यदि केजरीवाल ना होता !!

यदि केजरीवाल ना होता !!

जब से केजरीवाल सार्वजनिक सामाजिक व बाद में राजनैतिक जीवन में आयें है, तब से देशवासियों का तगड़ा मनोरंजन हो रहा है| केजरीवाल के सामाजिक जीवन में आने और आरटीआई, लोकपाल, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष से कई गुमनाम नाम लोगों की नजर में आये| कई सामाजिक कार्यकर्त्ता जिन्हें मंच नहीं मिला, उन्हें अपनी समाज सेवा के नाम पर चमक कर भड़ास निकालने का मौका मिला| कुमार विश्वास जैसे कवि मंचो पर कविता पढ़ पढ़ कर पहले देशभक्त समाज सेवक और बाद में राजनेता बन गये| यह केजरीवाल Kejriwal के राजनीति में आने का ही कमाल था कि जिस देश में विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए करोड़ों रूपये खर्च करने पड़ते थे, उस देश की राजधानी में ऐसे लोग विधायक बन गये, जिनकी जेब में बाइक की टंकी में पैट्रोल भरवाने तक के पैसे नहीं होते थे| यह केजरीवाल ही है जिसने देश में उपजी उग्र राष्ट्रीयता की लहर को रोककर, देश में कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को ख़त्म करने वाली भाजपा का दिल्ली विधानसभा में सूपड़ा साफ़ कर दिया|

केजरीवाल के आने से एक तरफ बड़े व्यवासायिक, राजनैतिक घराने, राजनैतिक दल खौफ के साये में रहे, वहीं देश की जनता ने केजरीवाल के आने का पूरा मजा लिया| जिस मीडिया को ख़बरों को लिए इधर-उधर दौड़ लगानी पड़ती थी, उस मीडिया को केजरीवाल के पक्ष-विपक्ष में इतना मसाला मिला कि किसी भी चैनल की दूकान आज ख़बरों से खाली नहीं रहती| मीडिया ही क्यों सोशियल मीडिया पर की-बोर्ड ठोकने वालों को लिखने को खूब मसाला मिला और आज भी मिल रहा है| सोशियल मीडिया में भी जिसे देखो कोई केजरीवाल की तारीफ करता मिलता है तो कोई उसकी मजाक उड़ाकर अपना मन बहलाता नजर आता है| कुल मिलाकर सोशियल मीडिया पर केजरीवाल के नाम से पूरा देश एन्जॉय कर रहा है|

कभी कभी सोचता हूँ कि यदि केजरीवाल ना होता तो हम जैसे ब्लॉग लिखने वाले रोज रोज किस विषय पर पोस्ट लिखते| पर जब से केजरीवाल आया है, ब्लॉगर्स के लिए विषय की कोई कमी नहीं| जब केजरीवाल संघर्ष कर रहा था, अनशन पर था तब भी ब्लॉगर्स ने अनशन में गिलास को लेकर चटखारे लेते हुए कई पोस्टें ठेली| मीडिया को केजरीवाल के आने के बाद ऐसा लगता है जैसे कोई असीमित समय वाला समारोह चल रहा है| आज केजरीवाल दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री है, जिनका अनशन अनशन खेल तो छुटा हुआ है, पर जो खेल वे एलजी के साथ खेल रहे है, वह भी जनता का मनोरंजन करने के लिए काफी है| हालाँकि इस खेल में जब वे भाजपा को गरियाते है तो प्रधानमंत्री जी के भक्त उन्हें गरिया कर अपनी देशभक्ति दिखाते हुए अपने आपको राष्ट्रवादी साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते|

पर भाजपाइयों को समझना चाहिए कि एलजी के साथ केजरी सर का मैच कहीं न कहीं केंद्र सरकार को फायदा ही पहुंचा रही है| भाजपा को केजरी सर का अहसान मानना चाहिए कि उनकी नौटंकी के मजे लुटने में व्यस्त जनता भाजपाई मंत्रियों के कारनामों से आँख मूंदे है| आज केजरी सर की नौटंकी नहीं होती तो देश का हर नागरिक मोदी के अच्छे दिन महसूस कर उनमें कमियां निकालता, तो किसी का खाली दिमाग मोदी के काम का विश्लेषण कर सोशियल साइट्स पर लिखता जिसका भक्तों द्वारा दुष्प्रचार घोषित कर उससे बहस करनी पड़ती|
यदि केजरी सर नहीं होते तो मीडिया 24 घंटे चलने वाले चैनल के लिए ख़बरें कहाँ से लाते?
जिन ब्लॉगर्स ने केजरी सर पर कई लेखों की सीरिज लिख डाली, उन्हें विषय तलाशने में कितनी ऊर्जा खर्च करनी पड़ती ?
सोशियल साइट्स पर टाइम पास करने वाले नागरिक भी फेसबुक पर स्टेट्स, ट्विट के लिए इतनी सामग्री कहाँ से तलाशते ?
केजरी सर को सोशियल साइट्स पर गरियाने वाले भाजपाई भक्त किसे गरियाकर अपनी भड़ास निकालते?
यदि केजरी सर की जगह किसी अन्य दल की दिल्ली में सरकार होती तो विधायकों को सैल्यूट मारने वाली दिल्ली पुलिस इतने विधायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर अपनी भड़ास कहाँ से निकाल पाती ?
ये तो केजरी सर का एलजी साहब को अहसान मानना चाहिए कि इनकी वजह से वे अपने आपको सरकार मान रहे है, अपनी मन मर्जी से सरकार चला भी रहे है| यदि भाजपा की सरकार बनती तो जंग साहब की कब की छुट्टी हो चुकी होती या चुपचाप ठीक वैसे ही फाइल्स पर हस्ताक्षर कर रहे होते, जैसे शीला दीक्षित के ज़माने के फैसलों पर आँख मूंद कर करना पड़ता था|
यह केजरी सर के मुख्यमंत्री बनने का कमाल है कि फर्जी डिग्रीधारी कानून मंत्री तक बन गये|
कई बार में सोचता हूँ कि केजरी सर राजनीति में नहीं आते तो आज देश के नागरिक अपना मन कैसे बहलाते? खैर…………..जो भी आज केजरी सर हमारे बीच है और मैं तो सोशियल पर लिख कर खूब एन्जॉय करता हूँ, आप भी भले ही केजरी सर के राजनैतिक विरोधी है पर उनके नाम पर, उनके क्रियाकलापों पर लिखकर, दोस्तों में चर्चा कर मजे अवश्य लें !

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