मातृभूमि-प्रेम की वीरोचित परम्पराओं की एक अद्भुत झलक

कैसी अद्भुत थीं यहाँ की मातृभूमि-प्रेम की वे वीरोचित परम्पराएँ ? उनका विशद् विवेचन तो एक स्वतंत्र ग्रंथ का ही विषय है। इतिहास के कीर्तिपृष्ठों में वे शतशः बिखरी पड़ी है। यहाँ केवल एक झलक देख लीजिए । मृत्यु के अनन्तर मृतक को उसके पुत्रों द्वारा पिण्डदान दिए जाने का विधान तो प्रायः सभी हिन्दुओं […]

क्यों कहा जाता है राजपूतों को रांघड़

रांघड़ या रांघड़ा संबोधन पर ज्यादातर राजपूत युवा चिढ़ जाते हैं और उनके विरोधी भी चिढाने या उन्हें नीचा दिखाने के लिए उन्हें रांघड़ या रांघड़ा कह कर संबोधित करते हैं | पर मजे की बात है कि दोनों पक्षों को इस शब्द का अर्थ नहीं पता होता | दरअसल आजादी से पूर्व तक राजपूतों […]

क्या आप रणोही जागने के बारे में जानते हैं

राजस्थान के इतिहास व आम बोलचाल की भाषा में एक शब्द है रणोही, जिसे कई जगह रणवाय भी बोला जाता है | ये शब्द आजकल बहुत कम प्रचलन में है क्योंकि वर्तमान पीढ़ी ना तो इसका मतलब समझती, ना  इस पीढ़ी ने सुना है | पर पुराने  व अनपढ़ लोग इसके बारे में जानते हैं […]

सामी गांव का इतिहास History of Sami Kheda Village

सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर सामी गांव अपनी कई विशेषताओं के चलते प्रसिद्ध है | इस गांव से रणवा जाट, गौड़ और शेखावत राजपूतों का इतिहास जुड़ा है | यह गांव मूल रूप से कब बसा इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है पर ये बात पक्की है कि जब इस वर्तमान […]

प्राचीन शेखावाटी प्रदेश में गुप्त काल

प्राचीन शेखावाटी प्रदेश में गुप्त काल

शेखावाटी प्रदेश में गुप्त काल : गुप्त सम्राटों के सत्ता में आने से पहले दूसरी शताब्दी ईस्वी में मत्स्य जनपद पर अनेक गणतंत्री कबीलों के शासन करते रहने के प्रमाण मिलते हैं, जिनमें आर्जुनायन मुख्य थे। विदिशा, पद्मावती और कांतिपुरी के नागों (भारशिवों) की भांति – यहां के शासक कुल भी पूर्ण रूपेण स्वतंत्र थे। […]

बिसाऊ किले का इतिहास

सन 1755 ई. में बना यह गढ़ अंग्रेजी हकुमत की आँखों की किरकिरी रहा | इसी गढ़ के एक शासक ने तुंगा युद्ध में मुकाबला कर जयपुर राज्य की स्वतंत्रता व प्रजा को महादाजी सिंधिया के कोप से बचाने के लिए वीरता प्रदर्शित कर अपने प्राणों की आहुति दी थी | यही नहीं, राजस्थान के […]

इसलिए आज भी स्थानीय लोगों द्वारा पूजे जाते हैं सामंत अलखाजी

अलखाजी रियासती काल में शेखावाटी के एक छोटे से जमींदार थे | उनके अधीन महज कुछ गांव ही थे, पर उन्होंने ऐसा क्या किया कि लोग आज भी जगह जगह उनके पगलिये यानी पैरों के निशानों की पूजा करते हैं | इस लेख में आज हम अलखा जी के बारे में जानकारी देंगे और साथ […]

राव शेखाजी व गौड़ों के मध्य घाटवा युद्ध : कारण और रणनीति

झूंथर सोलहवीं शताब्दी में गौड़ राजपूतों का एक शक्तिशाली केंद्र था | उस वक्त कोलराज गौड़ वहां का शासक था | जो स्वभाव से घमंडी, उदण्ड अव अभद्र प्रवृति का व्यक्ति था | वह अपनी स्मृति चिरस्थाई करने के लिए एक कोलोलाव नाम से एक तालाब बनवा रहा था | उसने नियम बना रखा था […]

वीर शिरोमणि राव शेखाजी : निर्वाण दिवस पर विशेष

आज का दिन यानी अक्षय तृतीया शेखावत वंश व शेखावाटी के प्रवर्तक वीरवर महाराव शेखाजी का निर्वाण दिवस है | महाराव शेखाजी का जन्म विजयादशमी वि. सं. 1490 में बरवाडा व नान अमरसर के शासक मोकलजी की रानी निरबाण जी के गर्भ से हुआ था | राव शेखाजी को इतिहास में नारी सम्मान का रक्षक […]

राव शेखाजी व अखनखां के मध्य ढोसी नारनोल युद्ध वि.सं. 1530

ढोसी नारनोल का नवाब अखनखां एक वीर, गर्वीला और उद्भट वहादुर योद्धा था | उसके पास शक्तिशाली व सुसंगठित सेना थी | उसकी शक्ति से दिल्ली का सुल्तान बहलोल लोदी भी खौफ खाता था, जिसका उदाहरण एक घटना से पता चलता है- बहलोल लोदी ने ईराक से बड़ी अच्छी नस्ल के, बड़ी संख्या में घोड़े […]

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