कुछ समय बाद लगा कि अधिकारी ने जो जांच कराई है, उसे देखना तो चाहिए सो जाँच रिपोर्ट की प्रति पाने हेतु आरटीआई आवेदन भेज दिया. जिसके जबाब में मुझे जो प्रत्युतर मिला यानी जो दस बारह लाइंस की जांच रिपोर्ट मिली वह देखने लायक थी. जिसमें न निर्माण एजेंसी को दोषी ठहराया गया, ना उस अभियंता को दोषी ठहराया गया जिसने उक्त निर्माण की जाँच कर ठेकेदार को भुगतान देने का रास्ता साफ़ कर दिया था.
कुल मिलाकर जांच रिपोर्ट में किसी पर कोई आरोप नहीं, कोई दोषी नहीं. दोष निकाला गया तो सिर्फ उस इमारत पर ही कि वह पुरानी थी आदि आदि. इस तरह एक घटिया निर्माण के बाद हुए हादसे की जांच के बहाने लीपापोती कर दी गई| इस तरह के लीपापोती वाले शानदार उदाहरण को आप भी रिपोर्ट निम्न चित्र में देख सकते है.
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जब चोर चोर मौसेरे भाई तो कौन बताये किसी को कोई
Bade dukh ki baat hai..