पाक सेना को उसी की भाषा में देना होगा जबाब

सीमा पर पाक सैनिकों द्वारा घात लगाकर दो भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शवों के साथ क्रूरता के बाद देश के नागरिकों के मन में पाक सेना के खिलाफ जबरदस्त रोष है| जगह जगह पाक सेना के खिलाफ नारे लग रहें है और उसके पुतले जलाए जा रहे है| पाक सेना के इस दुष्कृत्य के खिलाफ जब आम नागरिकों में इतना रोष है तो सुरक्षा बलों के सैनिकों में कितना रोष होगा यह आसानी से समझा जा सकता है| आम नागरिक तो किसी भी तरह से अपना रोष सार्वजनिक तौर पर व्यक्त कर सकते है पर अनुशासान में बंधे सुरक्षा बलों के जवानों को तो अपना रोष व्यक्त करने के बजाय उसे कड़वा घूंट समझकर ही पीना पड़ रहा है| ऐसी स्थिति में उनकी मन: स्थिति कैसी होगी ? इसका अंदाजा सिर्फ वे ही लोग लगा सकते है जिनका इन जवानों से प्रत्यक्ष संबंध होता है|

पाक सेना द्वारा के कुकृत्य के खिलाफ एक तरफ जन आक्रोश चरम पर है वहीं हमारे देश के राजनेता और हुक्मरान बयानवीर बने पाक के खिलाफ कड़े शब्दों में बयान जारी कर बिना कोई ठोस कार्यवाही के अपने कर्तव्य से इतिश्री मात्र कर ले रहे है| हमारे नेता व हुक्मरान पाक के खिलाफ आरोप के बयान जारी कर रहें तो पाक उनका खंडन कर अपनी डीठता दिखाते हुए सीमा पर गोलीबारी जारी रखे हुए है| पाक सेना व सरकार के इस कृत्य से आसानी से समझा जा सकता है कि उस पर हमारे नेताओं व हुक्मरानों के कड़े वक्तव्यों का कोई असर नहीं है| क्योंकि पाक सेना भी हमारे बयानवीर हुक्मरानों को अच्छी तरह समझती है कि ये सिर्फ बयान देते है कार्यवाही करने की इनमें कोई इच्छा शक्ति ही नहीं है|

तो फिर क्या पाक सेना को इस तरह के कृत्य करने के लिए खुला छोड़ देना चाहिए ? या फिर उसे सबक सिखाने के लिए युद्ध छेड़ देना चाहिए ?

मेरे विचार से दोनों ही बातें ठीक नहीं!

पाक सेना को इस तरह की करतूतें करने से रोकने के लिए सिर्फ और सिर्फ एक ही रास्ता है उसे उसी की भाषा में जबाब दिया जाय|पाक सेना के अधिकारियों के साथ होने वाली फ्लैग मीटिंग्स में भी पाक अधिकारियों को हमारे सैन्य अधिकारियों द्वारा ऐसी साफ़ चेतावनी दे दी जानी चाहिए कि- हमारे एक सैनिक की जान का बदला आपके दस सैनिकों की जान से लिया जायेगा|

जैसे उसने हमारे दो जवानों के साथ जो बदसलूकी की, इसके जबाब में हमारी सेना को भी उसके जवानों के साथ ऐसा ही करना चाहिए| पाक सेना ने दो जवानों को शहीद किया उसके बदले हमारी सेना को भी ऐसा ही तरीका अपनाकर उसके कम से कम दस पाक सैनिकों के साथ ऐसा ही करना चाहिए| ताकि पाक सैनिकों द्वारा किसी भी दुष्कृत्य को अंजाम देने से पहले उनके मन में खौफ रहे कि यदि हमने भारत के एक सैनिक की हत्या की तो हमारे दस सैनिकों की हत्या होगी| ऐसा खौफ ही उन्हें इस तरह के दुष्कृत्यों को करने से रोकेगा| और ये सब हमारी सेना के अधिकारियों को अपने स्तर पर ही करना होगा| क्योंकि हमारी सरकार में बैठे लोग ऐसा करने के आदेश कभी नहीं दे सकते|

अत: भारतीय सेना के अधिकारियों को ही चाहिए कि वे ही पाक सेना को उसी की भाषा में जबाब दे| जैसे पाक सेना अपने किये से मुकर जाती है ठीक वैसे ही पाक सेना को नुकसान पहुंचाकर हमारी सेना को मुकर जाना होगा तभी पाक सेना के कुकृत्यों पर रोक लग सकती है| यदि हमारी सेना सरकार व नेताओं के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठी रही तो इस तरह का सिलसिला चलता ही रहेगा| और हमारे जवान शहीद होते ही रहेंगे| जो हमारे समाज व सेना दोनों के लिए अपूरणीय क्षति होगी|

नोट:- पाक सेना को उसी की भाषा में जबाब देने के तरीके का यह मेरा निजी विचार है जरुरी नहीं आप मेरे विचार से सहमत हों|
जहाँ तक पाक सैन्य अधिकारियों को इस तरह की साफ़ चेतावनी देने की बात है ऐसे उदाहरण मैंने बचपन से आजतक कई पूर्व सैनिकों के अनुभवों में सुने है| पूर्व कुछ सैनिकों के अनुसार -“कि जब उनकी बटालियन पाक सीमा पर थी तब कभी उनके ऊपर पाक ने गोलीबारी करने की हिम्मत नहीं की कारण साफ़ था कि उनके अधिकारियों ने पहली ही फ्लैग मीटिंग पाक अधिकारियों को धमका दिया कि उनके एक सैनिक की जान गई तो समझना तुम्हारे दस सैनिक जान से हाथ धो बैठेंगे|

10 Responses to "पाक सेना को उसी की भाषा में देना होगा जबाब"

  1. सुन्दर प्रस्तुति!

    मकरसंक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  2. Padm Singh   January 14, 2013 at 3:25 pm

    जो कोई तुमको कांटा बोवे ताहि बोव तू भाला…
    वो भी साला क्या समझेगा पड़ा किसी से पाला…

    हम अपमान का बदला ले कर रहेंगे…

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  3. Jitender S Shekhawat   January 14, 2013 at 4:09 pm

    युद्ध में सब जायज़ होता है…पर फिर भी मैं सियासी कारणों से युद्ध के बिलकुल पक्ष में नहीं हूँ। क्योंकि जवान चाहे यहाँ के हो या वहां के, घर-परिवार तो दोनों तरफ ही बर्बाद होते हैं।नेता पाकिस्तान के हो या अपने यहाँ के, किसी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। हमे यह नहीं भूलना चाहिए की पाकिस्तान की आवाम अधिकतर वही सब समस्याएं झेल रहे है जो मैं या आप यहाँ झेल रहे हैं। ISI , तालिबान और कठमुल्लों की साजिशों और आतंक के सामने वह कुछ करने में असमर्थ हैं। पर फिर भी जिस दिन पकिस्तान के गलियारों से युद्ध की डिमांड खड़ी हो जाये तो इस बार हिन्दुस्तान के वीरों को साक्षात् ताण्डव मचाना पड़ेगा चाहे उसके लिए कितने भी बड़े बलिदान देने पड़ें–पकिस्तान की सभ्यता या सही मायनो में असभ्यता का नमो -निशान मिटाना पड़ेगा।

    मेरे पिताजी ने 13 वर्ष के उम्र में अपने पिताजी (मेरे दादाजी ) के 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीरगति प्राप्त होने के पश्चात काफी संघर्ष कर अपने आप को व परिवार को संभाला …हालिया ख़बरों से व सरकार के ढुलमुल रवैये से उनका पारा बहुत चढ़ जाता है , क्योंकि उनसे बेहतर युद्ध के परिणाम हम लोग नहीं जानते .

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  4. प्रवीण पाण्डेय   January 14, 2013 at 4:19 pm

    शठे शाठ्यम् समाचरेत..

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (16-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  6. रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)   January 14, 2013 at 5:34 pm

    प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को [email protected] पर मेल करें।

    Reply
  7. रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)   January 14, 2013 at 5:37 pm

    प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को [email protected] पर मेल करें।

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  8. जैसे को तैसा,,उन्ही की भाषा में जबाब देना होगा,,,

    recent post: मातृभूमि,

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  9. ताऊ रामपुरिया   January 15, 2013 at 10:08 am

    जाडे में जमा हुआ घी सीधी अंगुली से नही निकलता.

    रामराम.

    Reply
  10. Pallavi saxena   January 15, 2013 at 5:33 pm

    वो कहते है न "लातों के भूत बातों से नहीं मानते"

    Reply

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