कुजड़बो शौक

दिन भर ढोवै सर पर काठड़ी,
मजदुर पिसा ल्यायो घाल आँटड़ी
घर आंवतो ही ठेके पर गियो
थांकेलो उतारण न छककर पियो
मजदूरी उठही पीण म सारी गवां दी
उधारी भी आती बेल्ल्यां लिखा दी
ढलती रात म आयो दारु की पीक में
नैना टाबर बैठ्या चुल्हौ तापै आटा री उडीक में
पेट कि भूख पर भारी पड़, कुजड़बो शौक
काल ओज्यूं ध्यानगी नै देगो दारु म झोंक

लेखक : गजेन्द्रसिंह शेखावत

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