जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा

जब सवाई जयसिंहजी ने खाया सीकर का खीचड़ा : किसी भी युद्ध में हथियारों की आपूर्ति के साथ सैनिकों के भोजन की आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है | एक स्थानीय कहावत है कि “भूखे भजन नहीं होत गोपाला” | यह कहावत युद्धरत सैनिकों पर भी लागू होती है, भूखे रहकर सैनिक कितने दिन युद्धरत रह […]

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

दुश्मनी मिटाने के बदले मिला था सीकर और बना रियासत की राजधानी

खंडेला के राजा के राजा रायसल दरबारी के पुत्र तिरमलजी को सम्राट अकबर ने उनकी वीरता से प्रभावित होकर राव की पदवी और कासली व नागौर का पट्टा दिया था| पर शहजादा सलीम व अमीर खुसरो के मध्य दिल्ली की गद्दी को लेकर हुए विवाद में नागौर तिरमलजी के हाथ से निकल गई| कुछ समय […]

इस योद्धा को घोड़ी का नाम शेखावती रखना पड़ गया था भारी

इस योद्धा को घोड़ी का नाम शेखावती रखना पड़ गया था भारी

राजस्थान के एक योद्धा को एक घोड़ी का नाम शेखावती रखना भारी पड़ गया था | इतिहासकारों के अनुसार खाटू के इंद्रभाण जोधा बादशाही सेवा में थे| माधोदास व उनके पुत्र सूरसिंह बादशाही इलाकों में लूटपाट करते थे| इंद्रभाण जोधा बादशाह की ओर से सूरसिंह को पकड़ने आया| आपसी मुठभेड़ में इंद्रभाण जोधा के हाथों […]

1857 से पहले की क्रांति ने यहाँ तोड़ा था दम | डूंगजी जवाहर जी

राजस्थान के शेखावाटी आँचल के स्वतंत्रचेता छोटे राजपूत शासकों को अंग्रेजों का दखल कभी पसंद नहीं था | पर जयपुर जैसी बड़ी रियासत द्वारा अंग्रेजों के साथ संधि करने के बाद अंग्रेजों को शेखावाटी आँचल में भी पैर पसारने का मौका मिल गया | पर यहाँ के शूरवीर जागीरदारों ने अपने सीमित साधनों के दम […]

History of Danta Fort दांता किले का इतिहास

History of Danta Fort : ऊँची पहाड़ी पर अपना गर्वीला मस्तक उठाकर खड़े इस किले का अपना ही स्वर्णिम इतिहास है | इसी किले की कहानी और इसके शासकों के संक्षिप्त इतिहास आज हम बताएँगे इस लेख में |  इस छोटे से किले व छोटी सी रियासत के स्वाभिमानी शासकों ने लड़े थे कई बड़े […]

History of Khoor खूड़ का इतिहास

History of Khoor : राजस्थान में शेखावाटी आँचल के सीकर जिला मुख्यालय से सत्ताईस किलोमीटर दूर खूड़ (khoor) कस्बे में तीन और मकानों से घिरा यह गढ़ आज वीरान पड़ा है| कभी इस गढ़ के भी सुनहले दिन थे, चांदनी रातें थी, वैभव सम्पत्ति की अठखेलियों की बहारें थी, मंगल संगीत और उत्सवों की ऋतुएँ […]

काला दरवाजा जहाँ तीन सौ वीरों ने इसलिए किया प्राणों का उत्सर्ग

ये शेखावाटी आँचल के खंडेला नगर का काला दरवाजा है| कभी इसका नाम कुछ और ही रहा होगा पर धर्मांध बादशाह औरंगजेब की करतूत के कारण इस दरवाजे का नाम काला दरवाजा पड़ गया| नगर के मध्य भीड़ से घिरे होने के बावजूद यह दरवाजा गुमसुम हुआ ऐसे किंकर्तव्यविमूढ़ खड़ा है मानों किसी अजेय शक्ति […]

Bahu ji ki Bavadi Khandela रानी ने इसलिए बनवाई थी जंगल में यह बावड़ी

राजस्थान में प्राचीन काल से बारिश की कमी रही है अत: यहाँ के निवासियों को पीने के पानी की कमी की समस्या हर काल में रही है, अत: यहाँ के राजाओं, रानियों, सेठ साहूकारों व धर्म परायण नागरिकों ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए कुँए, बावड़ियाँ व तालाब बहुतायत से बनवाये ताकि स्थानीय […]

History of Hamirgarh Fort हमीरगढ़ फोर्ट का इतिहास

History of Hamirgarh Fort : अनगिनत युद्धों में तोपों की मार झेलते झेलते आज यह दुर्ग जीर्ण अवस्था में पहुँच चुका है| मेवाड़ की सुरक्षा के लिए महाराणा कुम्भा द्वारा बनाये 84 दुर्गों में से एक यह दुर्ग मेवाड़ का प्रवेश द्वार है| यही कारण है कि चितौड़ पर होने वाले ज्यादातर आक्रमणों का सबसे […]

History of Bhindar भींडर का इतिहास

हल्दीघाटी युद्ध का स्मरण होते ही स्वाधीनता और स्वाभिमान के लिए संघर्ष करने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की छवि उभर आती है और युद्ध में उनकी वीरता, चेतक के घायल होने, छोटे भाई शक्तिसिंह जी द्वारा मुसीबत के समय सहयोग हेतु गले मिलने के दृश्य आँखों में तैरने लगते हैं| शक्तिसिंह व महाराणा प्रताप […]

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