Home Rajput Nariyan बाला सती रूपकंवरजी : जो 43 वर्ष बिना अन्न जल के रहीं

बाला सती रूपकंवरजी : जो 43 वर्ष बिना अन्न जल के रहीं

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बाला सती रूपकंवरजी

राजस्थान की जोधपुर जिले की बिलाड़ा तहसील में एक छोटा सा गांव है रावणियां | अब इस गांव का नाम गांव की प्रख्यात सुपुत्री बाला सती रूपकंवरजी के सम्मान में रूप नगर रख दिया गया | विभिन्न जातियों व समुदायियों के निवासियों वाला यह गांव कभी जोधपुर राज्य के अधीन खालसा गांव था | इसी गांव में श्री लालसिंह जी की धर्मपत्नी जड़ावकँवर की कोख से 16.08.1903 को एक बालिका का जन्म हुआ यह उनकी दूसरी पुत्री थी | बालिका के सुन्दर मुखमंडल को देख नाम रखा गया रूपकंवर | सोमवार कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंगलमयी वेला में जन्मी रूपकंवर की जन्म कुंडली देखकर गांव के ज्योतिषियों ने परिजनों को पहले ही बता था कि बालिका आगे चलकर अध्यात्मिक प्रकाश पुंज के रूप में प्रतिष्ठित होगी | जिसकी झलक उनके बचपन में ही दिखने लगी वे अपने बाबोसा (पिता के बड़े भाई) श्री चन्द्रसिंह जी जो धार्मिक प्रवृति के थे के साथ पूजा पाठ में ज्यादा समय व्यतीत करने लगी |

बाला सती रूपकंवरजी की बड़ी बहन सायरकँवर का विवाह बाला गांव निवासी जुझारसिंह जो जोधपुर महाराजा की जोधपुर लांसर्स के रसाले में घुड़सवार थे के साथ हुई थी जिसका प्लेग रोग के चलते देहांत हो गया था | तदुपरांत परिजनों ने रूपकंवर का जुझारसिंह के साथ विवाह करने का निश्चय किया गया | और 10.05.1919 को रूपकंवर का विवाह जुझारसिंह के साथ कर दिया गया पर विवाह के पंद्रह दिनों बाद ही 25.05.1919 को बहुत तेज ज्वर के चलते जुझारसिंह जी का आकस्मिक निधन हो गया और रूपकंवर बाल विधवा हो गई | पर इस शोकजन्य घटना के उपरांत भी रूपकंवर पर इस दुखान्तिका का शून्य प्रभाव ही रहा वे इस घटना को स्वयं की क्षति या शोक नहीं मानकर केवल असम्बन्ध साक्षी की तरह ही देखती रही बाद के वर्षों में उन्होंने अपने व्यवहार व भावनाओं को इस तरह उद्दृत किया कि – जिस व्यक्ति का मैंने ठीक ढंग से चेहरा ही नहीं देखा उसके लिए दुख कैसे होता |

बाल विधवा होने के पश्चात् बाला सती रूपकंवरजी जालिम सिंह के पुत्र मानसिंह से विशेष स्नेह रखती थी , मानसिंह की माता का भी कम उम्र में ही निधन हो गया था सो उसका लालन पालन रूपकँवर ने ही अपने पुत्र की भांति ही किया था और वे उन दोनों में माता व पुत्र का प्रगाढ़ सम्बन्ध बन गया था | पर 34 वर्ष की आयु में मानसिंह का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया और उन्होंने भी अपनी देह त्याग दी | इस बार रूपकंवर को अत्यधिक आघात लगा और उदासीन भाव लिए बिना रोये धोये बैठी रही | मानसिंह के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थी कि रूपकंवर जी ने अचानक घुंघुट उतार फैंका , उनके शरीर में कम्पन हो रहा था और चेहरे पर अचानक औजस चमकाने लगा और मुखमंडल पर गहरी शांति व दिव्य कांती नजर आने लगी | और उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि -“म्हारो टाबर एकलौ जावै है,महूँ भी साथै जावूंला | म्हने चिता माथै साथ बैठबा दो | अग्नि आप सूं आप परगट हो जावै ला | जे नीं हुई तो महूँ पाछी घरे जाऊं परी |” कि मेरा पुत्र अकेला जा रहा है मैं भी इसके जावुंगी मुझे उसकी चिता पर बैठने दो | अग्नि अपने आप प्रकट हो जाएगी यदि नहीं हुई मैं अपने आप वापस घर चली जाउंगी |

गांव वालों ने उनके इस प्रकार सती होने के संकल्प को रोकने की कोशिश की पर सभी विफल रही तभी रास्ते में उन्हें रोकते हुए एक शराब पिए व्यक्ति का उनसे स्पर्श हो गया और उनकी सतीत्व भावना जाती रही और उन्होंने अपने घर आकर आँगन में सती होने एक और प्रयास किया पर उनका प्रयास रोक दिया गया | और उसके बाद उन्होंने अन्न जल का त्याग कर दिया |

15 फरवरी 1943 के बाद रूपकंवर ने अन्न जल ग्रहण नहीं किया,परिजनों के अत्यधिक आग्रह पर उन्होंने दो ग्रास निगलने की कोशिश की पर उसे भी उन्होंने तुरंत ही वमन कर बाहर कर दिया | इसका अंतिम परिणाम यह हुआ कि जिस दिन से बाला सती रूपकंवरजी में सत जागृत हुआ उस दिन से लेकर अपने शेष सम्पूर्ण जीवन-काल के लिए अंत तक उनका सदा के लिए खान-पान छुट गया | और उनके पास भक्तों का तांता रहने लगा लोग उन्हें बाला सती बापजी के नाम से संबोधित करने लगे | बापजी अपने भक्तों के दुखों व रोगों का भी निवारण लगी और एक दिन एक भक्त उनके पास आया जिसे केंसर था ,बापजी ने उसे रोग मुक्त करने हेतु उसका केंसर अपने ऊपर ले लिया और इस तरह खुद केंसर रोगी होकर 15.03.1986 को बापजी यह सांसारिक देह त्याग कर ब्रह्मलीन हो गयी |

आज हर वर्ष बिलाड़ा तहसील के बाला गांव में कार्तिक मास की पूर्णिमा को बाला सती रूपकंवरजी बापजी की समाधी पर विशाल मेला लगता है | जिसमे दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु उनकी समाधी पर मत्था टेकने आते है | उनके आश्रम जिसे बाला दामनवाड़ी आश्रम कहते है में आने वाले सभी भक्तो के लिए प्रसाद की व्यवस्था होती है | अपने जीवन काल में भी बापजी रूपकंवर ने उनसे मिलने आने वाले भक्तो को कभी बिना भोजन किए नहीं जाने दिया था |

उनके आश्रम का एक ट्रस्ट भी बना हुआ है जो आश्रम की व्यवस्था के साथ वहां बनी गौशाला का सञ्चालन भी करता है | इस गौशाला में सैकड़ों गायें है | बापजी खुद अपने जीवन काल में गौ सेवा करती रही थी |

सन्दर्भ: खम्माघणी मासिक पत्रिका

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23 COMMENTS

  1. shekhaavt ji khaamagni aadaab aapne sti ke mamle men mhtvpurn jankari di or iske baad sti prtha ko rokne ke liyen sati prthaa nirodhit qaanun bnaaya gya tha jo aaj bhi laagu he mhtvpurn jankari ke liyen bdhayi ho. akhtar khan akela kota rajsthan

  2. क्या इस तरह सती मैया का महिमा मंडन सही है ?
    नौटंकी प्रधान देश में लोगों को मेले का तो बहाना भर चाहिए !
    आप जैसा शिक्षित चैतन्य व्यक्ति भी …. ???

  3. @ prkash Govind ji
    इस लेख का मकसद लाखों लोगों के इस आस्था केंद्र की जानकारी व परिचय देना मात्र है कोई महिमामंडन नहीं |
    इस आस्था में शरीक होना आपके स्वविवेक पर निर्भर करता है |

  4. हमने भी इनके बारे में बहुत लोगो से सुन रखा है लेकिन वंहा जाने का मौक़ा नहीं मिला है |
    @ prkash Govind ji आस्था और अंधविश्वास में बहुत फरक होता है कुछ बुद्धिमान लोग इस को एक ही मानते है | मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आता है|

  5. @Prakash govin ji ,
    BALA SATI JI AKELI AUR SUN-SAN JAGAH PAR NAHI RAHATI THI,BALKI JAISE AAJ MELE BHARTE HAI VO UNKE JIVAN KAL ME BHI BHARATE THE AUR LOG VAHA KAI-KAI DIN RUKATE THE,,,RAHI BAAT AAPKE MAN ME UTHI ASHANKA ,TO SUNIYE JANAB MAI ABHI ABHI JIMNASTIK CWG T.V.PAR DEKH RAHA THA AUR ISE ASAMBHAV AUR JHOONTHA MANTA HU KYONKI MER LIYE AISA KARNA ASAMBHAV HAI,,,,,,,,,MANUSHYA SABSE BADI KAMI HAI VO JIS KARYA KI KALPANA SE BHI GHABRAJATA HAI,,USE VO ASAMBHAV NAJAR AATA HAI,,,,,,,,,,MANORANJAN KE LIYE KUCHH BHI KAREGA ,,,,,,,,,,KA PROGRAMME HUMSABKO ASAMBHAV LAGATA HAI LEKIN ,VO JABANJ USE SACH ME KARTE HAI,,,,,,,,,,,,,KARGIL SHAHEED MANGEJ SINGH RATHORE KI PATNI ,MANGEJ KANWAR BAISA NE 54 DIN TAK PANI BHI NAHI PIYA THA AUR AAPKA MIDEA UNHE GHERE RAHA,,,,,,,,AUR RAJRSHI MADHUSUDAN DASJI NE 12 VARSH TAK KEVAL 1 JAB DIN ME BAR HI PUNRVA MIX JAL PIYA HAI AUR ABHI JIVIT HAI,YEARS AGE HAI MILNA CHAHOGE ???????

  6. अच्छी जानकारी दी.

    या देवी सर्व भूतेषु सर्व रूपेण संस्थिता |
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||

    -नव-रात्रि पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं-
    arganikbhagyoday.blogspot.com
    arganikbhagyoday-jindagijindabad.blogspot.com

  7. Hukum aapka yeh article bahut accha laga, bapji ke ashram mein meri kai summer vacations gujari hai aur maine unhe bahut kareeb se dekha hai , infact mera jadula(first hair cutting ceremony)bhi babji ne hi kia tha. Wo dharmik aur divye the aur hum sab unhe ghar ke bade ki tarah maante hai. aaj bhi ghar mein koi shubh kaam unke naam ke bina nahi hota . Article ke liye bahut dhanyawaad.

  8. क्या कोई ऐसा उदाहरण किसी क्षत्रिय बंधू का भी है ,,
    क्या यह नियम क्षत्रियों पर भी लागू हैं जो विधुर होने की स्तिथि में तुरंत दुसरे विवाह के बारे में सोचने लगते हैं और अधिकाँश कर भी लेते हैं ,,,क्या वो विधुर रहते हुए जीवन नहीं काट सकते ..? क्यूं वो बीवी की चिता पर नहीं बैठ सकते ..?

  9. क्या कोई ऐसा उदाहरण किसी क्षत्रिय बंधू का भी है ,,
    क्या यह नियम क्षत्रियों पर भी लागू हैं जो विधुर होने की स्तिथि में तुरंत दुसरे विवाह के बारे में सोचने लगते हैं और अधिकाँश कर भी लेते हैं ,,,क्या वो विधुर रहते हुए जीवन नहीं काट सकते ..? क्यूं वो बीवी की चिता पर नहीं बैठ सकते ..?

  10. Dear Sir

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    Thanks and Regards
    Batuk Narayan Purohit
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