एकता के थूककर चाटने के बाद अब बालाजी टेलीफिल्मस की नई चाल

बालाजी टेलीफिल्मस द्वारा निर्मित जी टीवी पर चल रहे धारावाहिक जोधा अकबर के प्रदर्शन से पूर्व प्रोमो देख राजपुताना संघ के अध्यक्ष भंवर सिंह रेटा ने IBFआई.बी.एफ के अधिकारियों को सीरियल में इतिहास व राजपूत संस्कृति के साथ छेड़छाड़ के खिलाफ शिकायत की व उनके आव्हान पर राजपूत युवाओं ने आई.बी.एफ में हजारों शिकायती मेल भेजे| उधर जयपुर में करणी सेना जो पूर्व में भी अरुण गोवरिकर की फिल्म जोधा अकबर का राजस्थान में आजतक प्रदर्शन रोकने में सफल रही, इस सीरियल के खिलाफ ताल ठोक रही थी|
तमाम शिकायतें मिलने के बाद आई.बी.एफ के अधिकारियों ने जी टीवी के साथ राजपूत संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की जिसमें करणी सेना संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने सीरियल में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ पर प्रकाश डालते हुये, जोधा अकबर से सम्बंधित ऐतिहासिक तथ्य उपलब्ध कराये जिनमें कही नहीं लिखा था कि जोधा नाम की कोई अकबर की पत्नी थी|

सीरियल शुरू होने के एक दिन पहले बालाजी टेलीफिल्मस व जी टीवी प्रबंधन टीम ने एक बार फिर गुडगाँव के ओबेराय होटल में एक बैठक आयोजित की, जिसमें बालाजी टेलीफिल्मस के अभिनेता जितेन्द्र ने राजपूत प्रतिनिधियों द्वारा रखे गये ऐतिहासिक तथ्यों से सहमती जताने के बावजूद सीरियल बंद करने में असहमति जताई| इन दोनों बैठकों में जी टीवी ने अपने आपको सीरियल की कहानी व मालिकाना हक़ से अपने आपको दूर बताया और बालाजी टेलीफिल्मस की टीम ने भी इसका विरोध नहीं किया कि वे सीरियल के मालिक नहीं है| उस वक्त बालाजी टेलीफिल्मस जो धारावाहिक निर्माण क्षेत्र में एक बहुत बड़ी हस्ती है देशी भाषा में कहूँ तो सीरियल निर्माण के मामले में बालाजी किसी माफिया से कम नहीं, को घमंड था कि राजपूत समाज उनका बिगाड़ लेगा ? और समाज द्वारा लाख समझाने की कोशिश के बावजूद बालाजी ने हठधर्मितापूर्वक धारावाहिक का निर्माण जारी रखा जिसमें इतिहास को गलत ढंग से पेश कर राजपूतों की प्रतिष्ठा के साथ नंगा नाच किया गया|

इस बीच इस सीरियल के खिलाफ देशभर के राजपूत युवा सड़कों पर संघर्ष करते रहे, लाठियां खाते रहे पर निरंकुश बालाजी टेलीफिल्मस के मानस पटल पर कोई असर नहीं हुआ बल्कि वे उल्टा खुश हुए कि विरोध से उनके सीरियल की तीआरपी बढ़ रही है|

लेकिन “ऊंट कभी तो पहाड़ के नीचे आता है” कहावत के अनुसार बालाजी रूपी ऊंट उस वक्त राजपूत समाज रूपी पहाड़ के नीचे आ गया जब उसे अपनी एक फिल्म रिलीज करनी थी और रिलीज के एक दिन पहले करणी सेना ने राजस्थान में फिल्म का प्रदर्शन रुकवा दिया| तब एकता कपूर अपने बाप जितेन्द्र, माँ शोभा आदि को लेकर राजपूत समाज से वार्ता करने जयपुर आने को मजबूर हुई| जहाँ मीडिया के सामने जिन्दगी में किसी के आगे ना झकने वाली एकता कपूर ने राजपूत समाज के आगे घुटने टेकते हुए माफ़ी मांगी और करणी सेना की सभी मांगे मानते हुये सीरियल निर्माण से हटने का वादा किया| उस दिन पहली बार बालाजी ने माना कि सीरियल के मालिक जी टीवी वाले है हम नहीं|

खैर…समाज से मीडिया के कैमरों के आगे सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने के बाद जब करणी सेना ने बालाजी की फिल्म का प्रदर्शन होने दिया और फिल्म प्रदर्शित हो गई तब एकता कपूर अपने वादे से मुकर गई| इस तरह एकता कपूर ने साबित कर दिया कि धन कमाने के मामले में वह किसी भी स्तर तक गिर सकती है, उसके लिए उसकी जबान की कोई कीमत नहीं|

एकता कपूर के मुकरने के बाद सबसे ज्यादा करणी सेना व लोकेन्द्र सिंह कालवी की प्रतिष्ठा को आघात लगा| राजपूत समाज के युवाओं ने सोशियल साइट्स पर करणी सेना व कालवी पर बालाजी से धन लेने का आरोप तक लगाया| लेकिन करणी सेना चुप रही और एकता कपूर की आने वाली किसी फिल्म का इन्तजार करने लगी| अब एकता कपूर की आगामी कुछ दिनों में पांच फ़िल्में आने वाली है और वह समझ चुकी है कि करणी सेना उससे पूरा बदला लेगी| फ़िल्में नहीं चलने से बालाजी को तगड़ा आर्थिक नुकसान होगा और सब जानते है कि फ़िल्मी लोग धन को ही सबसे बड़ा समझते है|

अत: आने वाली फिल्मों में राजपूत समाज द्वारा आर्थिक नुकसान पहुँचाने की आशंका के चलते एकता कपूर एंड कम्पनी ने फिर एक नई चाल चली| 7 फरवरी को इस बार बालाजी टेलीफिल्मस की और से एकता कपूर के मामा रमेश सिप्पी वार्ता करने जयपुर आये, और राजपूत समाज को आश्वस्त किया कि वे 14 फरवरी के बाद जोधा अकबर सीरियल निर्माण से हट जायेंगे, इसके बाद सीरियल चलता है तो राजपूत समाज, जी टीवी व उसका वर्तमान निर्माता जाने| इस तरह बालाजी टेलीफिल्मस ने अपना वह आर्थिक नुकसान बचाने के लिए जिसके लिए वे कितना भी गिर सकते है के लिए एक नया दाँव खेला|

लेकिन बालाजी टेलीफिल्मस भूल गया कि ऐसे खेलों से आज किसी को मुर्ख नहीं बनाया जा सकता| सब जानते है कि व्यापारी वर्ग एक नहीं अनेक कम्पनियां बनाकर व्यवसाय करते है, आज सीरियल के निर्माता के तौर पर जिस किसी और का नाम आ रहा है हो सकता है वह बालाजी टेलीफिल्मस के मालिकों की ही कोई छद्म नाम वाली कम्पनी हो| और बालाजी टेलीफिल्मस सीरियल बना छद्म नाम से चला रहो हो|
हर कोई जानता है कि एक सीरियल बनाने से पहले कितनी तैयारियां करनी पड़ती है पर यदि जोधा अकबर सीरियल मामले में देखें तो पायेंगे कि 14 फरवरी को बालाजी टेलीफिल्मस निर्माण से हट रही है और दूसरा निर्माता बिना किसी बाधा के या एक भी दिन सीरियल रुके, उन्हीं कलाकारों को लेकर सीरियल की कड़ियाँ बना प्रदर्शित करवा रहा है| यह कैसे संभव हो सकता है ? साफ़ जाहिर है अपनी फ़िल्में में अड़चन रोकने के लिए बालाजी टेलीफिल्मस ने निर्माण से अपना नाम हटा फिर एक नया खेल खेलने की तैयारी की है पर उसे समझना चाहिये कि इस बार राजपूत समाज के युवा उनके झांसे में नहीं आने वाले|

पिछले दिनों कई संगठनों की बैठकों व कार्यकर्ताओं से मिलने पर मेरे सामने सबका एक विचार आया कि- इस बार बालाजी से बिना कोई वार्ता किये, उसकी फ़िल्में रोक उसे आर्थिक चोट पहुंचाई जाय| ये आर्थिक नुकसान का डर ही इन फ़िल्मी भांडों को भारतीय संस्कृति व इतिहास से छेड़छाड़ करने को रोक सकता है फिर एकता कपूर तो अपने सीरियलों में भारतीय संस्कृति के साथ छेड़छाड़ के लिए कुख्यात है|

यही नहीं बालाजी टेलीफिल्मस की और से आजकल आने वाले ईमेल संदेशों की भाषा का शातिराना अंदाज देखिये कि – पिछले दिनों जयपुर में रमेश सिप्पी द्वारा सीरियल निर्माण से हटने की बात कहने के बाद वे मान बैठे है कि उनकी यह बात मान राजपूत युवा उनकी फ़िल्में चलने देंगे| और अब नाम हटा कर ऐसे प्रदर्शित कर रहे है जैसे कोई व्यक्ति अंगुली पर कट लगवाने से निकला खून दिखा कर शहादत का दावा करे| दुबारा फंसने पर तकनीकि तौर पर अपना हटा बालाजी वाले लिखते है हमने अपना वादा निभा उच्च मूल्य स्थापित किये है और अब राजपूत युवा उनकी फ़िल्में रोकने की धमकी देकर उन्हें हरेश कर रहे है| बालाजी वालों को खुद के हरेस्मेंट होने की इतनी चिंता है जबकि उन्होंने राजपूत इतिहास के साथ तोड़मरोड़ कर समाज की प्रतिष्ठा को जो आघात लगाया उनकी लिए वे रत्तीभर भी नहीं सोचते| यदि सोचते तो समझ आने के बाद तुरंत सीरियल रोक देते या उसकी कहानी को सही इतिहास के अनुरूप बदल लेते| पर जैसा कि एक बैठक में खुद जितेन्द्र ने बातों बातों में कहा- कि जो सबसे ज्यादा बुरा होता है वही बिकता है जैसे अफीम, हैरोइन आदि बहुत बुरी होती है पर बिना प्रचार के बिकती है| शायद ऐसी ही मानसिकता के चलते ये लोग भारतीय संस्कृति व इतिहास से छेड़छाड़ कर सीरियल बनाते है ताकि विवाद हो और उसकी टीआरपी बढे|
लेकिन इस बार का माहौल देखते हुए लगता है कि- उग्र राजपूत युवा सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि गुजरात, हरियाणा, उतरप्रदेश और दिल्ली में भी बालाजी टेलीफिल्मस की फ़िल्में के प्रदर्शन में रूकावट डाल बालाजी को तगड़ा आर्थिक नुकसान पहुँचायेंगे| दिल्ली में पिछले कई दिनों से राजपूत युवा संगठित हो कालवी से फिल्म रुकवाने के गुर सीख सिनेमाघरों व डिस्टीब्यूटरस को खून से पत्र लिखकर बालाजी की किसी भी फिल्म का प्रदर्शन रोकने का अनुरोध कर रहे है|

देखते है अपने सीरियलों के माध्यम से भारतीय संस्कृति पर चोट करने के लिए कुख्यात और फ़िल्मी दुनियां में किसी के आगे ना झुकने के लिए मशहूर एकता कपूर दुबारा राजपूत युवाओं के आगे सिर झुकाती है या नहीं !! जो भी हो पर इस बार यह तय है कि एकता कपूर को पूर्व में अपने किये का खामियाजा भुगतना पड़ेगा ही| चाहे वो आर्थिक नुकसान व रातों की नींद हराम करके हो या कुछ और !!

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