History of Lamiya Fort लामिया का इतिहास

History of Lamiya Fort: इतिहास में राजा रायसल दरबारी के नाम से प्रसिद्ध रायसलजी को सात गांवों की जमींदारी मिली थी | राजा रायसल दरबारी अमरसर के शासक राव सूजाजी के पुत्र थे | वि. सं. 1611 में रायसलजी ने अपनी जमींदारी में एक छोटे से किले का निर्माण कर लामिया नाम से गांव बसाया […]

माण्डण युद्ध, जब राजपूत व जाटों ने मिलकर सबक सिखाया मुगलों को

माण्डण युद्ध 6 जून, 1775 ई. के दिन रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शाही सेनाधिकारी व शेखावतों के मध्य हुआ था | यह युद्ध इतना भीषण था कि विजयी शेखावत पक्ष की हर शाखा उपशाखा के वीरों ने अपनी स्वतंत्रता बचाए रखने के लिए प्राणों की आहुति दी थी | शाही सेना का […]

आमेर के ये पांच युवराज इसलिये नहीं बैठ सके राजगद्दी पर

आमेर के इतिहास पर नजर डाली जाये तो आमेर के पांच युवराज राजगद्दी के अधिकारी होते हुए भी गद्दी पर नहीं बैठ सके | इन सभी युवराजों को भिन्न भिन्न कारणों से आमेर की राजगद्दी नसीब नहीं हुई | इनमें सबसे पहले थे – युवराज कुम्भाजी | कुम्भाजी आमेर नरेश चंद्रसेनजी के बड़े पुत्र थे […]

ठाकुर हणूंतसिंह डूण्डलोद, मांडण युद्ध के योद्धा

बिसाऊ के ठा. केसरीसिंह शार्दूलसिंहोत के दोनों पुत्रों में ठाकुर हणूंतसिंह ज्येष्ठ थे। उन्होंने डूण्डलोद में गढ़ बनवा कर अपना अलग ठिकाना कायम कर लिया। बिसाऊ पर उनके छोटे भाई सूरजमल का अधिकार रहा। द्वितीय जाट अभियान के समय (सं. 1731 वि.) नवाब नजफकुली ने झुंझुनू पर भी चढ़ाई करनी चाही थी, किन्तु अपने सलाहकारों […]

राजा जयसिंहजी व शिवाजी महाराज के मध्य हुई संधि के पीछे का सच

मिर्जा राजा जयसिंहजी व शिवाजी के मध्य पुरन्दर की संधि हुई थी, इससे पहले इतिहास में पढाया जाता है कि राजा जयसिंहजी ने शिवाजी की सोते समय पगड़ी मंगावा ली थी और उनके सिरहाने पत्र रखवा दिया था कि या तो सुबह आकर मुझसे मिलना, नहीं तो आज पगड़ी मंगवाई है वैसे ही आपका मस्तक […]

युवराज सूरजमलजी जिन्हें इस कारण नहीं मिली आमेर की गद्दी

युवराज सूरजमलजी आमेर के राजा पूरणमलजी के पुत्र थे | राजा पूरणमलजी शिखरगढ़ युद्ध में शेखावतों की सहायतार्थ हुमायूँ के छोटे भाई मिर्जा हिंदाल के साथ युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे | मिर्जा हिंदाल ने शेखावत राज्य अमरसर पर आक्रमण किया था | राजा पूरणमलजी शेखावतों के पक्ष में युद्ध करने आये […]

युवराज किशनसिंह आमेर : Amer History

आमेर के युवराज किशनसिंह का जन्म भाद्रपद बदि 9 वि.सं. 1711 (ई.सं. 1654) में हुआ था | आप मिर्जा राजा जयसिंहजी के पौत्र व राजा रामसिंहजी के पुत्र थे | इनकी माता कोटा के राव मुकन्दसिंहजी हाड़ा की पुत्री थी | युवराज किशनसिंह एक मेधावी राजकुमार थे | आप कर्मठ, ओजस्वी, उत्साहवान और शूरवीर राजकुमार […]

ठाकुर बाघसिंह खेतड़ी : मांडण युद्ध के योद्धा

ठाकुर बाघसिंह खेतड़ी : खेतड़ी के स्वामी भोपालसिंह सं. 1828 वि. (भादवा बदी’ 10) में लोहारू के युद्ध में मारे गये। उनके निःसन्तान होने से बाघसिंह को खेतड़ी का स्वामी बनने का अवसर मिला। ठा. किशनसिंह शार्दूलसिंहोत के वे तृतीय पुत्र थे। भोपालसिंह और पहाडसिंह उनके बड़े भाई थे। वे क्रोधी स्वभाव के थे किन्तु […]

युवराज महासिंह जो इसलिए नहीं बैठ सके आमेर की गद्दी पर

युवराज महासिंह आमेर के कुंवर जगतसिंह के ज्येष्ठ पुत्र और राजा मानसिंहजी के पौत्र थे | आपका जन्म असोज बदि 12, वि.सं. 1642 (ई.सं.1585) को हुआ था | कुंवर जगतसिंह की मृत्यु पिता के सामने ही हुई थी | अत: उनके पुत्र महासिंह को युवराज बनाया गया | वंश परम्परा के अनुसार महा सिंह आमेर […]

ठाकुर नवलसिंह शेखावत, नवलगढ़ के संस्थापक

ठाकुर नवलसिंह झुंझुनू में नबाबी राज्य की नींव उखाड़ने वाले ठाकुर शार्दूलसिंह के पांचवे पुत्र थे | इनका जन्म वि.सं. 1772 में हुआ था | ठा, शार्दूलसिंह ने अपने जीवन काल में अपने पुत्रों को उनके ठिकाने बांधने हेतु कुछ ग्राम बांट दिये थे। झुंझुनू राज्य का सम्पूर्ण बंटवारा उनकी मृत्यु के पश्चात् हुआ, किन्तु […]

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