हठीलो राजस्थान-27

ठाणा लीलो ठणकियो,
सुण बैरी ललकार |
सुत धायो ले सैलड़ो,
धव खींची तरवार ||१६०||

शत्रु की ललकार सुन कर अस्तबल में बंधा हुआ घोडा भी हिनहिना उठा | उधर,वीर पुत्र अपना भाला लेकर (शत्रु पर आक्रमण करने) दौड़ा और उधर वीर-पति ने म्यान से तलवार सूंत ली |

पग चंगों लख पूत नै,
भीगौ काजल नैण |
करवालां पग काटियौ,
समझी मायड़ सैण ||१६१||

दुर्गादास राठौड़ की माता ने पुत्र के सुदृढ़ पैरों को (भागने में तेज) देखकर व्याकुल हो गई व उसकी आँखों में आंसू आ गए | यह देख वीर दुर्गादास ने तलवार से अपना पैर काट लिया | दुर्गादास ने एसा क्यों किया, माता इस इशारे को समझ गई |

गिधण डुलावै बीजणों,
समली सिर सहलाय |
पूत अच-पलो पौढियो,
पैडां थप्पी पाय ||१६२||

चंचल पुत्र युद्ध-क्षेत्र में लड़ता हुआ वीर गति को प्राप्त होकर निशंक हो शयन कर रहा है | युद्ध समाप्त होने के उपरांत गिद्धनी उड़कर उसके पास आती है तो ऐसा प्रतीत होता है मानों वह अपने पंखों से वीर को पंखा झल रही है व सिर पर बैठी हुई चील उसके मस्तक को सहलाती प्रतीत होती है |

सुत जायो सत मासयो,
मां हरखी नह लेस |
बरस सातवें रण मुवो,
हरखी आज विसेस ||१६३||

मां के गर्भ से जब सतमासा पुत्र पैदा हुआ तो उसे रंच मात्र भी प्रसन्नता नहीं हुई किन्तु सात वर्ष का होने पर जब उसका पुत्र युद्ध क्षेत्र में युद्ध करता हुआ मारा गया तो उसे आज विशेष प्रसन्नता है |

कुण दुसमण इण देस रो,
कुण लीवी धर खोस |
नान्हों पूछै मात नै ,
बार बार कर रोस ||१६४||

नन्हां बालक क्रुद्ध होकर बार-बार मां से यही प्रश्न पूछता है कि- हे मां ! बता हमारे देश का शत्रु कौन है तथा किसने हमारी धरती छिनी है ? |

सुत छोटो खोटो घणों ,
बोलै निरभै बैण |
नाम चहै निज शत्रुवां,
कर कर राता नैण ||१६५||

यधपि पुत्र छोटा है और नटखट भी बहुत है किन्तु वह वीरों के से निर्भय वचन बोलता है | वह नित्य सरोष नेत्रों से रह-रह कर अपने बैरियों के नाम पूछता है ताकि उन्हें मारकर अपने पिता के बैर का बदला ले |

स्व.आयुवानसिंह शेखावत

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