सेकुलर दोगलापन

बाबा रामदेव के अनशन की घोषणा के बाद मिडिया से लेकर ब्लोग्स तक पर बाबा के समर्थन और विरोध में बहुत कुछ लिखा गया किसी ने बाबा की मजाक उड़ाई तो किसी ने उन्हें कारोबारी कहा और सबसे बड़ी हद दिग्गी राजा ने करदी कि बाबा को ठग ही कह डाला | सेकुलर लोग बाबा के अनशन करने पर इतने तल्ख़ थे उनके विचार से तो बाबा को सिर्फ योग तक सिमित रहना चाहिए | एसा सोचते और लिखते हुए उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि बाबा भी इस देश के नागरिक है और उन्हें भी इस देश की किसी भी ज्वलंत समस्या पर अपने विचार अभिवक्त करने का भारतीय संविधान उतना ही अधिकार देता है जितना उन तथाकथित सेकुलरों को देता है,साथ ही कारोबार करने का भी | खैर अब बाबा का आन्दोलन लट्ठ के जोर पर दबा दिया गया है,भट्टा-परसोला में युपी पुलिस की किसानों पर हिंसक कार्यवाही पर घड़ियाली आसूं बहाने वाली सेकुलर सरकार और उसके समर्थक सोते हुए,निहत्थे,बूढों,बच्चो व महिलाओं पर लाठियां भांज उन्हें भागकर वीरोचित भाव दर्शा रहे है पुरे सेकुलर गिरोह का सीना इस विजय से चौड़ा हुआ जा रहा है और हो भी क्यों नहीं जो सरकार राजस्थान में आरक्षण के लिए रेले रोकने वाले गुजरों के आगे कुछ नहीं कर सकी,पिछले दिनों जाट आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेल पटरियों से नहीं हटा पायी उस बदनामी का बदला आखिर उसने रामलीला मैदान में रावण लीला कर ले लिया | धन्य हो सेकुलर सरकार धन्य हो | धन्य है तुम्हारी वीरता जो सोते हुए लोगों को तुम्हारी पुलिस ने बड़ी वीरता से खदेड़ दिया | इस वीरता के लिए तो दिल्ली पुलिस के महानिदेशक को वीर चक्र देना चाहिए |
अब चर्चा करते है सेकुलर लोगों द्वारा उठाये जाने वाले दोगले सवालों पर –
१- बाबा को योग तक सिमित रहना चाहिए|
क्यों ? क्या बाबा इस देश के आम नागरिक नहीं है ? क्या महंगाई का असर बाबा के भक्तों पर नहीं पड़ता ? क्या बाबाओं को कोई अनशन या आन्दोलन करने का हमारा संविधान ईजाजत नहीं देता ?
२- बाबा कारोबारी है ?
क्या इस देश में किसी को कारोबार करने की ईजाजत नहीं है ? बाबा रामदेव ने कारोबार कर धन कमाया है तो इसमें बुरा क्या है ? कारोबार भी तो संविधान में बने नियमों के अंतर्गत होता है | यदि बाबा ने कारोबार में अनिमितता की है,कर चोरी की है तो उसकी जाँच करवाई जा सकती है | क्या इस देश में कोई कारोबारी राजनीति नहीं कर रहा ? सरकार में शामिल मंत्री सांसदों में से कोई कारोबारी नहीं है ? देश की आजादी में जमनालाल जी बजाज जैसे कारोबारियों ने क्या हिस्सा नहीं लिया था ?
३- बाबा का मंतव्य राजनैतिक है |
क्या बाबा राजनीती में नहीं आ सकते ? क्या राजनीती करने का एकाधिकार सिर्फ उन्ही को है जो राजनीती में है ? जब चोर,डाकू,देशद्रोही,आतंकी,माफिया इस देश की राजनीति में घुल-मिल सकते है तो क्या कोई साधू राजनैतिक महत्वाकांक्षा नहीं पाल सकता ? क्या इस देश में पहले साधू महात्माओं ने चुनाव नहीं लड़े ? क्या इस देश की संसद में कभी कोई साधू सांसद नहीं बना ?
४- बाबा अपने ट्रस्ट की सम्पत्ति घोषित करे, साथ ही दान दाताओं की सूचि जारी करे |
क्या कभी किसी सेकुलर ने अपने एन जी ओ ,ट्रस्ट की सम्पत्ति घोषित की है ? क्या कभी कांग्रेस ने राजीव गाँधी फाउंडेशन की सम्पत्ति घोषित की है ? यदि नहीं तो पहले खुद घोषित करे ,साथ ही वह सूचि भी जारी करे जिन्होंने उस ट्रस्ट को दान दिया है और ये भी बताये कि -दान देने वाले ने दान के बदले सरकारी रियायतों का कितना फायदा उठाया ?
५- बाबा रामदेव ठग है |
पिछले दिनों सत्यसाईं बाबा की मौत के समय मैंने उनके और उनके चमत्कारों के बारे में काफी पढ़ा | कई वैज्ञानिको ने सत्यसाईं बाबा को ठग या जादूगर बताया | यु ट्यूब पर उनकी चालबाजी करते हुए वीडियो भी दिखाया गया | उन्होंने भी पैसा दान लेकर ही बनाया पर उनकी मौत के बाद उन्हें तिरंगे में लिपटाया गया सोनिया व मनमोहन उनके दर्शनों को गए | जिस व्यक्ति को वैज्ञानिक ठग व जादूगर ठहराने पर तुले थे उसको एसा सम्मान क्यों ? क्या यह दोगलापन नहीं ?
क्या कभी इस सरकार में यह सोचने की भी जरुरत की है कि -चर्च में आने वाले पैसे का श्रोत क्या है ?
इसी सेकुलर पार्टी के शासन में धीरेन्द्र ब्रहमचारी व तांत्रिक चंद्रास्वामी के रुतबे को भी आप देख चुके है |
दो शंकराचार्यों को आगे कर कांग्रेस ने उनसे बाबा रामदेव पर अवैध धन रखने का आरोप लगवाया गया | क्या उन शंकराचार्यों के पास जो धन है वो उन्होंने कमाया है ? क्या दान में आया धन नहीं है ? क्या रामदेव के ट्रस्टों के साथ उनकी जाँच करवाना जरुरी नहीं है ? क्या यह भी इस सेकुलर सरकार का दोगलापन नहीं है ?

नोट- मुझे बाबा का प्रवक्ता ना समझे,मैंने बाबा को सिर्फ एक आम नागरिक मान उसके मौलिक अधिकारों व तथाकथित सेकुलरों के दोगलेपन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जरुरी नहीं आप मेरे विचारों से सहमत हों |

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