लोहागढ़ महाराजा सूरजमल के शौर्य का प्रतीक

भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग जाट राजाओं की शौर्यगाथाओं का एक ऐसा किला है, जिसने मुगलों से लोहा लिया | अंग्रेजों ने इस किले पर कई बार आक्रमण किये पर जीत नहीं पाए| अंग्रेज सेनापति सर चार्ल्स मेटकाफ ने गवर्नर जनरल को लिखा था, “ब्रितानी फौजों की प्रतिष्ठा भरतपुर के दुर्भाग्यपूर्ण घेरे में दब गई| शायद […]

वीरसिंहदेव

दिल्ली पर मुसलमानों की सत्ता सथापित हो जाने पर तोमर राजवंश का उत्तराधिकारी अचलब्रह्म अजमेर के राजा हरिराज चौहान के पास गया । कुछ समय तक वह नया राज्य बसाने के लिए प्रयास करते हुए चंबल नदी के किनारे एसाह नामक स्थान पर रहने लगा । आगे के वर्तान्त पर इतिहास में कुछ भी निश्चित […]

Rupgarh Fort रुपगढ़ किले का इतिहास

Rupgarh Fort रुपगढ़ किले का इतिहास  : अरावली के उबड़ खाबड़ मगरों और ऊँची नीची पहाड़ियों की चोटियों में से एक चोटी पर आकाश को कुदेरता, गुमसुम हुआ, यह गौरवशाली दुर्ग ऐसे खड़ा है, जैसे किसी विस्मृत सिद्धि की पुन: प्राप्ति के लिए कोई अनुष्ठान कर रहा हो | कभी इस छोटे से दुर्ग के […]

शेखावाटी में जनपद युग

अति प्राचीनकाल में भारत वर्ष अनेक जनपदों में विभाजित था। वैदिक युग में ‘जन’ की सत्ता प्रधान थी। एक ही पूर्वज की वंश परम्परा में उत्पन्न कुलों का समुदाय ‘जन’ कहलाता था। प्रारंभ में व घूमन्तू कबीले थे। उस युग में उनका भूमि से सम्बन्ध स्थापित नहीं हुआ था। शनैः – शनैः जन का घूमन्तू […]

जयपुर वासियों ने यूँ सिखाया था मराठों को सबक

जयपुर पर हमला करने आये मराठों को जयपुर की जनता के रोष का सामना करना पड़ा और देखते देखते ही जयपुर की जनता ने मारकाट मचाकर डेढ़ दो हजार मराठों को मार दिया | इसके बाद डेढ़ वर्ष तक राजपुताना में लूटने व चौथ वसूली करने के लिए आने वाले मराठा दस्तों का आना रुक […]

जोधपुर किले का इतिहास History of Jodhpur Fort

रणबंका राठौड़ों की नगरी जोधपुर में, किसी ओर से भी प्रवेश करने पर कोसों दूर से चिड़ियानाथ पहाड़ी पर धरती का लाडला, मेहरानगढ़ दूर से चमकता दिखाई देता है | जोधपुर में सूरज की सर्वाधिक किरणें पड़ती है अंत: सूरज की रौशनी में नहाये किले की चमक देखते ही बनती है | धरातल से 121 […]

इसलिए है कुचामन किले में वनखंडी बाबा की धुणी सबसे ऊपर

किसी भी दिशा से कुचामन सिटी में प्रवेश करने से एक ऊँची पहाड़ी पर कुचामन का किला नजर आता है और किले पर नजर आती है एक छतरीनुमा आकृति जो किले में सबसे ऊपर बनी है | किले में जितने भी महल, मंदिर व अन्य इमारतें है वे इस छतरीनुमा आकृति से नीचे बनाई गई […]

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा : किसी भी युद्ध में हथियारों की आपूर्ति के साथ सैनिकों के भोजन की आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है | एक स्थानीय कहावत है कि “भूखे भजन नहीं होत गोपाला” | यह कहावत युद्धरत सैनिकों पर भी लागू होती है, भूखे रहकर सैनिक कितने दिन युद्धरत रह […]

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

खंडेला के राजा के राजा रायसल दरबारी के पुत्र तिरमलजी को सम्राट अकबर ने उनकी वीरता से प्रभावित होकर राव की पदवी और कासली व नागौर का पट्टा दिया था| पर शहजादा सलीम व अमीर खुसरो के मध्य दिल्ली की गद्दी को लेकर हुए विवाद में नागौर तिरमलजी के हाथ से निकल गई| कुछ समय […]

इस योद्धा को घोड़ी का नाम शेखावती रखना पड़ गया था भारी

राजस्थान के एक योद्धा को एक घोड़ी का नाम शेखावती रखना भारी पड़ गया था | इतिहासकारों के अनुसार खाटू के इंद्रभाण जोधा बादशाही सेवा में थे| माधोदास व उनके पुत्र सूरसिंह बादशाही इलाकों में लूटपाट करते थे| इंद्रभाण जोधा बादशाह की ओर से सूरसिंह को पकड़ने आया| आपसी मुठभेड़ में इंद्रभाण जोधा के हाथों […]