वैरागी चित्तौड़-1

वैरागी चित्तौड़-1

स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से…. यह चित्तौड़ है, जिसके नाम से एक त्वरा उठती है, एक हूक बरबस ह्रदय को मसोस डालती है; किंतु जिसने अपनी आंखों से देखा है उसकी द्रष्टि भावनाए बनकर लेखनी में उतर जाया करती है और फ़िर कागजों के कलेजे कांपने लग जाया करते है| इतिहास के इतने कागज रंगने […]

राजा रायसल दरबारी, खंडेला

राजा रायसल दरबारी, खंडेला

रायसल जी का जन्म महाराव शेखाजी की वंश परम्परा में अमरसर के शासक राव सुजाजी की रानी रतनकंवर राठौड़ के गर्भ से फाल्गुन बदी ८ वि. १५९५ को हुआ | राव सुजाजी की मृत्युपरांत रायसल को अपने भाइयों की तरह सात गांवों की जागीर मिली थी|* और वे अपनी जागीर के गांव लाम्या में वि.स. […]

Raja Pajjvan Rai Kachhvaha of Amer

राजा पज्ज्वनराय आमेरराजा जान्हाड्देव के बाद उनके वीर पुत्र पज्ज्वनराय आमेर के राजा बने !१३वि सदी में होने वाले कछवाह राजाओं में वे सबसे महत्वपूर्ण थे !वे महान योधा,दक्ष सेन्ये संचालक,अनेक युधों के विजेता व सम्राट प्रथ्विराज के सम्मानिये सम्बन्धी व सेनापति थे !संयोगिता हरण के समय प्रथ्विराज का पीछा करती हुयी गहड्वालों की विशाल […]

राव रायमल जी, अमरसर

घाटवा युद्ध में विजय के बाद राव शेखा जी के निधन उपरांत उनके सबसे छोटे पुत्र राव रायमल जी बेशाख सुदी 15 वि.सं. 1545 ई.सं. 1488 को अमरसर के विधिवत शासक बने,इनके राजतिलक के समय आमेर के जेस्ठ राजकुमार प्रथ्वीराज जी व भैराना के स्वामी नरु जी अमरसर पधारे थे |शेखा जी की वीर गति […]

महाराव शेखा जी ,परिचय एवं व्यव्क्तित्व

महाराव शेखा जी ,परिचय एवं व्यव्क्तित्व

राव शेखा का जन्म आसोज सुदी विजयादशमी सं १४९० वि. में बरवाडा व नाण के स्वामी मोकल सिंहजी कछवाहा की रानी निरबाण जी के गर्भ से हुआ १२ वर्ष की छोटी आयु में इनके पिता का स्वर्गवास होने के उपरांत राव शेखा वि. सं. १५०२ में बरवाडा व नाण के २४ गावों की जागीर के […]

महाराणा प्रताप के बारे में एक गलत भ्रांती

Bhupendra Singh Chundawat राजपूताने में यह जनश्रुति है कि एक दिन बादशाह ने बीकानेर के राजा रायमसिंह के छोटे भाई पृथ्वीराज से, जो एक अच्छा कवि था, कहा कि राणा प्रताप अब हमें बादशाह कहने लग गए है और हमारी अधीनता स्वीकार करने पर उतारू हो गए हैं। इसी पर उसने निवेदन किया कि यह […]

शेखावत

शेखावत सूर्यवंशी कछवाह क्षत्रिय वंश की एक शाखा है देशी राज्यों के भारतीय संघ में विलय से पूर्व मनोहरपुर, शाहपुरा, खंडेला, सीकर, खेतडी, बिसाऊ,सुरजगढ़, नवलगढ़, मंडावा, मुकन्दगढ़, दांता, खुड, खाचरियाबास, दूंद्लोद, अलसीसर, मलसिसर, रानोली आदि प्रभाव शाली ठिकाने शेखावतों के अधिकार में थे जो शेखावाटी नाम से प्रशिध है वर्तमान में शेखावाटी की भौगोलिक सीमाएं […]

राव कुंपा जोधपुर

जोधपुर राज्य के इतिहास में जहाँ वीर शिरोमणि दुर्गादास स्वामिभक्ति के लिये प्रसिद्ध है तो राव कुंपा और उसके चचेरे भाई जेता का नाम प्रसिद्ध दक्ष सेनापति, वीरता, साहस, पराक्रम और देश भक्ति के लिए मारवाड़ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा है| राव कुंपा जोधपुर के राजा राव जोधा के भाई राव अखैराज […]

राव सीहा जी राजस्थान में स्वतंत्र राठौड़ राज्य के संस्थापक

Rao Shiha, Founder of Rathore State in Rajasthan राव सीहा जी राजस्थान में स्वतंत्र राठौड़ राज्य के संस्थापक थे | राव सीहा जी के वीर वंशज अपने शौर्य, वीरता एवं पराक्रम व तलवार के धनी रहे है |मारवाड़ में राव सीहा जी द्वारा राठौड़ साम्राज्य का विस्तार करने में उनके वंशजो में राव धुहड़ जी […]

राव जोधा जी, जोधपुर

राव जोधा जी, जोधपुर

राव जोधा जी का जन्म भादवा बदी 8 सं. 1472 में हुवा था | इनके पिता राव ridmal मारवाड़ के शासक थे, मेवाड़ का शासन कार्य भी इनकी सहमति से चलता था अतः मेवाड़ के कुछ सरदार इनसे अप्रसन थे और इन्होने मेवाड़ नरेश महाराणा कुम्भा व उनकी माता सोभाग्य देवी को राव रिदमल जी […]