हठीलो राजस्थान – 5

मात सुणावै बालगां,
खौफ़नाक रण-गाथ |
काबुल भूली नह अजै,
ओ खांडो, ऎ हाथ ||२८||

काबुल की भूमि अभी तक यहाँ के वीरों द्वारा किये गए प्रचंड खड्ग प्रहारों को नहीं भूल सकी है | उन प्रहारों की भयोत्पादक गाथाओं को सुनाकर माताएं बालकों को आज भी डराकर सुलाती है |

संत सती अर सायबा,
जणियां दाता सूर |
जण-जण नाऩ्हां जीव आ,
नथी गमायो नूर ||२९||

इस भूमि ने सदा ही संतो,सतियों और वीर स्वामियों ,दाताओं तथा शूरवीरों को जन्म दिया है | यहाँ की वीर ललनाओं ने तुच्छ प्राणियों (कायर,कपटी और कपूतों) को जन्म देकर अपने रूप यौवन को नष्ट नहीं किया |

जाणै इटली फ़्रांस रा,
जरमन, तुरक , जपान |
रण मतवाला इण धरा,
रण बंको रजथान ||३०||

आज फ़्रांस ,जर्मनी ,तुर्की व जापान के लोग इस तथ्य से भली भांति परिचित हो चुके है कि राजस्थान में युद्ध के लिए आतुर रहने वाले प्रचंड-वीर निवास करते है व राजस्थान विकट युद्ध करने वालों की भूमि है |

रेती धरती विकट भड,
रण-टणका सदियांह |
हिम-गिर यूं साखी भरै,
सन्देसो नदियांह ||३१||

बालुका-मयी इस भूमि पर शताब्दियों से रण-भूमि में बलवान विकट योद्धा उत्पन्न होते है | इस बात की हिमालय भी साक्षी देता है और नदियाँ भी यही सन्देश गान करती है |

किम पडौस कायर बसै,
केम बसै घर आय |
पाणी,रजकण,पवन सह,
वीरा रस बरसाय ||३२||

इस धरती के पडौस में कायर पुरुष कैसे निवास कर सकते है और इस पर आकर तो वे बस ही कैसे सकते है ? क्योंकि यहाँ का पानी,मिटटी और हवा वीर रस की वर्षा करने वाले है अर्थात वीरों को उत्पन्न और पोषित करने वाले है |

लिखियो मिलसी लेख में,
विधना घर नित न्याय |
घर खेती किम नीपजै ?
रण-खेती सरसाय ||३३||

प्रराब्द में जो लिखा होता है ,वही मिलता है | विधाता के घर में सदा न्याय ही होता है यहाँ की भूमि पर खेती कैसे पनप सकती है ? क्योंकि यहाँ की वीर भूमि में तो रण-खेती है |

स्व.आयुवानसिंह शेखावत

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