1411-स्थानीय ग्रामीण ही बचा सकतें है बाघ

1411-स्थानीय ग्रामीण ही बचा सकतें है बाघ

देश में सिर्फ १४११ बाघ ही बचे है यह गिनती सही है या गलत इस पर सवाल उठाया जा सकता है पर यह सच है कि हमारे देश के जंगलों व अभ्यारण्यों में तस्करों द्वारा किये गए अवैध शिकार के चलते  बाघों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है और यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब बाघ सिर्फ चिड़ियाघरों तक ही सिमित हो जायेंगे | हमारे नन्हे ब्लोगर आदि की आशंका भी निराधार नहीं कि अगली बार बाघ चिड़ियाघर में भी देखने को ना मिले |
बाघों की कमी के चलते जंगलों में जीवो की संख्या का संतुलन भी बेतहासा बिगड़ा है यही कारण है कि बाघ की कमी के चलते जंगलों में रहने वाली नील गायों की संख्या पर अंकुश नहीं लग पाने के कारण नील गायें जंगल से निकलकर हमारे खेतों तक पहुँच गयी है और उनके द्वारा फसलों का नुकसान करने पर हमारा किसान आज दुखी है | यदि जंगलों में बाघ होते तो वे नील गायों की संख्या नहीं बढ़ने देते और हमारे किसान नील गायों के आतंक से आतंकित नहीं होते | और ना ही कभी हम ब्लॉगजगत में नील गायों को मारने देने या ना देने पर कभी बहस करते | जंगल में जीवों की संख्या के संतुलन बिगड़ने का यह तो मात्र एक उदहारण है ऐसे कई उदहारण और हो सकते है जिनसे जंगल में बाघों की महत्ता उजागर होती है |
बाघों को शिकारियों के शिकार से बचाने के लिए सरकार भी इतने सुरक्षा कर्मी जंगलों में तैनात नहीं कर सकती जो इन शिकारियों पर अंकुश लगा सके | इसके लिए हमें जंगल के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के सामने ही बाघ की महत्ता के उदहारण पेश उन्हें समझाना होगा कि बाघ उनके खेतों से दूर जंगल रह कर  भी कैसे उनकी खेतों में कड़ी फसल की रखवाली कर सकता है नील गाय का उदहारण देकर हम किसानों को समझा सकते है कैसे जंगल में जीवों की संख्या का संतुलन बिगड़ने का प्रभाव उन पर पड़ता है | और इस असंतुलन से बचने के लिए जंगल में बाघ का होना हमारे लिए कितना जरुरी है | यदि जंगल के आस पास के ग्रामीणों में बाघ बचाने के बारे में जाग्रति फ़ैल जाये तो वे ही सही मायने में बाघों के अवैध शिकार पर अंकुश लगा सकते है |
ग्रामीणों द्वारा शिकार पर अंकुश लगाने का उदहारण हमारे सामने है –
जोधपुर और उसके आस पास के क्षेत्र में बसे विश्नोई जाति के लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते किसी भी व्यक्ति को अपने क्षेत्रों में हिरण सहित किसी भी वन्य जीव का शिकार नहीं करने देते , सलमान खान जैसे सेलिब्रेटी को भी उन्होंने अवैध शिकार करने के जुर्म में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया | विश्नोई समाज द्वारा शिकार पर अंकुश लगाने के चलते ही आज जोधपुर जाते समय जब सुबह सुबह ट्रेन की खिड़की से  बाहर झांकते ही हिरणों के झुण्ड के झुण्ड कुलांचे भरते नजर आते है |
इसी तरह जंगल के आस पास के ग्रामीणों में बाघों को बचाने के पार्टी जागृत किया जा सके तो बाघों के अवैध शिकार पर पूर्णरूप से अंकुश लगाया जा सकता है जो सरकारी सुरक्षाकर्मी तो कभी नहीं लगा सकते |
यदि बाघ है तो हमारे जंगलों में अवैध कटाई भी नहीं होगी यानि जंगल भी बचेंगे और जंगल हमारा पर्यावरण भी बचाए रखेंगे |
यदि बाघ है तो जंगल में जंगल में जीवों की संख्या का संतुलन भी बना रहेगा |
यदि हमारे जंगलों में बाघ होंगे तभी नील गायों से हमारी फसलें उजड़ने से बचेंगी |
अब अनुमान लगा सकते है कि आपके रसोई में इस्तेमाल होनी वाली दाल व अनाज के सही उत्पादन में बाघों का भी अप्रत्यक्ष कितना योगदान होता है | 

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11 Responses to "1411-स्थानीय ग्रामीण ही बचा सकतें है बाघ"

  1. राज भाटिय़ा   February 27, 2010 at 2:39 pm

    होली की खुब सारी शुभकामनाये आप ओर आप के परिवार को.
    इन्हे सिर्फ़ इन की किसमत ही बचा सकती है, ओर कोई नही, खास कर जिस देश मै कोई कानून नही वहा इन के बचाव का सोचना एक मजाक है

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  2. निर्मला कपिला   February 27, 2010 at 3:03 pm

    होली की पूरे परिवार को बहुत बहुत बधाई।

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  3. काजल कुमार Kajal Kumar   February 27, 2010 at 3:52 pm

    सहमत.

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  4. होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

    Reply
  5. Udan Tashtari   February 27, 2010 at 4:18 pm

    बढ़िया विश्लेषण है.

    ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
    प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
    पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
    गले लगा लो यार, चलो हम होली खेलें.

    आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

    -समीर लाल ’समीर’

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  6. डॉ. मनोज मिश्र   February 27, 2010 at 5:07 pm

    होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  7. अल्पना वर्मा   February 27, 2010 at 6:16 pm

    बहुत ही अच्छा आलेख और विश्लेषण भी.
    जिस तरह काले हिरण के लिए विश्नोई समाज प्रतिबद्ध है.उसीतरह बाघों को बचाने के लिए हम सब भी प्रतिबद्ध हों तो स्थिति में बदलाव आ सकता है.
    ***होली की शुभकामनाएँ***

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  8. ताऊ रामपुरिया   February 27, 2010 at 6:45 pm

    बहुत सही कहा,

    आपको होली पर्व की घणी रामराम.

    रामराम

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  9. RaniVishal   February 28, 2010 at 2:03 am

    Sahi tathyon ke sath bahut accha aalekh…aabhar!
    Aapko apariwaar holi ki shubhakaamnae!!

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  10. महेन्द्र पटेल   February 28, 2010 at 3:41 am

    इंसान किताना स्वार्थ हो गया है | जो प्राणी उत्क्रांति के दौर में बनने के लिए लाखो साल लग गए उसे अपने स्वार्थ के लिए खत्म कर रहा है|

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  11. नरेश सिह राठौङ   February 28, 2010 at 7:30 am

    आपकी चिंता जायज़ व समयानुकूल है | बाघ है तो जीवन है | होली की बधाई | धमाल सुनने के लिए शेखावाटी की नयी पोस्ट पर पधारे |

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