प्रेस क्लब अध्यक्ष को चाहिए एक अदद नौकरी!

जयपुर :विशेष संवाददाता:पिछले नौ महीने से प्रेस क्लब की कुर्सी पर बैठे अध्यक्ष जी इन दिनों परेशान हैं। कारण यह है कि उनके पास नौकरी नहीं है। पहले वे एक बड़े अखबार में सर्वेयर हुआ करते थे लेकिन बाद में पत्रकारों के बीच घुसपैठ कर ली और तीन बार चुनाव हारकर चौथी बार अपने स्वजातिय पत्रकारों की जातिय भावनाओं का दोहन कर फायदा उठाते हुए चुनाव भी जीत अध्यक्ष बने गए। पत्रकारिता में आज तक उनके नाम से एक भी खबर प्रकाशित हुई नहीं देखी है, लेकिन अब राजधानी जयपुर के पत्रकार जब आपस में बात करते हैं कि प्रेस क्लब अध्यक्ष कौनसे अखबार में है तो उनका खीजना जायज भी है। जब सचिवालय के गलियारों में बड़े अधिकारी उनसे पूछते हैं कि वे कहां नौकरी करते हैं तो उनके पास जवाब सिर्फ यही होता है कि वह प्रेस क्लब की ही नौकरी करते हैं।

यही कारण है कि वे आजकल आए दिन लोगों से लड़ते रहते हैं। हद तो तब हो गई जब पिछले दिनों पत्रकार आवास की राज्यस्तरीय समिति में एक संजीदा पत्रकार सदस्य से वे लडऩे पर उतारू हो गए। तू-तड़ाक पर उतर आए, पूछो क्यों? सिर्फ इसलिए कि वे एक ऐसे व्यक्ति को प्रेस कॉलोनी में आवास दिलाने पर आमादा थे जो कहीं से पत्रकार नहीं है और सिर्फ प्रेस चलाता है। वहीं वे एक ऐसे पत्रकार साथी का विरोध कर रहे थे, जो जायज था और जिसे आवास योजना में भूखण्ड मिलना चाहिए था। नतीजा आपके सामने हैं। वैसे पत्रकारों को भूखण्ड दिलाने का वादा करके प्रेस क्लब अध्यक्ष ने इस योजना को लटकाने के पूरे प्रयास किए। आपको ताज्जुब होगा कि 98 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद प्रेस क्लब अध्यक्ष ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिखकर पत्रकार विश्वविद्यालय और पत्रकार आवास योजना एक ही जगह करने का आग्रह कर दिया। ऐसे में पूरा काम अटक गया। वह तो प्रेस क्लब कार्यकारिणी के दूसरे पदाधिकारियों ने उसी समय पर एक पत्र भेज दिया जिसे देखकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सारा माजरा समझ गए।

अब प्रेस क्लब के चुनाव होने जा रहे हैं मार्च में और वर्तमान अध्यक्ष का हर पासा पिट रहा है, ऊपर से नौकरी नहीं है। कोई अखबार उन्हें काम पर रखना नहीं चाहता क्योंकि उनके पास बताने को लिखी कोई खबर नहीं है।

6 Responses to "प्रेस क्लब अध्यक्ष को चाहिए एक अदद नौकरी!"

  1. अर रे रे..

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  2. धोखा कर एक बार चुनाव जीता जा सकता है बार२ नही,,,,

    recent post: मातृभूमि,

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  3. प्रवीण पाण्डेय   January 16, 2013 at 12:23 pm

    रोचक…

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  4. ब्लॉ.ललित शर्मा   January 16, 2013 at 1:10 pm

    पत्रकारिता में जब राजनीत घुस जाती थै तो यही होता है।

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  5. ताऊ रामपुरिया   January 16, 2013 at 2:31 pm

    इन्हें ताऊ टीवी में रामप्यारे के साथ रिपोर्टिंग की नौकरी दी जा सकती है. बायोडाटा भेजने की जरूरत नही है. ताऊ टीवी को ऐसे ही खुराफ़ाती लोग चाहियें.:)

    रामराम.

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  6. Padm Singh   January 17, 2013 at 4:24 am

    बेचारे…

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