हमारा मैट्रो राष्ट्रीय अख़बार की नजर में ताऊ.इन ब्लॉग

हमारा मैट्रो राष्ट्रीय अख़बार की नजर में ताऊ.इन ब्लॉग

हिंदी ब्लॉग जगत में अपने अनोखे हास्य व्यंग्य व मजेदार लेखन के लिए प्रसिद्ध ताऊ रामपुरिया के ब्लॉग ताऊ.इन पर कल दिनांक २५ मई २०१३ को राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र हमारा मैट्रो में एक लेख छपा| जो हुबहू आपके पढने के लिए यहाँ प्रस्तुत है|

हमारा मैट्रो राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र दिल्ली, गौतमबुद्ध नगर, लखनऊ, देहरादून, पटना, जयपुर और छत्तीसगढ़ के सरगुजा से नियमित प्रकाशित होता है| ताऊ.इन पर लिखा यह लेख हमारा मैट्रो समाचार पत्र की वेब साईट पर उपलब्ध ईपेपर डाउनलोड कर पृष्ठ संख्या चार पर पढ़ा जा सकता है|

ताऊ डाट इन : इंटरनेट पर एक अनोखा हिंदी ब्लॉग
हमारा मैट्रो टीम
इन्टरनेट की दुनियां में हिंदी ब्लॉग जगत का अपना एक अलग ही महत्त्व है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग अलग प्रतिभा वाले लोग आज अपनी मातृभाषा हिंदी में अपने ब्लॉगस पर बहुत कुछ लिख रहे है कोई कविता, कोई गजल, कोई कहानी, कोई ताजातरीन खबर, कोई स्वास्थ्य से सम्बंधित जानकारी, कोई अपनी विशेषज्ञता वाला तकनीकि ज्ञान के बारे में लिख रहा है तो धर्म पर, कोई अपनी समर्थित राजनैतिक पार्टी का प्रचार कर रहा है तो कोई अपने देश की समस्याओं और राजनीति पर अपने विचार व्यक्त कर रहा है, कोई अपना यात्रा संस्मरण लिख रहा है तो महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध करवा अपना ब्लोगिंग धर्म निभा रहा है। इस तरह लोग इंटरनेट पर मौजूद इस ब्लोगिंग रूपी प्लेटफार्म का पूरा सदुपयोग कर रहे है|

पर इन सब विषयों के हिंदी ब्लॉगस के बीच पी.सी.रामपुरिया (मुद्गल) जिन्होंने हिंदी ब्लॉग जगत में अपना नाम ताऊ रामपुरिया रखा हुआ है जो हरियाणा व राजस्थान सीमा पर राजस्थान के रामपुरा गांव के मूल निवासी है और वर्तमान में इंदोर रहते है का हिंदी ब्लॉग ताऊ डाट इन अपने आप में एक अनूठा ब्लॉग है। इस ब्लॉग के माध्यम से ताऊ रामपुरिया का मकसद सिर्फ जिंदादिल लोगों से जीवंत संवाद बनाये रखते हुए लोगों को भागदौड़ वाली व्यस्त जिंदगी में हँसना हँसाना है इस बारे में ताऊ रामपुरिया खुद अपने ब्लॉग पर अपने परिचय में लिखते है-
“लेखन मेरा पेशा नही है। थोडा बहुत गाँव की भाषा में सोच लेता हूँ, कुछ पुरानी और वर्तमान घटनाओं को अपने आतंरिक सोच की भाषा हरयाणवी में लिखने की कोशीश करता हूँ। वैसे जिंदगी को हल्के फुल्के अंदाज मे लेने वालों से अच्छी पटती है। गम तो यो ही बहुत हैं। हंसो और हंसाओं, यही अपना ध्येय वाक्य है। हमारे यहाँ एक पान की दूकान पर तख्ती टंगी है, जिसे हम रोज देखते हैं। उस पर लिखा है – कृपया यहाँ ज्ञान ना बांटे, यहाँ सभी ज्ञानी हैं। बस इसे पढ़ कर हमें अपनी औकात याद आ जाती है। और हम अपने पायजामे में ही रहते हैं। एवं किसी को भी हमारा अमूल्य ज्ञान प्रदान नही करते हैं। ब्लागिंग का मेरा उद्देश्य चंद उन जिंदा दिल लोगों से संवाद का एक तरीका है जिनकी याद मात्र से रोम रोम खुशी से भर जाता है। और ऐसे लोगो की उपस्थिति मुझे ऐसी लगती है जैसे ईश्वर ही मेरे पास चल कर आ गया हो।”

हालाँकि अपने परिचय में ताऊ ने साफ लिख रखा है कि – “हम ज्ञान नहीं बांटते पर ताऊ का लिखा किस्सा पढने वाले को पढने के बाद पता चलता है की ताऊ हंसाने वाले किस्सों में गूढ़ व्यंग्य के साथ गूढ़ ज्ञान भी बाँट गया यही लेखन की विलक्षण प्रतिभा के धनी ताऊ की लेखन शैली का कमाल है।”

ताऊ रामपुरिया लोगों के मनोरंजन के लिए जितने किस्से लिखते है वह खुद पर, खुद का मजाक उड़ाते हुए लिखते है। यही नहीं ताऊ ने अपने लेखों में कई पात्र भी बना रखे है इनमे एक रामप्यारी नाम की बिल्ली तो रामप्यारे नाम का एक गधा भी है खुद ताऊ अपनी किसी भी फोटो में राजस्थानी पगड़ी पहने बन्दर का चेहरा लगाकर रखता है। अपने किस्सों में ताऊ कभी डाक्टर बनकर क्लिनिक खोलता है और रामप्यारी से मरीजों का कैट स्केन करवाता है तो कभी ताऊ रामप्यारे को ताऊ टीवी का एंकर बना किस्से लिख लोगों को हंसाने का प्रयास करता है। अपने किस्सों में ताऊ लूटेरा, डकैत, बेईमान भ्रष्ट नेता, व्यापारी सब कुछ बन अपने ऊपर हास्य किस्से बना ऐसे लोगों की कार्यशैली पर सहज और सरल भाषा में करारा व्यंग्य लिखता है जिसे पढ़कर पता चलता है कि ताऊ मौजूदा घटनाओं को सरल व सहज भाषा में हास्य, व्यंग्य के रूप में दिलचस्प तरीके से सहेजने में माहिर है।

इन हास्य किस्सों के अलावा ताऊ ने हास्य हास्य में ही एक समय ज्ञानवर्धक पहेली श्रंखला चला हिंदी ब्लॉग जगत में अच्छी ख्याति पाई। पहेली व पहेली के उतर वाली पोस्ट व अन्य अनेकों पोस्ट्स के अंत में ताऊ ने लोगों को हंसाने के लिए एक ताऊ का खूंटा “इब खूंटै पै पढो” नामक कालम में लिखे किस्से पढ़कर पाठक बिना हँसे रह ही नहीं सकते।

अपने हास्य व्यंग्य किस्सों के पात्र ताऊ के बारे में ताऊ रामपुरिया ने ऐसी धारणा बना दी कि जो हर काम में एक्सपर्ट हो, बेहतरीन हो वही ताऊ है यानी ताऊत्व को प्राप्त व्यक्ति हर क्षेत्र व हर कार्य में सफल रहता है । ताऊ रामपुरिया ने अपने पात्र ताऊ से किस्सों में बेशक चोरी, डकैती, बेईमानी, जालसाजी सब करायी पर उन्होंने हर बार हर किस्से के आखिर में ताऊ का भोलापन व उनके अन्दर की मानवता को जरुर उजागर किया जो अक्सर गांव के भोले भाले लोगों के मन में होती है और यही ताऊ रामपुरिया की लेखनी का कमाल है कि- वे एक भोले भाले पात्र ताऊ से बुरे काम करवाते हुए बेईमानों, लुटेरों व भ्रष्टों पर सहज व्यंग्य कर उनकी पोल खोलते है। साथ ही महिला सशक्तिकरण को दर्शाते हुए ताऊ अपने लगभग किस्सों में ताई के हाथों लट्ठ जरुर खाता है एक ताई ही है जिसके आगे ताऊ का ताऊत्व नहीं चलता।

ताऊ रामपुरिया सिर्फ हास्य व्यंग्य के साथ कविता आदि अनेक विधाओं पर लिख डालते है कई बार साहित्यकारों पर व्यंग्य करते हुए वे जो शब्द व वाक्य लिख डालते है उन्हें पढ़कर कोई भी उन्हें उच्च कोटि का साहित्यकार माने बिना नहीं रह सकता।

ताऊ रामपुरिया की ताऊगिरी की चर्चा करते हुए दिल्ली के ब्लॉग लेखक डा. टी.एस़़ दराल लिखते है– “ताऊ के नाम से प्रसिद्द श्री पी सी रामपुरिया का हास्य विनोद, ब्लॉगिंग को दिलचस्प बना रखा है। ताऊ कविता नहीं करते लेकिन उनकी कल्पना शक्ति किसी बड़े कवि से कम नहीं है। अक्सर लोग हैरानी में पड़ जाते हैं कि ताऊ के पास ऐसे खुरापाती आइडियाज आखिर आते कहाँ से हैं? हिंदी ब्लॉगजगत में जब भी ताऊ का नाम आता है, मन में मौज मस्ती की जैसे धारा प्रवाहित होने लगती है। ताऊ की ब्लॉग पहेलियाँ सभी ब्लॉगर्स का ऐसा मानसिक व्यायाम करा देती थी जैसे कोई ८१ खानों वाला क्रॉसवर्ड पजल करता है। एक चिकित्सक की दृष्टि से देखें तो यह एक्षरसाइज करने वालों को एल्जिमर्स डिसीज होने का खतरा कम से कम रहता है।”

शायद यही कारण है कि एक ब्लॉग पर अलग अलग विधाओं पर लिखने के चलते एक बार तो हिंदी ब्लोगिंग में यह धारणा भी बन गई कि ताऊ ब्लॉग पर एक नहीं कई लेखक मिलकर लिखते है और इस धारणा पर व्यंग्य करते हुए खुद ताऊ रामपुरिया ने ताऊ कौन ? नामक एक लेख लिख ताऊ नाम को एक पहेली ही बना दिया और कई हिंदी ब्लॉगर इस पहेली को सुलझाने में वर्षों लगे रहे आज भी गाहे बगाहे किसी ब्लॉग पर ताऊ कौन सम्बंधित लेख पढने को मिल ही जाता है।

ताऊ कौन ? पहेली को सुलझाते हुए एक लेख में ताऊ रामपुरिया असली ताऊ का परिचय देते हुए एक कहानी के माध्यम से ताऊ पात्र को रामायण कालीन बता उसे भगवान् राम व माता सीता के प्रिय बन्दर के रूप में प्रचारित कर फिर मौज लेने में लगे।

कुल मिलाकर अपने ब्लॉग को माध्यम बना ताऊ रामपुरिया खुद मौज लेने के साथ साथ लोगों को हंसाने का व जिंदादिल लोगों से अपने तरीके से संवाद स्थापित करने में सफल रहे है।

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