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तपता सूरज है ,उबलता सागर है ,
फिर रोता बादल क्यों ?…….

चाँद को चाहत चांदनी से है ,
फिर जागे चकोर क्यों ?……

कान्हा के हृदय बसी राधा ,मंदिर में संग राधा के ,
खुद कृष्ण से राधेकृष्ण हो गए ,
फिर महलों में वामांगी रुकमण क्यों ?………..

राम भी थे अकेले बिन संग सीता के ,
खुद अन्तर्यामी जगदीश है ,
फिर सीता की अग्निपरिक्षा क्यों ?……………

आभुषणो और रेशमी वस्त्रों से परिपूर्ण नारी को ,
अपने होठों पे हलकी मुस्कुराहट लाने में इतनी तकलीफ क्यों ?………..

माँ के पेट पर पड़ गई थी वो आड़ी तिरछी लकीरे मेरा सृजन करने में ,
बाबा के पक गए थे बाल मेरा पालन करने में,
जिस संग सात फेरे लिए उसका मुझ पे इतना अधिकार क्यों ?……..

हर हाल में रक्षा होगी मेरी, इस विश्वाश के साथ चुना था श्रेष्ठ धनुर्धर ,
फिर द्रोपदी का चीरहरण क्यों ?………..

इन सब से मेरा कोई रिश्ता नहीं ,
फिर मेरे मन में उमड़ता सवालो का ये सेलाब क्यों ?……….

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