत के स्वामी से नहीं, वरन एक क्षेत्र पर राज्य करने वाले व्यक्ति के लिए भूमिया शब्द का प्रयोग मिलता है, क्योंकि शासक ही अपने राज्य की भूमि का स्वामी होता है, अत: इतिहास में उसे भूमिया कह […]

क्या आप राजपूत सरनेम के आगे जी लगाने का मतलब जानते है    

भारतीय संस्कृति में किसी भी उसके नाम के बाद “जी” लगाकर संबोधित करने की परम्परा है, पर क्या आप जानते हैं कि राजपूत सरनेम के बाद जी लगाने का क्या अर्थ  निकलता है | इस लेख में हम राजपूत समाज की एक ऐसी परम्परा की चर्चा करेंगे जिसमें सरनेम के आगे “जी” लगाते ही संबोधन […]

मातृभूमि-प्रेम की वीरोचित परम्पराओं की एक अद्भुत झलक

कैसी अद्भुत थीं यहाँ की मातृभूमि-प्रेम की वे वीरोचित परम्पराएँ ? उनका विशद् विवेचन तो एक स्वतंत्र ग्रंथ का ही विषय है। इतिहास के कीर्तिपृष्ठों में वे शतशः बिखरी पड़ी है। यहाँ केवल एक झलक देख लीजिए । मृत्यु के अनन्तर मृतक को उसके पुत्रों द्वारा पिण्डदान दिए जाने का विधान तो प्रायः सभी हिन्दुओं […]

मेवाड़ के पक्ष में इन कछवाह वीरों ने की थी मुगलों से बगावत

मेवाड़ के पक्ष में इन कछवाह वीरों ने की थी मुगलों से बगावत

यह घटना उस काल की है, जब आमेर के महाराजा भारमल की मुगल सल्तनत से संधि हो चुकी थी और उनके वंशज मुगलों के सेनापति भी नियुक्त होते थे। तभी एक अदभुत् व अकल्पनीय वाक्या हुआ जिसकी तुलना इतिहास में अमर सिंह राठौड़ के शौर्य से की जा सकती है। लवाण के बाँके राजा भगवानदास […]

जयपुर वासियों ने यूँ सिखाया था मराठों को सबक

जयपुर वासियों ने यूँ सिखाया था मराठों को सबक

जयपुर पर हमला करने आये मराठों को जयपुर की जनता के रोष का सामना करना पड़ा और देखते देखते ही जयपुर की जनता ने मारकाट मचाकर डेढ़ दो हजार मराठों को मार दिया | इसके बाद डेढ़ वर्ष तक राजपुताना में लूटने व चौथ वसूली करने के लिए आने वाले मराठा दस्तों का आना रुक […]

इसलिए नहीं लड़ा था महाराजा सूरजमल ने पानीपत युद्ध

फिल्म पानीपत को लेकर पिछले कई दिनों से भरतपुर के जाट महाराजा सूरजमल मीडिया की सुर्ख़ियों में है | आरोप है कि फिल्म में सूरजमल को लालची दिखाया गया और सोशियल मीडिया में वायरल हो रहे फिल्म के दृश्य में भी महाराजा सूरजमल मराठों से पानीपत युद्ध में सहायता देने के बदले आगरा का किला […]

इन तत्वों ने खोदी जाट राजपूत जातियों के मध्य खाई

इन तत्वों ने खोदी जाट राजपूत जातियों के मध्य खाई

इन तत्वों ने खोदी जाट राजपूत जातियों के मध्य खाई : राजस्थान के इतिहास में जाट राजपूत एक दूसरे के पूरक रहे हैं| राजपूत जहाँ शासन व सुरक्षा व्यवस्था सँभालते थे, वहीं जाट कृषि कार्य करते थे| चूँकि हमारा देश कृषि प्रधान देश है अंत: राजस्थान की भी अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर थी और […]

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

खंडेला के राजा के राजा रायसल दरबारी के पुत्र तिरमलजी को सम्राट अकबर ने उनकी वीरता से प्रभावित होकर राव की पदवी और कासली व नागौर का पट्टा दिया था| पर शहजादा सलीम व अमीर खुसरो के मध्य दिल्ली की गद्दी को लेकर हुए विवाद में नागौर तिरमलजी के हाथ से निकल गई| कुछ समय […]

जौहर और सती प्रथा में ये है अंतर

जौहर और सती प्रथा में ये है अंतर

राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा पाठ्य पुस्तक के कवर पेज से जौहर का चित्र हटाने के बाद इस मुद्दे पर घमासान मचा हुआ है | शिक्षा मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा ने जौहर को जहाँ सती प्रथा से जोड़ा वहीं जौहर को लेकर कई नेताओं के बयान आये जिनमें उनका इतिहास ज्ञान झलक जाता है कि हमारे […]

एक नर्तकी ने स्वामी विवेकानंद जी की आँखें खोल दी थी

नर्तकी और स्वामी विवेकानन्द : गर्मी का मौसम था| सूर्यास्त के बाद शेखावाटी के धोरों की ठंडक खेतड़ी के महलों तक पहुँच रही थी| उद्यानों में ठंडी हवा की बयार बह रही थी| खेतड़ी नरेश राजा अजीतसिंह जी अपने सहचरों सहित उद्यान स्थित बंगले में बैठे थे| राजाजी को लगा कि इस सुहाने मौसम में […]

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