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Thursday, October 6, 2022

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भाटी राजवंश की कुलदेवी स्वांगियां माता

स्वांगियां माता : राजस्थान के जनमानस में आस्था की प्रतीक लोकदेवियों, कुलदेवियों के उद्भवसूत्र पर यदि दृष्टि डाली जाये तो हम पायेंगे कि शक्ति की प्रतीक बहुत सी प्रसिद्ध देवियों का जन्म चारणकुल में हुआ है। चारणकुल में जन्मी प्रसिद्ध देवियों में आवड़, स्वांगियां, करणी माता आदि प्रमुख है। विभिन्न राजवंशों की गौरवगाथाओं के साथ इन देवियों की अनेक चमत्कारिक घटनाएँ इतिहास के पन्नों पर दर्ज है। वीर विनोद के लेखक श्यामलदास ने चारणों की उत्पत्ति देव सर्ग में बतलाते हुये उनकी गणना देवताओं में की है। इसके लिए उन्होंने श्रीमद्भागवत का संदर्भ दिया है। चारणकुल में जन्मी इन देवियों ने अपने जीवनकाल में ही प्रत्यक्ष चमत्कारों के बलबूते राजस्थान के आम जन मानस को नहीं, तत्कालीन शासकों को भी प्रभावित किया है। यही कारण है कि इन देवियाँ को इनके जीवनकाल में ही जहाँ आम जनता ने ईष्टदेवी के रूप में मान्यता दी, वहीं शासकों ने इन्हें अपने कुल की देवी के रूप में स्वीकार किया। राजस्थान के प्रत्येक राजवंश ने देवीशक्ति के महत्त्व को मानते हुए अपने राज्य की स्थापना को कुलदेवी का आशीर्वाद माना तथा विभिन्न युद्धों में विजयी होने और राज्य के चहुँमुखी विकास में सफल होने पर अपनी कुलदेवी में पूर्ण आस्था रखते हुए अनेकानेक भव्य मंदिरों का निर्माण कराया व उनकी पूजा अर्चना का पुख्ता प्रबंध करवाते हुए जन जन में देवी के प्रति आस्था की अलख जगाई।

उतर भड़ किंवाड़ के विरुद से विभूषित, शक्ति के उपासक राजस्थान में जैसलमेर के भाटी राजवंश ने चारणकुल में जन्मी देवी स्वांगियां को शक्ति का प्रतीक मानते हुए कुलदेवी के रूप में स्वीकार किया। स्वांगियां जिसे आवड़ माता के नाम से भी जाना जाता है, की भाटी राजवंश की गौरवगाथाओं के साथ अनेक चमत्कारी घटनाएँ जुड़ी है।

ऐसी मान्यता है कि देवी आवड़ के पूर्वज जो सउवा शाखा के चारण थे, सिंध के निवासी थे। उनका गौपालन के साथ घोड़ों व घी का व्यवसाय था। उसी परिवार का एक चेला नामक चारण मांड प्रदेश (वर्तमान जैसलमेर) के चेलक गांव में आकर बस गया। उसके वंश में मामड़िया नाम का एक चारण हुआ, जिसके जिसके घर सात कन्याओं ने जन्म लिया। लोकमान्यता के अनुसार मामड़िया चारण के संतान नहीं थी, सो संतान की चाहत में उसने संवत 808 में हिंगलाज की यात्रा की। तब हिंगलाज ने ही सात कन्याओं के रूप में उसके घर जन्म लिया। इन सातों कन्याओं में सबसे बड़ी कन्या का नाम आवड़ (aavad) रखा गया। मांड प्रदेश में अकाल के वक्त ये परिवार सिंध में जाकर हाकड़ा नदी के किनारे कुछ समय रहा। जहाँ इन बहनों ने सूत कातने का कार्य भी किया। इसलिए ये कल्याणी देवी कहलाई। फिर आवड़ देवी की पावन यात्रा और जनकल्याण की अद्भुत घटनाओं के साथ ही क्रमशः सात मंदिरों यथा काला डूंगरराय का मंदिर, भादरियाराय का मंदिर, तन्नोटराय का मंदिर, तेमड़ेराय का मंदिर, घंटीयाली राय का मंदिर, देगराय का मंदिर, गजरूप सागर देवालय का निर्माण हुआ और समग्र मांड प्रदेश में लोगों की आस्था उस देवी के प्रति बढती गई।(हुकुम सिंह भाटी, राजस्थान की कुलदेवियां, पृष्ठ-44)

सिंध से लौटने पर क्षेत्र के लोगों ने जिस गांव में देवी का अभिनन्दन किया उस गांव का नाम आइता रखा गया और देवी ने गांव के पास स्थित काले रंग की पहाड़ी जिसे स्थानीय भाषा में डूंगर कहा जाता है, पर आवास किया। जहाँ चमत्कारों की चर्चा सुनने के बाद लोद्रवा के परमार राजा जसभाण ने उपस्थित होकर देवी के दर्शन किये। बाद में ‘‘यहाँ संवत 1998 में महारावल जवाहरसिंह ने मंदिर का निर्माण कराया।(हुकुम सिंह भाटी, राजस्थान की कुलदेवियां, पृष्ठ-45) जैसलमेर से 25 किलोमीटर दूर काले रंग की पहाड़ी पर बने मंदिर को काला डूंगरराय मंदिर के नाम से जाना जाता है तथा डूंगर पर मंदिर होने के कारण स्थानीय लोगों में माता का नाम डूंगरेचियां भी प्रचलन में है।

डा.हुकम सिंह भाटी के अनुसार बहादरिया भाटी के अनुरोध पर देवी आवड़ अपनी बहनों के साथ आकर एक टीले पर रुकी। जहाँ राव तणु भाटी ने पहुँच कर दर्शन किये और लकड़ी के बने हुए आसन (सहंगे) पर देवी को विराजमान किया गया। तीन बहनों को दाई ओर तथा तीन को बाईं तरफ खड़ा किया और अपने हाथ से चंवर ढुलाए। तब आवड़ जी ने आशीर्वाद देते हुए कहा-‘‘मांड प्रदेश में तुम्हारे वंशजों की स्थायी राजधानी स्थापित होगी और वहां पर तुम्हारा राज्य अचल होगा।’’ सहंगे पर बैठने के कारण आवड़ जी स्वांगियां कहलाई।

 इस प्रकार राव तणु भाटी के बाद भाटी राजवंश ने देवी आवड़ जी को स्वांगियां माता के नाम से कुलदेवी के रूप में स्वीकार किया। बहादरिया भाटी के अनुरोध पर देवी जिस टीले पर आई बाद में उस जगह का नाम भादरिया पड़ा। जो जैसलमेर के शासकों के साथ ही स्थानीय जनता की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। कहा जाता है कि संवत 1885 में बीकानेर और जैसलमेर की सेनाओं के मध्य युद्ध हुआ, जिसमें स्वांगियांजी के अदृश्य चक्रों से बीकानेर सेना के अनेक सैनिक मारे गये और बाकी भाग खड़े हुए। तब तत्कालीन महारावल ने भादरिया में भव्य मंदिर का निर्माण कराया। आज भी भाटी वंश के लोग अपनी इस कुलदेवी के प्रति पूर्ण आस्था रखते है तथा देवी के प्रतीक के रूप में त्रिशूल का अंकन कर धूप दीप, पूजा-अर्चना आदि के रूप में उपासना करते है।माता स्वांगियां का एक मंदिर भारत-पाक सीमा पर तन्नोट गांव में भी है। जैसलमेर से लगभग एक सौ तीस कि॰मी॰ की दूरी पर तनोट राय को हिंगलाज माँ का ही एक रूप माना जाता है। हिंगलाज माता जो वर्तमान में बलूचिस्तान जो पाकिस्तान में है, स्थापित है। भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने वि.सं. 828 में तनोट का मंदिर बनवाकर मूर्ति को स्थापित कि थी। भाटी तणुराव द्वारा निर्मित इस मंदिर में सैकड़ों वर्षों से अखण्ड ज्योति आज तक प्रज्वलित है। तणुराव भाटी द्वारा निर्मित होने के कारण इस मंदिर को तनुटिया तन्नोट मंदिर के नाम से जाना जाता है। 1965 ई. में हुए भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के पक्ष में देवी द्वारा दिखाये चमत्कार के बाद मंदिर की देखरेख, पूजा अर्चना का कार्य सीमा सुरक्षा बल के जवानों द्वारा सम्पादित किया जाता है। 1965 ई. में हुए भारत-पाक युद्ध में पाक सेना ने भारतीय क्षेत्र में शाहगढ़ तक आगे बढ़कर लगभग 150 किलोमीटर कब्जा कर तन्नोट को घेर बम वर्षा की। पर देवी की कृपा से 3000 पाकिस्तानी बमों में से एक भी नहीं फटा। जिससे क्षेत्र में कोई नुकसान नहीं नहीं हुआ। अकेले मंदिर को निशाना बनाकर करीब 450 गोले दागे गए। परंतु चमत्कारी रूप से एक भी गोला अपने निशाने पर नहीं लगा और मंदिर परिसर में गिरे गोलों में से एक भी नहीं फटा और मंदिर को खरोंच तक नहीं आई।

सैनिकों ने यह मानकर कि माता अपने साथ है, कम संख्या में होने के बावजूद पूरे आत्मविश्वास के साथ दुश्मन के हमलों का करारा जवाब दिया और उसके सैकड़ों सैनिकों को मार गिराया। दुश्मन सेना भागने को मजबूर हो गई। कहते हैं सैनिकों को माता ने स्वप्न में आकर कहा था कि जब तक तुम मेरे मंदिर के परिसर में हो मैं तुम्हारी रक्षा करूँगी।

इसी तरह माता के घंटियालीराय मंदिर में इसी युद्ध में पाक सैनिकों ने मूर्तियों को खंडित कर माता के कोपभाजन का शिकार बने। प्रतिमाओं को खंडित करने वाले पाक सैनिकों के मुंह से खून निकलने लगा और वे अपने शिविर में पहुँचने से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हुए। इस तरह की घटना के बाद भारतीय सेना के जवानों के साथ स्थानीय जनता में माता के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई।

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25 COMMENTS

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी… रतन सिंह जी मैं यह जानना चाहता हूँ की जो गूगल के Matched कंटेंट विज्ञापन हैं, इसमें आपकी वेबसाइट के पोस्ट के अलावा दुसरे कमर्शियल विज्ञापन भी शो होते हैं.. मेरी वेबसाइट पर सिर्फ मेरे ब्लॉग के पोस्ट ही दिखाई देते हैं..

    मैं यह जानना चाहता हूँ की Matched Content Ads में ब्लॉग पोस्ट के अलावा Earning कराने वाले विज्ञापन कैसे दिखाई देंगे..

    • आप Matched कंटेंट विज्ञापन कोड ही लगाईये, गूगल बाबा अपने आप मेहरबान होकर ऐसे विज्ञापन दिखाने लगेगा, पहले मेरे ब्लॉग पर भी सिर्फ ब्लॉग पोस्ट दिखती थी पर बाद में स्वत: ऐसा दिखने लगा|

  2. उत्तर देने के लिए धन्यवाद रतन सिंह जी.. मैं एक बात और जानना चाहता हूँ की मैंने आपकी वेबसाइट की अलेक्सा रैंक चेक किया तो मुझे बहुत ही निराशा हुयी… क्योंकि मैंने यह देखा की आपकी अलेक्सा रैंक दिन प्रतिदिन कम होती चली जा रही हैं… क्या इससे आपका ब्लॉग ट्रैफिक भी पहले से बहुत ज्यादा कम हो गया हैं, जैसे की अलेक्सा आपकी अलेक्सा रैंक पहले काफी अच्छी थी, लेकिन आज आपकी अलेक्सा रैंक दिन प्रतिदिन गिर रही हैं… क्या आपके ब्लॉग ट्रैफिक में पहले के मुकाबले ज्यादा कमी आई हैं? या फिर आपका ब्लॉग ट्रैफिक पहले के जितना हैं और अलेक्सा रैंक से इससे कोई मतलब नहीं हैं.

    कहने का मतलब यह हैं की क्या आपके ब्लॉग के ट्रैफिक में सचमुच में कमी आ गयी हैं? जैसा की अलेक्सा रैंकिंग से जाहिर होता हैं? या फिर यह अलेक्सा रैंकिंग सिर्फ एक झूठा आइना हैं?

    • अलेक्सा रैंकिंग सिर्फ एक झूठा आइना है !
      जब ब्लॉग पर 1000 पेज व्यू होते थे तब 2 लाख के आस-पास थी, आज चार से छ: गुना पेज व्यू है फिर भी अलेक्सा रैंक कम है|
      ब्लॉग ट्राफिक बढ़ा है, एडसेंस कमाई बढ़ी है पर सिर्फ अलेक्सा रैंक घटी है 🙂

  3. maa swangiya jagtjanani maa durga ka swaroop hai maa swangiya bhatinakh ki kul devi h. ye jaisalmer 7 behno mnhi hai.. maa swangiya ka aawhan shri krishan ne jarasandh namak rakshak k vadh k liye kiya tha.. maa k hatho m bhaala h bhaale ko swang bhi kehte h… sampuran jankari k liye ek baar maa swangiya k mandir gajroop sagar padhare.. gajroop sagar istith maa swangiya k mandir ki istapnaa sanwat 1917 mai raja ranjeet singh ne krwayi thi..

  4. I want to visit Kuldevi Mandir of Bhati Kul. Can pls email me detailed location of the temple in Jaisalmer and is this temple easily location and can old people over 80 visit temple ? How are the roads there

  5. Namaste Ratan Singhji. Main MALI Samaj se belong karta hu or meri gotra BHATI hain toh kya humare liye bhi TANOT MATA hi kuldevi honge because humhe abhi tak pata nhi chal paya h ki hamari asal Kuldevi konse hain. Please if you can help us in this regard.

    • यदि आप भाटी वंश से जुड़े हैं तो आपकी भी कुलदेवी स्वांगिया माता ही होगी |

  6. Sir mein PALI district se belong karta hu aur hamare yaha joh MALI samaj ke BHATI gotra ke log hain woh sab TANOT MATA MANDIR se JYOT la rahe hain. And Sir main jis village mein rehta hu waha bhi hamare KULDEVI ke mandir ka kaam chalu hain par MURTI kinki banvaye and AKHAND JYOT kinki laye usme confusion ho raha hain ussi kaaran se mandir ka aagey ka kaam ruka hua hain.

  7. Thank you so much for your reply Sir. But Sir mein Rajasthan ke PALI district se belong karta hu or yaha jahan bhi MALI samaj ke BHATI gotra ke logo ne apni KULDEVI ka MANDIR banvaya hain unhone TANOT MATA MANDIR se hi AKHAND JYOT layi hain or unhiki MURTI bhi sthapit ki hain. Mere apne gaon mein bhi KULDEVI ke mandir ka kaam kabse chalu ho chuka hain par issi confusion se mandir ka aagey ka kaam nhi ho pa rha hain ki MURTI kinki rakhhe TANOT MATA ki ya SWANGIYA MATA ki please guide us Sir.

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