2019 चुनाव के दृश्य नजर आ रहे थे चित्रपट चल रहा था

2019 चुनाव के दृश्य नजर आ रहे थे चित्रपट चल रहा था

2019 चुनाव का चित्रपट चल रहा था, एक के बाद एक मनमोहक दृश्य बदलते जा रहे थे| इन दृश्यों में मोदी-अमित शाह के चेहरों पर कुटिल मुस्कान के साथ अपार आत्म-विश्वास झलक रहा था| भक्तगण का चेहरा देखते ही लग रहा था आज भक्तगण अपने जीवन का सबसे प्रफुल्लित क्षण जी रहे हैं| चुनाव प्रचार के दृश्य चल रहे थे मैंने देखा गांवों से लेकर शहरों तक, गलियों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक मोदीजी का ही रैला नजर आ रहा था| जिधर देखो उधर से जय भीम और मोदी मोदी के नारों की ध्वनी प्रतिबिम्बित हो रही थी| पर यह क्या ? मोदी जी भगवा की जगह चुनाव प्रचार के पोस्टरों में हरा रंग छा रहा था| दलित युवा पिछले भारत बंद की तर्ज पर हाथों में बड़े बड़े डंडों पर जय भीम लिखा हरा झंडा फहराते हुए रैली निकाल रहे थे| झंडे पर भीमराव आंबेडकर के साथ मोदी जी चित्र शोभायमान हो रहा था|

2019 चुनाव के दृश्य देख ऐसा लग रहा था मानों दलितों को बाला साहेब के बाद मोदी जी के रूप में फिर से एक मसीहा मिल गया| रैली में शामिल दलित युवा, बुजुर्ग, महिलाओं सभी को आज मोदी जी के चित्र में बाबा साहेब की छवि दृष्टिगोचर हो रही थी| एक तरफ प्रमोशन में आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट को मजबूत करने के बाद दलित मोदी जी के पक्ष में भक्तगणों से भी ज्यादा मंत्रमुग्ध थे और उन्होंने आक्रामक प्रचार में भक्तों को भी पीछे छोड़ दिया| भक्तगणों के चेहरे पर अपनी उपेक्षा के भाव भी स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहे थे| दूसरी तरफ मुस्लिम मोहल्लों में मुस्लिम महिलाएं पहली बार बुर्के से निकल मोदी जी के प्रचार में डटी नजर आ रही थी| उनके आक्रामक प्रचार को देखते हुए मुस्लिम पुरुष घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे| पहली बार इन मुहल्लों से कांग्रेस, सपा-बसपा, के साथ लाल झंडे वापस लौटाए जा रहे थे|

उधर अमित शाह अपनी 2019 चुनाव सोशियल मीडिया व चुनावी टीम के साथ बैठक में बोल रहे थे- इस बार दलित व मुस्लिम महिलाओं का हमारे पक्ष में रैला चल पड़ा है, इसे वोट बैंक की आंधी नहीं तूफ़ान समझिये और इस तूफ़ान की गति बढाने के लिए हमें स्वर्णों की बात छोड़कर दलित व मुस्लिम महिला कल्याण कार्यक्रम पर ही जोर देना है| स्वर्ण तो हमारे उस पालतू कुत्ते की तरह है जिसको कितने ही डंडे मारो शाम को कुंई कुंई करते हुए हमारे पास ही आयेंगे और फिर ना चाहते हुए भी उन्हें वोट हमें ही देना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें पता है मोदीजी के सामने पप्पू है फिर हमनें राष्ट्रवाद और हिन्दुत्त्व रूपी अफीम का उन्हें इतना बड़ा डोज दे रखा है कि इसके नशे में वे कैसा भी दर्द सहन कर सकते है अत: अब अपनी पूरी ऊर्जा दलितों व मुस्लिम महिलाओं पर केन्द्रित कर दो, फिर इनके वोट बैंक के आगे स्वर्ण वोटों की औकात ही क्या है?

दृश्य बदला और मुझे मोदीजी की सभा दिखाई देने लगी| सभा में दलित प्रफुल्लित थे, मुस्लिम महिलाओं का भी रैला उमड़ पड़ा था, स्वर्ण भी पांडाल के एक कोने में मूंह लटकाये बैठे थे| मंच सहित पांडाल में चारों और बाबा साहेब के बड़े बड़े चित्र लगे थे| इस बार शिवाजी महाराज व महाराणा प्रताप के चित्र नजर नहीं आये, रामजी का तो कोई नाम लेने वाला तक नहीं मिला| मोदीजी का भाषण भी दलितों व मुस्लिम महिलाओं की कल्याणकारी योजना पर केन्द्रित था|  दृश्य बदला और मुझे मतदान के लिए लम्बी लाइनें दिखाई देने लगी| इन लाइनों में भी वही समानता थी| स्वर्ण मुंह लटकाए कमल के फूल वाला बटन दबा रहे थे, दलितों के साथ मुस्लिम महिलाओं द्वारा कमल के फूल वाला बटन दबाने कादेखते का उत्साह देखते ही बन रहा था| मोदी जी व अमित शाह की मण्डली मतदान के लिए उमड़ी इस भीड़ का जगह से जगह से भक्तों द्वारा किया जा रहा लाइव देख रहे थे| मोदी जी सुप्रीमकोर्ट का फैसले को दरकिनार करने के अपने निर्णय पर प्रफुल्लित नजर आ रहे थे वहीं जेटली मतदान के लिए मूंह लटकाये और अपनी टूटी कमर को हाथ से सहारा दिए छोटे व्यापारियों को देखकर खुश होते हुए कमेन्ट कर रहे थे कि देखा कर चोरों का हाल, छोटी छोटी कर चोरी कर हमारे अम्बानी जैसे आकाओं के लिए मुसीबत बन हुए थे, अभी तो नोटबंदी व GST से कमर तोड़ी है इस बार सरकार का गठन के बाद तो इन्हें साफ़ कर दूंगा | अमित शाह को स्वर्ण हिन्दुओं की दशा देख मजा आ रहा था| अपनी आईटी सैल की मुखाबित होकर कहते नजर आये कि देखो इनकी हालत, हमने इनके पिछवाड़ा ठोकने, हर जगह जलील करने का पूरा इंतजाम किया, पर फिर भी ये वोट हमें ही दे रहे हैं, इसलिए मैं कहता हूँ समर्थक नहीं इसी तरह के मानसिक गुलाम बनावो|

और अगले दृश्य में हर टीवी चैनल पर 2019 चुनाव की लती दिखी| 2019 चुनाव में दीजी के तूफ़ान के आगे सभी दलों का सूपड़ा साफ हो गया, विपक्ष राष्ट्रवादी पांच सीट जीत पाया है, एक एंकर बता रही थी ये पाँचों विपक्षी भी मोदीजी की रणनीति के तहत जिताए गए ताकि सेम्पल के तौर पर संसद में विपक्ष उपलब्ध रहे| तभी बाहर जोर से बिजली गरजी और मेरी नींद खुल गई और सपने में जो दृश्य दिखाई दे रहे थे सब बंद हो गए| तब से सोच रहा हूँ क्या मेरा सपना सच होगा या मोदी जी की गत सबसे बड़े दलित हितैषी वीपी सिंह की तरह होगी|

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