Padam Singh Bathoth History in Dingal Poem

Padam Singh Bathoth History in Dingal Poem

One record of the event, in which Padam Singh took part, has been preserved. In 1787 the king of Sīkar, the Rāo Rājā Devī Siṅgh, was annoyed by constant attacks and plunder by Pūranmall Siṅgh of Kāslī and, consequently, the king annexed five villages that belonged to the Kāslī jurisdiction. Padam Siṅgh had been appointed […]

Bathoth Fort History बठोठ का इतिहास

Bathoth Fort History  : इस छोटे से खुबसूरत किले का भी अपना गौरवशाली इतिहास है| शेखावाटी के प्रसिद्ध क्रांतिवीर डूंगर सिंह शेखावत और लोठू जाट का इस किले से सम्बन्ध रहा है| क्रांतिवीर लोठू जाट बठोठ गांव में ही रहता था, बठोठ गांव के बाहर ही जाट समाज ने क्रांतिवीर लोठू जाट की बड़ी सी […]

धोद किले का इतिहास

धोद : राजस्थान के शेखावाटी आँचल में सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर धोद कस्बे में स्थित है यह किला | आज धोद पंचायत समिति व विधानसभा क्षेत्र है लेकिन यदि इसके अतीत में हम झांके तो धोद का यह किला सीकर रियासत का एक महत्त्वपूर्ण ठिकाना था और सीकर रियासत के दो […]

शेखावाटी प्रदेश का मौर्यकाल

शेखावाटी प्रदेश का मौर्यकाल

मौर्य सूर्यवंशी क्षत्रिय थे। शाक्यों के उस उच्च तथा पवित्र वंश की वे एक शाखा थे- जिसमें महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। मोर पक्षी के बाहुल्य वाला प्रदेश होने से उसका नाम मौर्य जनपद हुआ और वहां के शासक मौर्य कहलाए 15। बौद्ध धर्मानुयायी होने से ब्राह्मणों ने उन्हें शूद्र कहना प्रारंभ किया […]

शेखावाटी प्रदेश का प्राचीन इतिहास : मत्स्य जनपद

शेखावाटी प्रदेश का प्राचीन इतिहास : मत्स्य जनपद

प्रारंभिक वैदिक युग में मत्स्यों का निवास स्थान सरस्वती और हषद्वती नामक वैदिक नदियों के, जो अब भू-गर्भ में विलुप्त हो चुकी हैं के बीच का प्रदेश था। उस काल उसे ब्रह्मऋषि देश या ब्रह्मावर्त का ही एक भाग मानते थे। सही अर्थो में वही आर्यावर्त था। आर्य ऋषियों की पवित्र तपस्थली नैमिषारण्य उसके समीप […]

मेवाड़ के पक्ष में इन कछवाह वीरों ने की थी मुगलों से बगावत

मेवाड़ के पक्ष में इन कछवाह वीरों ने की थी मुगलों से बगावत

यह घटना उस काल की है, जब आमेर के महाराजा भारमल की मुगल सल्तनत से संधि हो चुकी थी और उनके वंशज मुगलों के सेनापति भी नियुक्त होते थे। तभी एक अदभुत् व अकल्पनीय वाक्या हुआ जिसकी तुलना इतिहास में अमर सिंह राठौड़ के शौर्य से की जा सकती है। लवाण के बाँके राजा भगवानदास […]

कस्बा लवाण जिसकी है कई कारणों से पहचान

कस्बा लवाण जिसकी है कई कारणों से पहचान

जयपुर से करीब 45 किलोमीटर व दोसा से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित लवाण कस्बा कई कारणों से प्रसिद्ध है। जयपुर-आगरा हाईवे से बस्सी अथवा बाँसखो होते हुए व दौसा से लालसोट सवाई-माधोपुर रूट से लवाण पहुँच सकते हैं। आमेर के महाराजा भारमल के पुत्र भगवानदास को लवाण की जागीर प्राप्त हुई थी। राजा भगवानदास […]

ठाकुर श्री हरिदेवजी महाराज, मथुरा

ठाकुर श्री हरिदेवजी महाराज, मथुरा

मथुरा स्थित गोर्वधन पर्वत युगों-युगों से विश्वविख्यात हैं। मथुरा चंद्रवंशी क्षत्रिय भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली एवं कर्मभूमि भी रही है। पूरा ब्रज श्रीकृष्ण की कई लीलाओं से कृतार्थ रहा है। यहाँ स्थित गोर्वधन पर्वत को बाल रूपी भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर उठाकर समस्त प्राणीजनों की भयंकर मुसलाधार वर्षा से रक्षा की थी। […]

लोहागढ़ महाराजा सूरजमल के शौर्य का प्रतीक

लोहागढ़ महाराजा सूरजमल के शौर्य का प्रतीक

भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग जाट राजाओं की शौर्यगाथाओं का एक ऐसा किला है, जिसने मुगलों से लोहा लिया | अंग्रेजों ने इस किले पर कई बार आक्रमण किये पर जीत नहीं पाए| अंग्रेज सेनापति सर चार्ल्स मेटकाफ ने गवर्नर जनरल को लिखा था, “ब्रितानी फौजों की प्रतिष्ठा भरतपुर के दुर्भाग्यपूर्ण घेरे में दब गई| शायद […]

वीरसिंहदेव

दिल्ली पर मुसलमानों की सत्ता सथापित हो जाने पर तोमर राजवंश का उत्तराधिकारी अचलब्रह्म अजमेर के राजा हरिराज चौहान के पास गया । कुछ समय तक वह नया राज्य बसाने के लिए प्रयास करते हुए चंबल नदी के किनारे एसाह नामक स्थान पर रहने लगा । आगे के वर्तान्त पर इतिहास में कुछ भी निश्चित […]

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