महार कलां का इतिहास History of Mahar Kalan

आमेर के युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी ने महार गांव बसाया था | युवराज कुम्भाजी के वंशज कुम्भावत कछवाह कहलाते हैं | आजादी पूर्व महार  कुम्भावत कछवाहों का प्रमुख ठिकाना रहा है | वर्तमान में महार कलां के नाम से जाना जाने वाला यह गांव जयपुर से 42 किलोमीटर और चौमू से 15 किलोमीटर दूर […]

खेजड़ला ठिकाने का इतिहास | History of Khejrla Fort

खेजड़ला ठिकाने का इतिहास | History of Khejrla Fort : जैसलमेर के रावल केहर के छोटे भाई हमीर के वंशज जैसलमेर से मछवाला गांव आये और मछवाला से पोकरण | पोकरण रहने के कारण भाटियों की यह शाखा पोकरणा भाटी कहलाई | पोकरण रहने के काफी समय बाद भाटी वंश की यह शाखा बीकानेर क्षेत्र […]

रणसी गांव का इतिहास : History of Ransi Gaon

रणसी गांव का इतिहास : History of Ransi Gaon | जोधपुर की बिलाड़ा तहसील में बसा है रणसी गांव | रणसी गांव बहुत ही प्राचीन गांव है | गांव में बने तालाब किनारे कुछ स्मारक रूपी छतरियां बनी है, जिनके बारे में कहा जाता है कि यह पालीवाल ब्राह्मणों की है | ये स्मारक साबित […]

राजपूत चरित्र को प्राणवान ऐसी भावना ने बनाया

राजपूत चरित्र को प्राणवान ऐसी भावना में बनाया : दो शत्रु युद्ध में तलवारों से खेल रहे हैं, एक दूसरे पर प्रहार कर रहे हैं, “काका-भतीजा” कहकर एक दूसरे से बात भी करते जा रहे हैं और आपस में अमल की मनवार भी कर रहे हैं | यह था मध्यकालीन भारत का राजपूत चरित्र | […]

मातृभूमि-प्रेम की वीरोचित परम्पराओं की एक अद्भुत झलक

कैसी अद्भुत थीं यहाँ की मातृभूमि-प्रेम की वे वीरोचित परम्पराएँ ? उनका विशद् विवेचन तो एक स्वतंत्र ग्रंथ का ही विषय है। इतिहास के कीर्तिपृष्ठों में वे शतशः बिखरी पड़ी है। यहाँ केवल एक झलक देख लीजिए । मृत्यु के अनन्तर मृतक को उसके पुत्रों द्वारा पिण्डदान दिए जाने का विधान तो प्रायः सभी हिन्दुओं […]

क्यों कहा जाता है राजपूतों को रांघड़

रांघड़ या रांघड़ा संबोधन पर ज्यादातर राजपूत युवा चिढ़ जाते हैं और उनके विरोधी भी चिढाने या उन्हें नीचा दिखाने के लिए उन्हें रांघड़ या रांघड़ा कह कर संबोधित करते हैं | पर मजे की बात है कि दोनों पक्षों को इस शब्द का अर्थ नहीं पता होता | दरअसल आजादी से पूर्व तक राजपूतों […]

क्या आप रणोही जागने के बारे में जानते हैं

राजस्थान के इतिहास व आम बोलचाल की भाषा में एक शब्द है रणोही, जिसे कई जगह रणवाय भी बोला जाता है | ये शब्द आजकल बहुत कम प्रचलन में है क्योंकि वर्तमान पीढ़ी ना तो इसका मतलब समझती, ना  इस पीढ़ी ने सुना है | पर पुराने  व अनपढ़ लोग इसके बारे में जानते हैं […]

सामी गांव का इतिहास History of Sami Kheda Village

सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर सामी गांव अपनी कई विशेषताओं के चलते प्रसिद्ध है | इस गांव से रणवा जाट, गौड़ और शेखावत राजपूतों का इतिहास जुड़ा है | यह गांव मूल रूप से कब बसा इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है पर ये बात पक्की है कि जब इस वर्तमान […]

प्राचीन शेखावाटी प्रदेश में गुप्त काल

शेखावाटी प्रदेश में गुप्त काल : गुप्त सम्राटों के सत्ता में आने से पहले दूसरी शताब्दी ईस्वी में मत्स्य जनपद पर अनेक गणतंत्री कबीलों के शासन करते रहने के प्रमाण मिलते हैं, जिनमें आर्जुनायन मुख्य थे। विदिशा, पद्मावती और कांतिपुरी के नागों (भारशिवों) की भांति – यहां के शासक कुल भी पूर्ण रूपेण स्वतंत्र थे। […]

बिसाऊ किले का इतिहास

सन 1755 ई. में बना यह गढ़ अंग्रेजी हकुमत की आँखों की किरकिरी रहा | इसी गढ़ के एक शासक ने तुंगा युद्ध में मुकाबला कर जयपुर राज्य की स्वतंत्रता व प्रजा को महादाजी सिंधिया के कोप से बचाने के लिए वीरता प्रदर्शित कर अपने प्राणों की आहुति दी थी | यही नहीं, राजस्थान के […]

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