Bathoth Fort History बठोठ का इतिहास

Bathoth Fort History  : इस छोटे से खुबसूरत किले का भी अपना गौरवशाली इतिहास है| शेखावाटी के प्रसिद्ध क्रांतिवीर डूंगर सिंह शेखावत और लोठू जाट का इस किले से सम्बन्ध रहा है| क्रांतिवीर लोठू जाट बठोठ गांव में ही रहता था, बठोठ गांव के बाहर ही जाट समाज ने क्रांतिवीर लोठू जाट की बड़ी सी […]

धोद किले का इतिहास

धोद : राजस्थान के शेखावाटी आँचल में सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर धोद कस्बे में स्थित है यह किला | आज धोद पंचायत समिति व विधानसभा क्षेत्र है लेकिन यदि इसके अतीत में हम झांके तो धोद का यह किला सीकर रियासत का एक महत्त्वपूर्ण ठिकाना था और सीकर रियासत के दो […]

कस्बा लवाण जिसकी है कई कारणों से पहचान

कस्बा लवाण जिसकी है कई कारणों से पहचान

जयपुर से करीब 45 किलोमीटर व दोसा से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित लवाण कस्बा कई कारणों से प्रसिद्ध है। जयपुर-आगरा हाईवे से बस्सी अथवा बाँसखो होते हुए व दौसा से लालसोट सवाई-माधोपुर रूट से लवाण पहुँच सकते हैं। आमेर के महाराजा भारमल के पुत्र भगवानदास को लवाण की जागीर प्राप्त हुई थी। राजा भगवानदास […]

लोहागढ़ महाराजा सूरजमल के शौर्य का प्रतीक

लोहागढ़ महाराजा सूरजमल के शौर्य का प्रतीक

भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग जाट राजाओं की शौर्यगाथाओं का एक ऐसा किला है, जिसने मुगलों से लोहा लिया | अंग्रेजों ने इस किले पर कई बार आक्रमण किये पर जीत नहीं पाए| अंग्रेज सेनापति सर चार्ल्स मेटकाफ ने गवर्नर जनरल को लिखा था, “ब्रितानी फौजों की प्रतिष्ठा भरतपुर के दुर्भाग्यपूर्ण घेरे में दब गई| शायद […]

Rupgarh Fort रुपगढ़ किले का इतिहास

Rupgarh Fort रुपगढ़ किले का इतिहास  : अरावली के उबड़ खाबड़ मगरों और ऊँची नीची पहाड़ियों की चोटियों में से एक चोटी पर आकाश को कुदेरता, गुमसुम हुआ, यह गौरवशाली दुर्ग ऐसे खड़ा है, जैसे किसी विस्मृत सिद्धि की पुन: प्राप्ति के लिए कोई अनुष्ठान कर रहा हो | कभी इस छोटे से दुर्ग के […]

जोधपुर किले का इतिहास History of Jodhpur Fort

रणबंका राठौड़ों की नगरी जोधपुर में, किसी ओर से भी प्रवेश करने पर कोसों दूर से चिड़ियानाथ पहाड़ी पर धरती का लाडला, मेहरानगढ़ दूर से चमकता दिखाई देता है | जोधपुर में सूरज की सर्वाधिक किरणें पड़ती है अंत: सूरज की रौशनी में नहाये किले की चमक देखते ही बनती है | धरातल से 121 […]

Kuchaman Fort History कुचामन का किला

Kuchaman Fort History कुचामन का किला

Kuchaman Fort History वीरता और शौर्य का प्रतीक यह किला एक विशाल और ऊँची पहाड़ी पर बना है, जो गिरि दुर्ग का सुन्दर उदाहरण है । उन्नत प्राचीर और सुदृढ़ बुर्जों वाला यह किला प्राचीन भारतीय शिल्प शास्त्रों में वर्णित दुर्ग स्थापत्य के आदर्शों के अनुरूप निर्मित जान पड़ता है । नागौर जिले की नावां […]

इसलिए है कुचामन किले में वनखंडी बाबा की धुणी सबसे ऊपर

किसी भी दिशा से कुचामन सिटी में प्रवेश करने से एक ऊँची पहाड़ी पर कुचामन का किला नजर आता है और किले पर नजर आती है एक छतरीनुमा आकृति जो किले में सबसे ऊपर बनी है | किले में जितने भी महल, मंदिर व अन्य इमारतें है वे इस छतरीनुमा आकृति से नीचे बनाई गई […]

तोप के गोले भी नहीं तोड़ पाए थे लकड़ी के इन किंवाड़ों को

किसी भी घर, दफ्तर या ईमारत की सुरक्षा के लिए दरवाजों का सबसे बड़ा महत्त्व है | प्राचीन काल से ही आम व्यक्ति से लेकर राजा-महाराजा तक सुरक्षा के लिए अपने मकानों, महलों, किलों के दरवाजों की मजबूती का विशेष ध्यान रखते थे | आप किसी भी किले के दरवाजों की मजबूती देखकर उनकी महत्ता […]

History of Danta Fort दांता किले का इतिहास

History of Danta Fort : ऊँची पहाड़ी पर अपना गर्वीला मस्तक उठाकर खड़े इस किले का अपना ही स्वर्णिम इतिहास है | इसी किले की कहानी और इसके शासकों के संक्षिप्त इतिहास आज हम बताएँगे इस लेख में |  इस छोटे से किले व छोटी सी रियासत के स्वाभिमानी शासकों ने लड़े थे कई बड़े […]

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