एक पत्र आरक्षण पीड़ित सामान्य वर्ग के नाम

एक पत्र आरक्षण पीड़ित सामान्य वर्ग के नाम

प्रिय सामान्य वर्ग,

जबसे सत्ताधारी दल व कुछ अन्य दल जो आरक्षण रूपी हथियार का इस्तेमाल कर दलित वोट बैंक रूपी बैसाखियों के सहारे सत्ता तक पहुंचे है या पहुँचने की कोशिश कर रहे है द्वारा आरक्षण का दायरा बढ़ाकर अल्प-संख्यकों को भी इसमें शामिल करने का अभियान छेड़े है तब से तुम बहुत ज्यादा उद्द्वेलित हो| और अब जब इन्हीं दलों ने प्रोमोशन में आरक्षण का मामला छेड़ा है तब से तो तुमनें आपा ही खो दिया है|और सत्ताधारी दल सहित समर्थक दलों की आलोचना में लगे हो हालाँकि तुम्हारी आलोचना की तूती मीडिया में तो कहीं नहीं सुनाई दे रही पर सोशियल मीडिया में तुम सरकार व आरक्षण समर्थक दलों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे हो|
कई बार सोचता हूं कि सरकार ने भी सोशियल मीडिया में भड़ास निकालने की छुट शायद इसीलिए दे रखी है कि तुम जैसे लोग अपनी भड़ास सड़कों पर व चुनावों में इनके खिलाफ वोट देकर निकालने के बजाय सोशियल मीडिया में डायलोग लिखकर अपनी भड़ास निकाल लो| जिससे न तो किसी राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है न किसी नेता को प्रत्यक्ष विरोध, घेराव आदि का सामना करना पड़ता है| इस तरह सोशियल मीडिया में भड़ास निकालकर तुम भी खुश और ये आरक्षण समर्थक नेता भी खुश|
पर हे प्यारे सामान्य वर्ग तुमने कभी ये सोचा कि ये सत्ताधारी दल व अन्य आरक्षण समर्थक दल हर बार आरक्षण का दायरा बढाने का निर्णय क्यों लेते है ? आरक्षण बढ़ाकर तुम्हारे हितों पर कुठाराघात करने के इस प्रयोजन का जिम्मेदार कौन है ? कौन है वे लोग वो जो तुम्हारे बच्चों को योग्यता के बावजूद सरकारी नौकरियों में मिलने वाले मौकों में छिनकर आरक्षण के आधार पर अयोग्य लोगों को देने पर तुले है ?
तुन्हें तो शायद एक ही जबाब सूझेगा कि -वोट बैंक की राजनीती इसके लिए जिम्मेदार है |यह सारा दोष वोट के लालची नेताओं का है |
पर मेरे प्यारे सामान्य वर्ग तुमने कभी ये सोचा कि वोट बैंक के लालच ये परिस्थितियां बनी कैसे ? अब लोकतंत्र में बिना वोट बैंक के तो कोई दल चुनाव जीतकर सत्ता के गलियारों में पहुँच नहीं सकता इसलिए वोट बैंक के लालची राजनैतिक दलों का क्या दोष ?

दोष तो हे सामान्य वर्ग तुम्हारा खुद का जो तुम लोकतंत्र में सिर गिनवाकर फायदा उठाने वाले मर्म को समझ ही नहीं पाए|अब आरक्षण की मलाई खाने वालों व अल्प संख्यक होने के बावजूद भी अपना जमकर तुष्टिकरण करवाने वालों को देख -उन्होंने लोकतंत्र का मर्म समझा,वोट के महत्व को समझा और एक होकर वोट बैंक बन गए | और एक तुम हो कि आजतक सबल होते हुए भी लोकतंत्र के इस लामबंद होकर वोट देने वाले महत्व को समझे ही नहीं|और जब चुनाव आते है तब तुम कभी राजनैतिक विचारधारा के नाम पर बंट जाते हो,कभी जातिय आधार पर बंट कर वोट देते हो, तो कभी किसी और बहाने आपस में ही लड़-झगड़कर बंट कर अलग-अलग वोट दे देते हो या वोट देने मतदान केंद्र तक जाने की जहमत ही नहीं उठाते|

इस तरह मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हे सामान्य वर्ग ! इस आरक्षण रूपी महामारी से पीड़ित होने में तुम्हारा ही दोष है| किसी राजनैतिक दल का नहीं| अरे राजनेताओं को तो सत्ता चाहिए और वो वोट बैंक से मिलती है जो तुम्हारे पास है नहीं| और इस वक्त तो भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सरकार को अगला चुनाव जीतने के लिए वोट बैंक की सख्त जरुरत है इसलिए वो आरक्षण का दायरा बढ़ाकर व प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने जैसे औजारों से चुनाव जीतने का मानस बनाये बैठी है तो वे तुम्हारे लिए आरक्षण ख़त्म कर अपने पैरों पर क्यों और कैसे कुल्हाड़ी मारे ?

इसलिए हे प्यारे सामान्य वर्ग लोकतंत्र में वोट बैंक का महत्व समझ और एक होकर अपना वोट बैंक बना फिर देख ये ही राजनेता जो आज आरक्षण का जोर जोर से ढोल पीट रहे है| इसका दायरा बढाने को लालायित है| कल इसी आरक्षण के खिलाफ खड़े होंगे| जब तूं भी वोट बैंक बन जायेगा और तेरा वोट बैंक किसी भी दल को सत्ता की सीढियों तक पहुँचाने में सक्षम होगा तब देखना आरक्षण के इन्हीं समर्थक दलों को आरक्षण देश के लिए अभिशाप दिखने लगेगा,देश की वर्तमान बिगड़ी हालात का जिम्मेदार दिखने लगेगा, देश की प्रगति में बाधक नजर आने लगेगा और वे इसे ख़त्म करने के लिए जी जान से जुट जायेंगे|

पर ये हो तभी सकता है जब हे प्यारे सामान्य वर्ग तूं आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हो जाए और लोकतंत्र में वोट के महत्व को समझते हुए एक ताकतवर वोट बैंक बन जाये| इसलिए अब किसी नेता या दल को कोसना बंद कर और आने वाले चुनावों में एकजुट होकर आरक्षण समर्थकों के खिलाफ वोट देकर इन्हें अपने वोट की अहमियत समझा | उस वोट की अहमियत समझा जिसकी असंगठित होने के चलते किसी राजनैतिक दल ने आजतक हैसियत ही नहीं समझी|
सादर
तुम्हारा हितैषी

anti reservation

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