जातिय वैमनष्यता : दोषी कौन ?

कुँवरानी निशा कँवरजितनी जातीय वैमनष्यता आज है इतनी ज्ञात इतिहास ,लोक कथाओं और किंवदन्तियो में कही भी देखने को नहीं मिलती है |जर्मनी का नाजीवाद इसका एक उदहारण विश्व इतिहास में जरुर नजर आता है किन्तु वह राज्य प्रायोजित था |किन्तु आज हमारे देश में एक नहीं अनेको संगठन लोगो के कल्याण और उद्धार के […]

दीनता और हीनता ही है पतन की जड़

कुँवरानी निशा कँवर नरुकायदि कोई व्यक्ति रास्ते में चलते चलते ठोकर खा जाये, और लड़खड़ा कर गिर जाये तो यह एक सामान्य घटना है | ठोकर चाहे रास्ते में पड़े किसी पत्थर से लगी हो या किसी ने टंगड़ी मारी हो,फिर भी परिणाम तो गिरना ही होगा |लेकिन गिरने के बाद उठने का प्रयत्न ही […]

क्षत्रिय और दलित

क्षत्रिय और दलित

शूद्र शाब्दिक दृष्टि से आशुद्रव शब्द से व्युत्पित है जिसका अर्थ है शीघ्र ही द्रवित यानि पिघल जाना | यानि जल्दी ही अपने को  और में समिलित कर लेना | द्रवित होने वाला पदार्थ किसी भी अन्य पदार्थ के साथ अपने को समाहित कर सकता है | यह बहुत उच्च कोटि के व्यक्तियों में ही […]

क्या धन सक्षमता का पर्याय है ?

कुँवरानी निशा कँवर नरुका धनवान होना या निर्धन होना अपने आप में कोई बुराई नहीं है|किन्तु चूँकि यह युग अर्थ युग है और इसमें प्रत्येक गणना अर्थ से शुरू होती है और अर्थ पर ही समाप्त होजाती है |इसलिए इस युग में जीवन की वास्तविकशक्तियों,आत्मिक,मानसिक और शारीरिक शक्तियों से भी अधिक उसकी आर्थिक शक्ति का […]

असर दवा का श्रेय मिलता है अन्धविश्वासी टोटकों को

असर दवा का श्रेय मिलता है अन्धविश्वासी टोटकों को

मैं अक्सर लोगों से सुनता रहता हूँ कि मैंने फलां मंदिर में फलां मन्नत मांगी और वो पूरी हो गयी ,तो कोई बताता है उसकी बीमारी फलां गुरूजी या देवता के आशीर्वाद से ठीक हो गयी वरना डाक्टरों ने तो मुझे बर्बाद ही कर दिया होता , तो कोई देरी से प्राप्त संतान को किसी […]

ग्लोबल होता राजस्थानी साफा

ग्लोबल होता राजस्थानी साफा

पगड़ी का इस्तेमाल हमारे देश में सदियों से होता आया है | प्राचीन काल से ही हमारे यहाँ पगड़ी को व्यक्तित्व,आन,बान,शान और हैसियत का प्रतीक माना जाता रहा है | पगड़ी हमारे देश में चाहे हिन्दू शासक रहें हों या मुस्लिम शासक सभी की प्रिय रही है | आज भी पगड़ी को इज्जत का परिचायक […]

विलुप्त प्राय: ग्रामीण खेल : झुरनी डंडा

विलुप्त प्राय: ग्रामीण खेल : झुरनी डंडा

आज से कोई तीन दशक पहले तक गांवों में तरह -तरह के खेल खेले जाते थे | कब्बड्डी,खो खो,फूटबाल,बोलीबोल आदि के साथ रात के अँधेरे में छुपा छुपी तो दिन में गुल्ली डंडा,गुच्या दडी,सोटा दडी,कांच की गोलियों के कंचे तो दोपहर में किसी पेड़ के ऊपर झुरनी डंडा खेल खेला जाता था | गर्मियों में […]

बारिश का मौसम और बचपन के वे दिन

राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र में शनिवार रात्री से ही बारिश का मौसम बना हुआ है क्षेत्र के कभी इस हिस्से में तो कभी उस हिस्से में बारिश हो रही है दो दिन से सुहावना मौसम होने के चलते बिजली की खपत कम होने के कारण कट भी कम ही लग रहे है आज दिन भर बारिश […]

हमारी साझा संस्कृति में दलित सम्मान

हमारी साझा संस्कृति में दलित सम्मान

दलित उत्पीडन की ख़बरें अक्सर अख़बारों में सुर्खियाँ बनती है फिल्मो में भी अक्सर दिखाया जाता रहा है कि एक गांव का ठाकुर कैसे गांव के दलितों का उत्पीडन कर शोषण करता है | राजनेता भी अपने चुनावी भाषणों में दलितों को उन पर होने वाला या पूर्व में हुआ कथित उत्पीड़न याद दिलाते रहते […]

चुनाव प्रबंध , झगड़े और दलित उत्पीडन

चुनाव प्रबंध , झगड़े और दलित उत्पीडन

अभी हाल ही में हरियाणा में पंचायत चुनाव सम्पन्न हुए है इससे कुछ दिन पहले यहाँ नगर निगम के चुनाव हुए थे | नगर निगम चुनाव समाप्त होने के बाद एक चुनावी कार्यकर्त्ता से मिलना हुआ , वह बता रहा था कि आजकल कैसे चुनाव मैनेज करने होते है उम्मीदवारों को पैसा पानी की तरह […]