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हाई टेक होते भिखारी

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देश के लगभग सभी शहरों के चौराहों पर भिखारियां से हमेशा सामना होता है | हर रोज ये भिखारी अलग-अलग भूमिका (भेष में ) में भीख मांगते मिलते है मसलन मंगलवार को हनुमान जी की फोटो लिए होंगे तो ब्रहस्पतिवार को साईं बाबा का चित्र लिए भीख मांगते नजर आयेंगे तो शनिवार को शनिदेव का प्रतीक व तेल का डिब्बा ये चौराहे पर हर आने जाने वाले के आगे कर देंगे |बाकी दिन गरीबी और लाचारी का ढोंग तो फिक्स है ही |
कई लोग साईकिल रिक्शा पर लाउड स्पीकर में संगीत बजाते उसके आगे चादर फैला गली-गली भीख मांगते मिल जायेंगे तो कई बैल गाडी पर चलता फिरता मंदिर बना गली मोहल्लों में लोगो की आस्था का दोहन करते मिल जाते है | आज सुबह ऑफिस जाने के लिए घर से निकलते ही गली में एक ऑटो में बना चलता फिरता साईं बाबा का मंदिर नजर आया | लगता है ये भी बैल गाडी में चलता फिरता मंदिर बनाने के बजाय ज़माने के साथ कदम ताल मिलाते हुए ऑटो पर मंदिर बना तकनीकी का इस्तेमाल करते हुए हाई टेक हो रहे है| इस हाई टेक मंदिर के साथ दो लोग पंडित का भेष बना साईं बाबा के प्रति लोगों की श्रद्धा का पूरा फायदा पैसे इकट्ठे करने में उठा रहे थे | ये लोग हर आते जाते को रोक कर व हर घर का दरवाजा खटखटा कर पैसे मांग रहे थे इसलिए मै तो इन लोगों को भिखारी की संज्ञा ही दूंगा | बेशक इन्हें भीख देने वाले लोग इन्हें साईं बाबा का पुजारी या भक्त समझ दान दक्षिणा दे रहे थे |
जब तक हम ऐसे हट्टे कट्टे मुस्टंडे लोगो को धर्म के नाम पर या दया करके भीख देते रहेंगे देश में भिखारियों की संख्या बढती ही रहेगी | और हमारी दया करने की प्रवर्ती व धार्मिक आस्था का ये लोग दोहन करते रहेंगे |

12 COMMENTS

  1. बिल्कुल सच कह रहे हैं ॥रतन जी…और दुख की बात तो ये है कि इसे अपराध घोषित किया जा चुका है…………।फ़िर भी……॥ये चल रहा है…॥

  2. सही कहा.. अभी कुछ दिनों पहले समाचार था कि अजमेर में उर्स में ये करोडो़ रुपयों का व्यवसाय है.. भिखारी बाकायदा नियुक्त होते है ५०० रु रोज में..

  3. भिखारी को कभी भी नगद पेसा मत दे, अगर किसी की मदद करनी ही हो तो उसे खाना खिला दे, देखे खाने के नाम से यह नकली भिखारी केसे भागते है, यह इन का धंधा है, मै पहले पेसे दे देता था, लेकिन अब नही.
    धन्यवाद

  4. रतन जी आपने अच्छी पोस्ट लिखी है .हमारे यहाँ पर अभी तक बैल गाडी वाला मंदिर आता है.आप की पोस्ट दिखानी पड़ेगी पंडित जी को ….. पहले कुछ साधू लोग हाथी लेकर आते थे …..वो भी बंद हो गये …शायद मेनका की बजह से……

  5. आपने एक बहुत ही प्रचलित समस्या की ओर ध्यान दिलाया है जिसका समाधान आम आदमी के अलावा और किसी के पास नही है । मै दुकानदार आदमी हू , मेरे पास शुरू शुरू मे बहुत से भिखारी आते थे म उनके लिये एक बास से बनी झाडु रखता हू । जब भी कोई भीख मांग्ने के लिये आता है उसे झाडु लगाने के लिये कहता हू वह ना करता है और आगे निकल जाता है मै उसे यही कहता हू भाई काम करना चाहते हो तो मै दे सकता हू बगैर काम मै किसी को एक पैसा भी नही देता हू काम नही दे पाऊ तो मै अपने कर्तव्य से विमुख होता हू लेकिन मै आपको जैसा चाहो वैसा काम दे सकता हू ,खेती का सफाई का या भवन निर्माण का इस लिये अब उन्होने आना छोड दिया है सब बाई पास निकल जाते है ।

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