?

?

तपता सूरज है ,उबलता सागर है ,
फिर रोता बादल क्यों ?…….

चाँद को चाहत चांदनी से है ,
फिर जागे चकोर क्यों ?……

कान्हा के हृदय बसी राधा ,मंदिर में संग राधा के ,
खुद कृष्ण से राधेकृष्ण हो गए ,
फिर महलों में वामांगी रुकमण क्यों ?………..

राम भी थे अकेले बिन संग सीता के ,
खुद अन्तर्यामी जगदीश है ,
फिर सीता की अग्निपरिक्षा क्यों ?……………

आभुषणो और रेशमी वस्त्रों से परिपूर्ण नारी को ,
अपने होठों पे हलकी मुस्कुराहट लाने में इतनी तकलीफ क्यों ?………..

माँ के पेट पर पड़ गई थी वो आड़ी तिरछी लकीरे मेरा सृजन करने में ,
बाबा के पक गए थे बाल मेरा पालन करने में,
जिस संग सात फेरे लिए उसका मुझ पे इतना अधिकार क्यों ?……..

हर हाल में रक्षा होगी मेरी, इस विश्वाश के साथ चुना था श्रेष्ठ धनुर्धर ,
फिर द्रोपदी का चीरहरण क्यों ?………..

इन सब से मेरा कोई रिश्ता नहीं ,
फिर मेरे मन में उमड़ता सवालो का ये सेलाब क्यों ?……….

16 Responses to "?"

  1. sunshine   September 2, 2010 at 11:53 am

    lajwab hai sawal aapke…..
    kash ki inke uttar bhi hote kahi….

    Reply
  2. Rajul shekhawat   September 2, 2010 at 1:01 pm

    hamesha ki tarah aaj bhi boht khoob……:)

    कान्हा के हृदय बसी राधा ,मंदिर में संग राधा के ,
    खुद कृष्ण से राधेकृष्ण हो गए ,
    फिर महलों में वामांगी रुकमण क्यों ?………..

    really nice………

    Reply
  3. Mayank Bhardwaj   September 2, 2010 at 1:52 pm

    आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

    Reply
  4. ताऊ रामपुरिया   September 2, 2010 at 1:55 pm

    राधे राधे….जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

    Reply
  5. Kailash C Sharma   September 2, 2010 at 3:15 pm

    bahut sundar kavita jo man ko udvelit kar deti hai. Jo prashn uthaye gaye hain unka jawab shayad aaj ke samaj ke paas bhi nahin hai. Badhai..
    http://sharmakailashc.blogspot.com/

    Reply
  6. Ratan Singh Shekhawat   September 2, 2010 at 3:18 pm

    बहुत बढिया !
    आपके सवालों के सैलाब का तो कोई जबाब ही नही सूझ रहा !

    Reply
  7. राज भाटिय़ा   September 2, 2010 at 3:46 pm

    बहुत ही सुंदर जी, आप के सवालो का जबाब तो मुश्किल नही लेकिन हम नही दे सकते, जरुर कोई दुसरा सही जबाब दे देगा, धन्यवाद

    Reply
  8. प्रवीण पाण्डेय   September 2, 2010 at 4:06 pm

    बड़े मौलिक प्रश्न पूछे हैं। दार्शनिक कविता।

    Reply
  9. Tany   September 2, 2010 at 6:28 pm

    जिस खुदा की रोशनी से रोशन है दुनिया,करता रहा उसकी इबादत मै आंखे मूंदकर,कभी देखा नही रोते हंसते मैने उसको,उसके बन्दो को ही देखा मैने रोते अक्सर,कोई मांगता है उससे धन दौलत कोई मांगे प्यार,किसी से छीना उसने,किसी को दिया जी भरकर."तरुण" ने भी की है दुआ आपके लिये, दे दे हर खुशी और प्यार आपको झोली भरकर.हर बार की तरह बहुत खूब लिखा है आपने फिर से बहुत ही बढ़िया फोटो रखी है.जैसे की हमेशा कहा जाता है की सबकी किस्मत या भाग्य रेखा भगवान लिखते हैं वैसे इन सबकी लिखी होगी तभी ये सब इस से गुजर रहे हैं.कुछ सवाल इन में ऐसे हैं जो समझ ने बनाये है पर उनके पास भी इसका जवाब नहीं और कुछ सवाल ऐसे है जिनका जवाब स्वयम भगवान के पास नहीं.आज के इस कलयुग में मानव जिसे भगवान की सबसे सुंदर रचना कहा जाता है उसकी हालत देख कर वोह खुद हेरान और परेशान है.

    Reply
  10. नरेश सिह राठौड़   September 3, 2010 at 7:28 am

    सवाल पूछने की कोइ उम्र नहीं होती है आपकी कविताओ को देख कर तो यही लगता है| लेकिन जवाब कौन दे …?

    Reply
  11. डॉ. मोनिका शर्मा   September 7, 2010 at 12:47 am

    sateek sawak aur suder rachana…. badhai aur abhar sweekaren

    Reply
  12. Supergrowth   September 7, 2010 at 1:57 pm

    Usha ji, You are improving day by day. Superb

    Reply
  13. Pagdandi   September 7, 2010 at 5:37 pm

    aap sab ka bhut bhut aabhar ……

    Reply
  14. Rambabu Singh   September 14, 2010 at 4:39 pm

    wow ?

    Reply
  15. SULTAN RATHORE " JASRASAR"   March 1, 2011 at 7:58 am

    आप के सवाल तो मन में उथल पुथल मचा गए
    बहुत ही उच्च कोटि के रचना ह आपकी

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.