बचन

बचन
म्हांरी नांव बचन है अर कौल नै बोल भी म्हनै कैवै है। म्हांरा पिरवार में म्हांरी सगळां सूं इधकौ आघमांन है। जठै कठैई आपसरी में बैर विरोध, खटपट, झगड़ौ, झांटी नै बोलीचाली व्है जावै तौ मैं बीच में पड़, बीच बचाव कर राड़ नै बुझा नै पाछौ मेळजोळ नै बोलचाल कर देवूं। ई खातर सारौ भाईपौ म्हंनै सिरै गिणै अर म्हंनै सै’ज में इज नी लोपणौ चावै। म्हांरी दादी रौ नांव बरणमाळ है अर म्हांरै बाप हौर बावन भाई है। म्हां सगळां रौ घर बावनी बाजै। इणी कारण कवियां आपरी घणी रचनावां रा नांव बावनी राखिया है। जियां सुजस-बावनी, उपदेस-बावनी, सीख-बावनी, सिवा-बावनी, बिलाप बावनी, बिड़द-बावनी, नीति-बावनी अर वीर-बावनी आद नांव आप सगळा सुणिया इज हुवौला। पण म्हां बावन भायां में बब्बा, चच्चा अर नन्ना तीना भायां में बाळपणा सूं ई घणौ हेत इखळास नै मेळमिळाप हौ। म्हैं निज मैं कणैई लड़िया झगड़िया कोनी। घणखराक साथ-साथ ही रैया। टाबरपणां में बिना समझ म्हांरां दूजा भायां में घणी बार खड़बड़ाट नै छुटबड़ हुव जावती, पण म्हैं तौ सदा नीर खीर री भांत तीन देह एक प्राण इज रह्या। दूजा भायां में राड़ौ धाड़ी व्ही जावतौ तौ वै कैवता म्हांनै बचन दे देवौ तौ म्हैं थांकौ बिसवास करां, नींतर तौ थांकौ कांई बिसवास। सौ, म्हैं घणी घणी बार अमेळ, अप्रीतौ भांग नै विसवास नै पाछौ जमाय देवता अर बीखरता घर नै ठौड़ री ठौड़ जमायौ राखता। इण कारण म्हांरी ‘देवचौ’ सरीखी गिणती रहती। अर अबखी वेळां में म्हांरी बरौबर मांग बणी रैवती। राजां रजवाड़ां री सींव नींव रा झोड़ नै जियां बीच में भाटौ, मकरबौ, खंभौ रोपनै मिटावै बियां इज म्हांरै पूगियां आपस में तनाजौ मिट जावतौ। म्हांरौ भरोसौ होतौ तौ अेक देस दूजा देस सूं आपसरी में सींव पर कांटा रा तार लगाय नै वैर रा कांटा नीं बिखेरता अर भाईपौ बणियौ रैवतौ। रूस, अमेरिका म्हंनै मानता तौ ठौड़ठौड़ घातकारी विणासकारी मिजाइलां लगावण री कठै जरूरत पड़ैही ?

अर म्हांरै सागै छळ-छंद रचौ अर धोखाधड़ी करै जणांस तौ चावै तीन तिलोकी नाथ विसणौजी इज क्यूं न हौ बावनियौ वणै इज। अपकीरत हुवै इज। देवराज री बहकावणी में आय नै विसंभर राजा बळ करनै कपट रचियौ तौ कांई लाडू ले लियौ। पौछड़ी का आप रौ डोळ नै रुतबौ इज तौ भंडायौ। राजा बळि आप रा गरु सुकराचारजजी रै नटतां-नटतां गबळकौ काढ़नै म्हनैं विसणौजी नै दै दियौ सौ आप सुणी इज है। इन्दर पद तौ आगौ रहियौ ऊंडौ नीचौ पाताळ में जावता कठैई वळी रा पांव टिकिया। जिकौ म्हनैं देवणै सूं पैली, मिनखां नै सौ बार सोचणौ चायिजै अर जे गैलसफा बण नै नी सोचौ जणांस तौ राजा दसरथ वाळी गति बणै। दसरथ विजै मद में गैळीज नै कैगई नै म्हंनै सूंप दियौ, पछै कांई हौ ? काळजा री कौर राम नै वन में जावणौ पड़ियौ अर दसरथ नै प्राण गमावणौ पड़ियौ। बैठौ ठालौ घर नै घर कुंडियौ बणाय दियौ। द्वापर में जुधथिर सतवादी बाजतौ। आज भी बाजै है, पण सिरी किसन रै चाळै लाग नै महाभारत में ‘नरौ वा कुंजरौ’ बोल नै आपरी सांच री पोल काढ़ दी। अर महाभारत में कुंता अर सिरी किसन राजा करण नै घणौ इज पोमायौ, लालच लोभ देय नै दुरजोधन सूं फांटणौ चायौ, पण करण लोह री लाठ ज्यूं म्हंारै पर अडिग रह्यौ कह्यौ- दुरजोधन नै बचन दियोड़ौ है, बचन नै कियां लोपीजै। बचन नै बाप तौ अेक इज हुवै है। पुराणा समै में मां तौ कई व्ही जावती पण बाप अेक इज रैवतौ। आज तौ मां री भांत बाप भी कई हौ जावै है। आप सुणी हैला कै परखण नळी में मिनख-सांडिया रौ बीज असपताळां में भेळौ करियोड़ौ राखै है। कांई ठा किण किण रौ भेळौ करियौड़ौ हुवै है। उण री सुई लगाय नै ढांढां री भांत इज मिनख जळमा देवै है। अेड़ा टाबरां रौ कांई पतौ किण-किण रा मूंत रा हुवै। अेड़ा लोग म्हंनै लोप जावै तौ अणूती बात कांई है। पण राजा करण पर लाख लांछण हुवौ बौ एक बाप रौ हौ सौ म्हनैं नी हारियौ अर धोखाबाज इन्दर नै जांणतौ पिछांणतौ भी आपरा कुंडळ देय दिया, पण म्हनै राख लियौ। औ इज कारण है कै आज प्रभात रा पौर में करोड़ां मिनख उठतां ई सतवादी जुधथिर, गांडीवधारी अरजण, भीमनादी भींव रौ नांव कौ लेनै पण राजा करण नै चितारै अर कैवै-राजा करण रै बखत कठै खोटी वाण बोलै है ? म्हनैं दूजा नै देवणौ अर पछै म्हंारै पर अटळ रहणौ सौ’रौ काम नीं है। म्हंने देवणौ मरजाणी घरजाणी रौ खेल है। थे आंतरै क्यूं जावौ ? अठै ई इण कळजुग में ई देखल्यौ म्हनैं दियौ जिकां रौ कांई हाल हुयौ। पाबूजी राठौड़ देवळ बाई चारणी नै एक घोड़ी रै पूंछडै म्हनैं दे दियौ। पछै म्हंारै खातर सात फेरा अधूरा मेल आपरी परणैता रौ हाथ छोड़ नै भागियौ। ब्याव रा कांकण डोरड़ा अर सेवरौ बांधियौ थकौ इज आपरा बहनोई जिंदराव खींची सूं लोह रटाकौ लेय नै काम आयौ। पण भली गिणौ कै म्हांरी खातर मरियौ जद आज भी पाबूजी लोक में देव रूप मानीजै, पूजीजै है। बाकी म्हांरै बिना मरबा नै सगळी जियाजूंण मरै है। पण काळ रा परळा में उणां बापड़ा जीवां नै कुंण नारेळ चढावै है ? कुण उणां रा देवळ थरपै है ? कुंण धूप ध्यान करै है ? म्हनैं राखै उणा रौ म्हैं भी आघमान राखूं हूं।
म्हारै तांई रणतभंवर रौ धणी राव हम्मीर बिजाती महमासाह नै राख लियौ अर दिल्ली रा पातसाह अलावदीन री फौज सूं बाथेड़ौ करनै आपरौ राज, पिरवार परगह अर प्राण गमाय दिया। पण म्हांरौ इज कारण है कै राव हम्मीर रौ ख्यातां बातां में आज तांई नांव चालै है।

मिनख में मोटियार बाजवाळा तौ आज सिटळभिटळ गया पण लुगायां में अजै तांई पचाणवै सैकड़ा अेड़ी है जिकी म्हांरै पर अटळ है । फेरा में लोग लुगाई दोनों अगन री लौ धकै सारा पिरवार रै साम्है, म्हनैं (बचन) देवै कै आखी उमर साथ रहस्यां। पण मिनख म्हनैं छोड़ नै कई चूडैलणां, कुदाळ कुरांडां रै चाळे लाग नै आपरी वैरवानी छोड़ देवै, मार देवै, फोड़ा घाळे, पण लुगाया काणौ, खोड़ौ, नामरद, नाजोगो, भोळो-तोळी पांगौ, गोबर रौ गोबिंदौ कैड़ौ भी हुवौ आप रा खावंद नै मुर्गी इण्डा सेवै ज्यूं सेवै। कोई सी इज इयांल की निकळे जिकी रोहिणी री तरै भाग नै चितरथ गंधपः जैड़ा रा घर में जा बडै़। पण बां री कांई आछी गिणत थोड़ी इज हुवै है। सौ मरद री जबान (बचन) अर घोड़ा री लगाम तौ मजबूत इज आछी। गाडी रा पैड़ा री गळाई जिक रा मुंहडा में म्हैं फिरू उण री कदैई, कटैई राज तेज, सभा-समाज में कोई ग्यांन गिणत नीं करै। म्हनैं (बचन) हारणौ अर जमारौ हारणौ अेक गिणीजै। म्हैं मुख कोस सूं निकळियां पछै जदि हाथी रौ दांत पाछौ मुंहडा में बड़ै तो म्हैं बडूं़। जद इज कहियौ है-

हाथी हंदौ दंतड़ौ, मुंहडा हंदौ बोल।
काढ्îा पाछौ नीं बड़ै ओ इज आं रौ मोल।

बोल म्हांरौ इज लाड रौ नांव है। (बोल) म्हारै सूं इज आदमी रौ ठावा मिनख पिछाण करै है। इण वासतै म्हनैं मुखद्वार सूं काढ़ता समै घणी सावचेती बरतणी चायिजै। चालतै ई लबळकौ लेवै उवै इज तौ लबाळी बाजै। गोळी रौ घाव भरीज जावै पण बचन (म्हांरौ) घाव नीं भरीजै। म्हैं नाटसाल री भांत लाग नै सारी उमर मिनख रै दूखणा ज्यूं दूखतौ सालतौ रैवूं। इण वासतै म्हनैं तोल नै बोलणौ चायिजै। जिका बोलणौ नी जाणै उवां बापड़ा नै धेलै भाव भी कुंण बूझै है। जीभ रस (बोल रौ रस) सब रसां में सिरै मानियौ है-

बण रस कण रस तांत रस, सब रस दाठै तोल।
सब रस ऊपर जीभ रस, जो जाणीजै बोल।।

म्हनैं बोल नै, म्हनैं देय नै जिका पूरा नीं उतरै उणा रौ मोल कौड़ी रै भाव, धेला बरौबर। अैज छिदामिया मिनख न मिनख में गिणीजै अर न ढांढां में पुणीजै । अैड़ा कौडी मोला भणीजै

बोलै जितरा बोल, नर जे निरवाहै नहीं।
त्यां पुरसां रा तोल, कौडी मुंहगा करणिया।।

म्हनैं मिनख हुवै जिका तौ सोच समझ नै मुख सूं काढै अर दूजा नै सौपियां पछै पलटै नहीं। अैड़ा म्हारां धणी (बचनधणी) बाजै। उवै सभा सम्मेळण में किंणी ठौड़ नी लाजै। नीं रण में भाजै। उवै धीर वीर गंभीर कहीजै-

वडा न लोपै बचन कह, लोपै नीच अधीर।
उदध रहै मरजाद में, वहै उलट नद नीर।।

म्हनैं एक बात याद आयगी। एक बार एक ठाकर आपरी मोटी टणकाी हेली री चानणी पर गादी मोड़ा लगायां बैठौ हौ। इतरा में एक कागलौ कांव-कांव करतौ आय नै गोखड़ा पर बैठ नै ठाकरां रै माथै वींठ कर दी। ठाकर चाकर नै कह्यौ-ल्या रे रूपा क्रपाण इण कांडी रौ पाप काटां। कागलौ जाणियौ तरवार सूं तौ नीं मरू। ठाकर उठसी जितरै में उड़ नै परौ जास्यूं। पण ठाकर क्रपाण री ठौड़ कमाण उठाय नै तीर मार्यौ। घिरो खाय नै कागलौ बाण री चोट संू गिरह चक्री खावतौ नीचै आयौ नै बोल्यौ-

बचन पलट्टां सौ मुवा, कागा मुवा न जांण।
मारा नहीं क्रपाण सूं, मारा उठा कमांण।।

सौ म्हनैं (बचन) तौ पंखेरूं भी समझै है, नै भरोसौ राखै। म्हांरै (बचन) बळ सू इज मंत्र चालै। संसार रौ धाकौ धिकै। कारज सिध हुवै। वाच भी म्हांरौ ही जवानी रौ नांव है। म्हैं निकळंक गिणियौ गयौ।

सतपुरखां नै लोग म्हनै सिंमर नै इज जुहारड़ा करै। वारणा लेवै। म्हनै हारै चुकै जिका रा भी बिगड़ै। अर म्हनै पाले जिकां री संसार में वाहवाही हुवै। पण म्हनै देणौ आगी पाछी सारी बात सोच समझ नै। जुग जोधार जगदेव पंवार कंकाळी भाटणी नै म्हनैं दियौ तौ निभावण नै माथौ देवणौ पड़ियौ। इण वासतै म्हारी कीमत समझणी।

आज बिग्यान ग्यान बळ रा रातींधा में चूंधीजियोड़ा, राज नेता म्हांरौ मोल घणौ घटायौ। म्हैं सदा सूं इज न्याय रौ सीरी रैयौ। मिनख पणा रै खातर ढाल बणियौ। म्हारै कहै चालिया जिका सुख री नीद सोया। जस खाटियौ। जीवण रौ लाहौ लियौ। सौ लाख जावौ पण साख नीं जावौ।
इण वासतै सबद सांचा पिण्ड काचा। चलौ मंत्रो ईसरौ वाचा। बचन लोपै तौ धोबी री कुण्ड में पडै़। सौ अै मिनखा ! बचन देय नै लोपियौ तौ थांनै लूणां चमारी री आंण है। अजमाल जोगी री दुहाई है।

लेखक : श्री सौभाग्य सिंह शेखावत

(राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार)

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