कैसे कैसे विज्ञापन

कैसे कैसे विज्ञापन

आज फेसबुक पर विचरण करते हुए एक मित्र के फेसबुक एल्बम में एक विज्ञापन पट्ट का चित्र मिला जो यहाँ प्रस्तुत है
आप भी इस विज्ञापन पट्ट को देखिये और सोचिये इसकी भाषा के बारें में

मेरी शेखावाटी: ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार
ताऊ डाट इन: "नाचै कुदै बान्दरी और खीर मदारी खाय"

21 Responses to "कैसे कैसे विज्ञापन"

  1. प्रवीण पाण्डेय   July 30, 2010 at 5:42 pm

    पता नहीं हिन्दी की टाँग तोड़ रहे हैं कि अंग्रेजी की।

    Reply
  2. राज भाटिय़ा   July 30, 2010 at 6:18 pm

    वाह वाह जी खुब स्पीकना स्पीको एक दिन यह मुई अग्रेजी अपना मुंह काला कर के खुद ही स्पीकना भुल जायेगी, जो बच्चे यहां से स्पीकना स्पीकेगे, ओर ऎम बी ऎ करेगे वो भी तर जायेगे. बहुत सुंदर, यह फ़ोटू मै मेल से अपने अन्य दोस्तो को भी भेज रहा हुं

    Reply
  3. रंजन   July 30, 2010 at 11:53 pm

    mast.. praveen bhai ne sahi kahaa..

    Reply
  4. क्षत्रिय   July 31, 2010 at 12:46 am

    इसमें तो हिंदी अंग्रेजी दोनों की टांग ही तोड़ दी !

    Reply
  5. Uncle   July 31, 2010 at 12:49 am

    हिंदी+अंग्रेजी =हिन्गलिस
    ये भाई साहब तो हिन्गलिस सिखायेंगे 🙂

    Reply
  6. कमाल का हिन्दीकरण किया है!

    Reply
  7. काजल कुमार Kajal Kumar   July 31, 2010 at 2:06 am

    बहुत अच्छा लगा. पूत के पांव पालने में ही समझे जा सकते हैं.

    Reply
  8. वाणी गीत   July 31, 2010 at 2:59 am

    फुल जॉब गारंटी है …:):)

    Reply
  9. 🙂 🙂 …बहुत अजीब लगता है भाषा का ऐसा रूप देख कर ..पर सच है कि आज आम बोलचाल में बहुत से शब्द ऐसे ही बोले जाते हैं ..अंग्रेजी का हिन्दीकरण कुछ यूँ हो रहा है….

    टीचरों ,..लाईनों ….लाईटें ….

    अक्सर अंग्रेजी के शब्द में बहुवचन हिंदी का लगा कर बात कि जाति है….बहुत अखरता है ….

    Reply
  10. dhiru singh {धीरू सिंह}   July 31, 2010 at 4:25 am

    मुझे भी स्पीकना है इंग्लिश

    Reply
  11. बी एस पाबला   July 31, 2010 at 4:28 am

    और स्पीको 🙂

    मज़ेदार

    बी एस पाबला

    Reply
  12. संजय बेंगाणी   July 31, 2010 at 5:31 am

    कौवा हँस की चाल चल रहा है 🙂

    Reply
  13. 1st choice   July 31, 2010 at 9:24 am

    nice

    Reply
  14. नीरज जाट जी   July 31, 2010 at 9:48 am

    हम भी एक बार स्पीकने सीखने गये थे।
    एक दिन रास्ते में एक कुतिया पडी सो रही थी। हम कह बैठे:
    सलीपले सलीपले डोगणी, तेरे मस्ती के डेज आ रे सैं।

    Reply
  15. परमजीत सिँह बाली   July 31, 2010 at 11:38 am

    आपने जो स्पीका हमने रीड लिआ:))

    Reply
  16. महफूज़ अली   July 31, 2010 at 3:11 pm

    बताइए…अब सब इंग्लिश स्पीकिया रहे हैं…

    Reply
  17. Pagdandi   July 31, 2010 at 4:57 pm

    ha ha ha ha ha……….very nice

    Reply
  18. मो सम कौन ?   July 31, 2010 at 5:04 pm

    हा हा हा।
    ऐसे ही हमारे ऑफ़िस में एक अधिकारी थे जो अमृतसर से संबंध रखते थे। रोज शाम को जाकर उन्हें इतना पूछते थे कि सर, आज का दिन कैसे बीता और वो तफ़सील से बताया करते, "आज सतारा लैटरां लिखियाँ" अपने पल्ले न पड़ा कभी कि ’लैटरां’ कौन कौन सी भाषा का कॉकटेल है।

    Reply
  19. नरेश सिह राठौड़   August 1, 2010 at 8:03 am

    रोचक विज्ञापन दिखाया है आपने | अब इनको तो फ़ोकट में पब्लिसिटी मिल ही गयी | हो सकता है शायद इसी लिए लिखा गया होगा | सबका ध्यान इधर ही चला जाए |

    Reply
  20. योगेन्द्र पाल   August 1, 2010 at 6:01 pm

    I am also learning speakna and trying here in comments.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.