बड़गूजर बनाम राघव द्वंद्व

बड़गूजर बनाम राघव द्वंद्व

Badgujar or Raghav, True History of badgujar kshtriya in Hindi
वर्तमान में लगभग 30-35 वर्षों से बड़गूजरों का एक तथाकथित शिक्षित वर्ग अपने आपको ‘राघव कुल के रुप में प्रतिस्थापित करने की जटिल व्याधि से ग्रसित होता जा रहा है।
सूर्यवंशियों के किसी भी कुल के व्यक्ति द्वारा अपने आपको ‘राघव’ या ‘रघुवंशी’ कहना या लिखना अनुचित नहीं है, क्योंकि सभी सूर्यवंशी क्षत्रिय महाराज रघु के वंशधर होने के कारण रघुवंशी कहे जाते हैं। परन्तु उसके साथसाथ सबके अपने-अपने कुल भी हैं।
“पृथ्वीराज रासौ में मेवाड़पति रावल समरसिंह के लिए रघुवंशी शब्द का प्रयोग किया गया है :-

अति प्राकृम रावर सुमर, कूर्रेम नरसिंग जग्गि।
रघुवंशी अति क्रम गुर, कत्थ करन कलि लगि ।68।
(भाग-2, पृ. 574)

जबहि सेन चतुरंग, साहि अरि जंग आइ जुहि।
तबही राज रघुबंश, झुकित वर खड्ग अप्पगहि ।।69।
(भाग-2. पू. 575)

प्रतिहार हम्मीर के लिए भी रघुवंशी’ शब्द प्रयुक्त हुआ है :-
बर रघुवंश प्रधान, राज मंड्यौ विच्चारिय।
बोलि वीर हम्मीर, भेद जाने धर सारिय।
(भाग-2, पृ. 957, काँगड़ा युद्ध)

पजवन राय कछावा के लिए कूरम वंशी प्रयुक्त हुआ है:-
सोलंको सारंगा, राव कूरंम पञ्जूनं।।
लोहा लंगरिराव, खग्ग मग्गह दह गून ।
(भाग-4, पृ. 642)

उक्त विवरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि उक्त सभी विभिन्न कुलों के राजाओं के लिए ‘रघुवंशी’ के साथ-साथ उनके कुलों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में मात्र बड़गूजरों द्वारा अपने कुल के रूप में ‘राघव’ शब्द का प्रयोग करना, इतिहास को विकृत करने की कुचेष्टा ही होगी।

इसी प्रकार से मध्यप्रदेश के शाजापुर में डाडिया खेड़ी में राजौरा बड़गूजरों की जागीर रही है। यहाँ के बड़गूजर अपने-आपको ‘सीसोदिया’ कहते हैं।
उत्तरप्रदेश के बुलन्दशहर, गाजियाबाद, बदायूँ, मुरादाबाद, मेरठ आदि में बड़गूजर कुल की राजौरा खाँप के लोग बहुतायत में हैं। यहाँ के बड़गूजर भी अपने-आपको ‘राघव बतलाते हैं व राजौरा बतलाने से घबराते हैं। उनको यह भय है कि हमें कोई ‘नाई न समझने लग जाए क्योंकि उधर राजौरा नाई भी हैं।

मजे की बात देखिए कि बुलन्दशहर की शिकारपुर तहसील में राजौराओं के 27 गाँव हैं, जो जाट हो गए हैं, वे अपने-आपको राजौरा बड़े गर्व के साथ बतलाते हैं।

बड़गूजरों में व्याप्त होती जा रही इस विकृति के विषय में जब विचार किया तो ज्ञात हुआ कि यह कोई 35-40 वर्ष पुरानी ही है। जो कुछ तथाकथित शिक्षित लोगों ने प्रविष्ट करवा दी है। इसके पीछे दो कारणों का होना प्रतीत होता है।

प्रथम- ऐसे लोगों का अपने इतिहास से अनभिज्ञ होना।
दूसरा कारण है, ऐसे वर्ग का आत्मलघुत्व की हीन मनोवृति से ग्रसित होना। ‘बड़गूजर” शब्द में ‘गूजर” शब्द के समाहित होने से इस कुल का यह शिक्षित वर्ग, इस भय से कि हमें गूजर व अन्य समाज के लोग गुर्जरों के भाई-बन्धु न समझने लग जाएँ, अपने आपको बड़गूजर बतलाने व लिखवाने में घबराते हैं। यह इनकी हीन मनोवृत्ति का ही परिचायक है।

जब तक हमारा समाज अनपढ़ रहा, इस प्रकार की हीन प्रवृत्ति के लिए कोई स्थान नहीं था। जैसे ही शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ने लगी, इस प्रकार की बीमारियाँ भी समाज में प्रविष्ट होने लगी।

बड़गूजर कुल के जो लोग अपने-आपको सीसोदिया मानकर बैठे हैं, स्वयं तो अंधेरे में हैं ही, साथ-साथ अपने आने वाले वंशजों को भी अंधेरे में धकेलने का कार्य कर रहे हैं क्योंकि सीसोदिया खाँप का बड़गूजर कुल में कोई इतिहास नहीं मिलेगा व गुहिलोत कुल में डाडिया खेड़ी का इतिहास मिलने के कारण इन लोगों का इतिहास नष्ट हो जायेगा। तत्पश्चात् ये क्या बन जायेंगे, हमें पता नहीं।

उसी प्रकार से जो राजौरा बड़गूजर इस भय से कि उन्हें कोई नाई या हरिजन न मान लें, वे अपनी खाँप (राजौरा) का प्रयोग नहीं करते है तो यह निश्चित है कि खाँप छोड़ने से तो अवश्य ही आने वाले समय में वे नाई मान लिए जायेंगे और राजौरा नाई बड़गूजर राजपूत मान लिए जायेंगे क्योंकि सूनी पड़ी हुई वस्तु का कोई न कोई मालिक जरूर ही बन बैठता है।
पूर्व अध्याय में हमने स्पष्ट किया है कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर जब कोई क्षत्रिय राजा बसते थे तो वे अपने पूर्व स्थान का किसी न किसी रूप में जिक्र करते रहे हैं व अब भी होता है। इसके साथ-साथ उसी स्थान से अन्य जातियों के लोग भी उन राजाओं के साथ आवश्यक कार्यों को करवाने के लिए बसाये जाते थे। जैसे राजौरगढ़ से अन्यत्र जो बड़गूजर राजौरा बड़गूजर कहलाते हैं। उसी प्रकार से ब्राह्मण, नाई, कुम्हार, भी राजौरगढ़ से गए होंगे जो राजौरा ब्राह्मण, राजौरा नाई, राजौरा व राजौरा चमार हैं। ऐसे में मात्र बड़गूजरों का अपने खाँप से घबराना ही विचित्र व हास्यास्पद है, क्योंकि दूसरे समाज के लोग इस रोग से ग्रसित नहीं हैं, जो कि क्षत्रियों के सहायक रहे हैं।

नहीं यदि तरह से यह विकृति करण जारी रहा तो बड़गूजर कुल दो वर्गों में विभक्त हो जायेगा – एक राघव व दूसरा बड़गूजर। इनमें से कौनसा रहेगा व कौनसा अन्य समाजों में मिलेगा, यह उसकी काल व परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। लेकिन यह तो निश्चित है कि क्षात्रधर्म, इतिहास, सभ्यता व संस्कृति को तिलांजलि देने के बाद कोई भी व्यक्ति क्षत्रिय बना नहीं रह सकता है, फिर चाहे वह किसी समाज में मिल जाए। मैं इतना उच्च शिक्षित व्यक्ति तो नहीं हैं, लेकिन यह तो मुझे ज्ञात हो हो गया है कि ‘राघव कुल के नाम से किसी बड़वा की पोथी में, काव्यमहाकाव्य, बात-ख्यात, किसी गजेटियर में, विदेशी यात्रियों के यात्रा विवरण, किसी शिलालेख, ताम्रपत्र लेख, मन्दिर या बावड़ी के लेख आदि में कोई इतिहास उपलब्ध नहीं है। जहाँ रघुवंश या रघुवंशी शब्द का प्रयोग हुआ है, यह सभी सूर्यवंशियों के लिए प्रयुक्त हुआ है, मात्र बड़गूजरों के लिए नहीं हुआ है|

इसलिए हमें जो हम नहीं है, वह नहीं बनकर के, जो हम हैं, बने रहते हुए, अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित, पोषित चिरकालीन परम्परा को बनाये खते हुए और संवर्द्धित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए अग्रसर करना हमारा कर्तव्य है।

– महेंद्रसिंह तलवाना की पुस्तक “बड़गूजर राजवंश” से साभार (आयुवानसिंह स्मृति संस्थान द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक, राजपूत सभा भवन, जयपुर से प्राप्त की जा सकती है)

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15 Responses to "बड़गूजर बनाम राघव द्वंद्व"

  1. Anita   March 23, 2017 at 4:14 am

    इतिहास को तोड़ मरोड़ कर अपने हित में प्रस्तुत करना कभी भी हितकारी नहीं हो सकता..आपने सही कहा है जो हम नहीं है, वह नहीं बनकर के, जो हम हैं, बने रहते हुए, अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित, पोषित चिरकालीन परम्परा को बनाये खते हुए और संवर्द्धित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए अग्रसर करना हमारा कर्तव्य है।

    Reply
  2. prashant kumar Ray   January 19, 2018 at 8:44 am

    Ye sirf badjujaro ke sath hai kya ?
    Kyoki mai bhi badhujar rajpoot sakha ke hi hai.
    Locally hame (bihar up ke border) lohtamiya rajpoot kehte hai.
    Hamare me koi ray koi singh sir name lagate hain.

    Aur kuchh jankari ho to kripya karke bataw

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  3. Ram Avtar Raghav   July 7, 2018 at 10:09 pm

    Hame to koi problem nahi h.hum to badguzar h.or surname hamara Raghav h

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    • Ratan Singh Shekhawat   July 10, 2018 at 7:41 am

      प्रॉब्लम आज नहीं, आने वाले समय में होगी, जब आपकी पीढ़ी अपने आपको बडगुजर नहीं सिर्फ राघव मानेगी और राघव के नाम से आपका कहीं इतिहास नहीं मिलेगा, अत: आपको सरनेम भी बडगुजर ही लगाना चाहिए, यही बात समझाई गई है इस लेख में|

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    • rgv   December 11, 2018 at 6:04 pm

      right, but ye bi shi kh rhe ha.

      Reply
  4. prashant kumar   July 11, 2018 at 2:12 pm

    Badgujar jo badujjwal ka galat uchcharan hai

    Badujjwal ke pita ka nam raghavn hi tha.

    Badujjwal 4 bhai the

    1 badujjwal
    2 guhil(sisodiya)
    3 Rathore
    4 jhala

    Reply
  5. Manvendra singh chouhan   September 19, 2018 at 7:08 am

    Are rathore kaha guhil ka bhai tha…rathore…rashtrakut shakha se h..jinka samradh itihas h…rashtrakut dakshin bharat me faila hua tha ek shakha raj.me jodhpur aayi..

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  6. Lovekesh Kumar Raghav Bhondsi   November 9, 2018 at 2:56 pm

    Ratan Singh Shekhawat ji Rajpooton main jo problem pahle thi usi ka parsar aap kar rahe hai ….apne log hi apno ki jad khotte hai ……..Raghav Rajpoot Bhagwan Ram ke Vanshaj hai ….to kya …kisi ko problem hai …..aapko …..lagana hai lagao …….main apne aapko kunwar likhu…..thakur …likhu………rajpoot likhu…….badgujjar ……likhu……..ya raghuvanshi …..likhu……kamse kam aap to esa na bolo………or kom bahut hai ….es kaam ke liye ……….Raghav ya badgujjar likhne main kya dar hai kya nahi …..ye aap hum par chhod do …….aap apni sambhale …………rahi baat etihaas ki ….to jo ab tak na mita …wo aage bhi nahi mit payega …..ye main aap ko yakin dilata hu………..
    Lovekesh Kumar Raghav
    Bhondsi

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  7. Kushal Raghav   January 8, 2019 at 11:59 pm

    Mai ye book kaise prapat kar skta hu. .plz help me
    Contact no. 8151991415

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    • Ratan Singh Shekhawat   January 21, 2019 at 8:01 pm

      पुस्तक आयुवान सिंह स्मृति संस्थान जयपुर के किसी कार्यक्रम में मिलेगी

      Reply
  8. Sid   February 25, 2019 at 10:40 pm

    Raghav & Sikarwar both are Badujjwal / bargujjar Rajputs. Our Kuldevi is Ashawari Ma in Rajgarh Tehla Alwar District. Our Deity is Lord Rama. We have our presence in Alwar, Dausa, Jaipur Disctricts as Raghav & Sikarwar in Districts Udaipur & Chittorgarh. Elsewhere we have populations in Western UP, Bulandshahr Etawah, Gr Nodia, In Haryana in districts Gurgaon, Fatehabad. In bihar we are known as Lawtemia. So Ratan singh ji you are very right we must be known as Bargujjar Rajputs and our sub clan is Raghav or sikarwar. Just like you are knows as Kachawas & sub clans as Nathawat, Rajawat,Khangarots, Shekhawat, Naruka. Thanks Sir for info.

    Reply
  9. Sidd   February 25, 2019 at 10:44 pm

    Raghav & Sikarwar both are Badujjwal / bargujjar Rajputs. Our Kuldevi is Ashawari Ma in Rajgarh Tehla Alwar District. Our Deity is Lord Rama. We have our presence in Alwar, Dausa, Jaipur Disctricts as Raghav & Sikarwar in Districts Udaipur & Chittorgarh. Elsewhere we have populations in Western UP, Bulandshahr Etawah, Gr Nodia, In Haryana in districts Gurgaon, Fatehabad. In bihar we are known as Lawtemia. So Ratan singh ji you are very right we must be known as Bargujjar Rajputs and our sub clan is Raghav or sikarwar. Just like you are known as Kachawas & sub clans as Nathawat, Rajawat,Khangarots, Shekhawat, Naruka. Thanks Sir for info. In Dausa , Alwar we had areas controlled when Dule rai came with his attack and asked us to leave. Then many Bargujar rajputs settled in machidi, Talchidi and areas near Sohna , Tauru Gurgaon. Later from Tauru they formed villages like Bhondsi etc. Ones from Machidi came and got Thikana tehsing near Behror( Alwar) rajasthan which became a riyasat of Jaipur state. Now present day in Jaipur Bargujjar rajputs have Talchidi(Dausa), Tehsing(Alwar), Talwana(Dausa) in Jaipur state.

    Reply
  10. Niraj singh raghav   March 3, 2019 at 8:02 pm

    Pahli bath aap vivad paida na kare badhgujjar rajput ki history ko pata karni ho to cantact kare…hum raghav hai
    .8302507739

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  11. Rajputana shashi singh   April 12, 2019 at 4:03 pm

    Aap Rajputo me vivad kyu paida karna chahte hai mai bhi Lauhtamia hu aur Raghav hu hamara history hame samjhane ki jarurat nhi hai agar aapko kuchh janana hai to btao

    Reply
  12. सुरेन्द्र   April 24, 2019 at 8:53 am

    भगवान श्री राम ने अपने राज्य को अपने पुत्रों में बराबर हिस्सों में बाँट दिया था | इसके तहत लव को उतर कौशल का राज्य मिला था | जो आज के पंजाब के आसपास के क्षेत्र है |
    बाद में लव ने लाहौर की स्थापना की |
    उत्तर कौशल में लव ने 128 पीढियाँ तक शासन किया |
    लव की 129 वीं पीढियों में कनेक्सन हुये और ये गुजरात के वल्लभीपुर में राज्य स्थापित किये |
    कनकसेन के चार पुत्र थे |
    विरसेन, विरसेन, चन्द्रसेन और राघवसेन
    राघवसेन ने गुजरात के बड़नगर में अपना साम्राज्य स्थापित किया और ईनके वंशज बड़नगर का बड और गुजरात के गूजर शब्द मिलाकर बडगूजर कहलाये | बडगूजर राघव सेन का वंशज होने के कारण राघव भी कहलाते हैं |
    बडगूजर ( राघव) भगवान राम के पुत्र
    लव के वंशज हैं |
    लव की वंशावली आपको बीकानेर पुस्तकालय में मिल जायेगा |
    बडगूजर ( राघव) की शाखायें
    1- सिकरवार
    2- मुहाढ
    3- लोहतमिया
    4- तापडिया
    5- खडाड

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