शेखावाटी में जनपद युग

शेखावाटी में जनपद युग

अति प्राचीनकाल में भारत वर्ष अनेक जनपदों में विभाजित था। वैदिक युग में ‘जन’ की सत्ता प्रधान थी। एक ही पूर्वज की वंश परम्परा में उत्पन्न कुलों का समुदाय ‘जन’ कहलाता था। प्रारंभ में व घूमन्तू कबीले थे। उस युग में उनका भूमि से सम्बन्ध स्थापित नहीं हुआ था। शनैः – शनैः जन का घूमन्तू […]

जयपुर वासियों ने यूँ सिखाया था मराठों को सबक

जयपुर वासियों ने यूँ सिखाया था मराठों को सबक

जयपुर पर हमला करने आये मराठों को जयपुर की जनता के रोष का सामना करना पड़ा और देखते देखते ही जयपुर की जनता ने मारकाट मचाकर डेढ़ दो हजार मराठों को मार दिया | इसके बाद डेढ़ वर्ष तक राजपुताना में लूटने व चौथ वसूली करने के लिए आने वाले मराठा दस्तों का आना रुक […]

जोधपुर किले का इतिहास History of Jodhpur Fort

रणबंका राठौड़ों की नगरी जोधपुर में, किसी ओर से भी प्रवेश करने पर कोसों दूर से चिड़ियानाथ पहाड़ी पर धरती का लाडला, मेहरानगढ़ दूर से चमकता दिखाई देता है | जोधपुर में सूरज की सर्वाधिक किरणें पड़ती है अंत: सूरज की रौशनी में नहाये किले की चमक देखते ही बनती है | धरातल से 121 […]

इसलिए है कुचामन किले में वनखंडी बाबा की धुणी सबसे ऊपर

किसी भी दिशा से कुचामन सिटी में प्रवेश करने से एक ऊँची पहाड़ी पर कुचामन का किला नजर आता है और किले पर नजर आती है एक छतरीनुमा आकृति जो किले में सबसे ऊपर बनी है | किले में जितने भी महल, मंदिर व अन्य इमारतें है वे इस छतरीनुमा आकृति से नीचे बनाई गई […]

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा : किसी भी युद्ध में हथियारों की आपूर्ति के साथ सैनिकों के भोजन की आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है | एक स्थानीय कहावत है कि “भूखे भजन नहीं होत गोपाला” | यह कहावत युद्धरत सैनिकों पर भी लागू होती है, भूखे रहकर सैनिक कितने दिन युद्धरत रह […]

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

खंडेला के राजा के राजा रायसल दरबारी के पुत्र तिरमलजी को सम्राट अकबर ने उनकी वीरता से प्रभावित होकर राव की पदवी और कासली व नागौर का पट्टा दिया था| पर शहजादा सलीम व अमीर खुसरो के मध्य दिल्ली की गद्दी को लेकर हुए विवाद में नागौर तिरमलजी के हाथ से निकल गई| कुछ समय […]

इस योद्धा को घोड़ी का नाम शेखावती रखना पड़ गया था भारी

इस योद्धा को घोड़ी का नाम शेखावती रखना पड़ गया था भारी

राजस्थान के एक योद्धा को एक घोड़ी का नाम शेखावती रखना भारी पड़ गया था | इतिहासकारों के अनुसार खाटू के इंद्रभाण जोधा बादशाही सेवा में थे| माधोदास व उनके पुत्र सूरसिंह बादशाही इलाकों में लूटपाट करते थे| इंद्रभाण जोधा बादशाह की ओर से सूरसिंह को पकड़ने आया| आपसी मुठभेड़ में इंद्रभाण जोधा के हाथों […]

1857 से पहले की क्रांति ने यहाँ तोड़ा था दम | डूंगजी जवाहर जी

राजस्थान के शेखावाटी आँचल के स्वतंत्रचेता छोटे राजपूत शासकों को अंग्रेजों का दखल कभी पसंद नहीं था | पर जयपुर जैसी बड़ी रियासत द्वारा अंग्रेजों के साथ संधि करने के बाद अंग्रेजों को शेखावाटी आँचल में भी पैर पसारने का मौका मिल गया | पर यहाँ के शूरवीर जागीरदारों ने अपने सीमित साधनों के दम […]

History of Danta Fort दांता किले का इतिहास

History of Danta Fort : ऊँची पहाड़ी पर अपना गर्वीला मस्तक उठाकर खड़े इस किले का अपना ही स्वर्णिम इतिहास है | इसी किले की कहानी और इसके शासकों के संक्षिप्त इतिहास आज हम बताएँगे इस लेख में |  इस छोटे से किले व छोटी सी रियासत के स्वाभिमानी शासकों ने लड़े थे कई बड़े […]

History of Khoor खूड़ का इतिहास

History of Khoor : राजस्थान में शेखावाटी आँचल के सीकर जिला मुख्यालय से सत्ताईस किलोमीटर दूर खूड़ (khoor) कस्बे में तीन और मकानों से घिरा यह गढ़ आज वीरान पड़ा है| कभी इस गढ़ के भी सुनहले दिन थे, चांदनी रातें थी, वैभव सम्पत्ति की अठखेलियों की बहारें थी, मंगल संगीत और उत्सवों की ऋतुएँ […]

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