History of Lamiya Fort लामिया का इतिहास

History of Lamiya Fort: इतिहास में राजा रायसल दरबारी के नाम से प्रसिद्ध रायसलजी को सात गांवों की जमींदारी मिली थी | राजा रायसल दरबारी अमरसर के शासक राव सूजाजी के पुत्र थे | वि. सं. 1611 में रायसलजी ने अपनी जमींदारी में एक छोटे से किले का निर्माण कर लामिया नाम से गांव बसाया […]

जखोड़ा का इतिहास हैरिटेज शराब के प्रसारक ठा.करणीसिंह से जुड़ा है

जखोड़ा ग्राम चिड़ावा से 17 किलोमीटर, मंड्रेला से 7 किलोमीटर, झुंझुनू से 30 किलोमीटर और पिलानी से 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित है l यह गांव भैरुंसिंह जी को जागीर में मिला था | ठाकुर भैरुंसिंहजी ने यहाँ एक ऊँचे टीले पर किला बनवाया था, पर देखरेख के अभाव व गड़ा धन निकालने के लोभी […]

महार कलां गांव के चमत्कारी संत सालागनाथजी

महार कलां Mahar Kalan गांव में सुरम्य पहाड़ी की तलहटी में संत सालगनाथजी का स्थान है, कभी यहाँ गांव बसने से पूर्व एक छोटे से तिबारे में नाथ संत सालगनाथजी विराजते थे | महार गांव आमेर के राजा चंद्रसेन जी के युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी ने बसाया था | युवराज कुम्भाजी के पुत्र उदयकरणजी […]

रणसी गांव का इतिहास : History of Ransi Gaon

रणसी गांव का इतिहास : History of Ransi Gaon | जोधपुर की बिलाड़ा तहसील में बसा है रणसी गांव | रणसी गांव बहुत ही प्राचीन गांव है | गांव में बने तालाब किनारे कुछ स्मारक रूपी छतरियां बनी है, जिनके बारे में कहा जाता है कि यह पालीवाल ब्राह्मणों की है | ये स्मारक साबित […]