सूनापन

सूनापन


जिस कागज पे कोई इबादत न हो .
उस कागज को दिल से लगाएगा कौन .
फ़ेंक देंगे उसे फिर कदमो तले,
पलकों पे अपनी बिठाएगा कौन .
मेरा जीवन भी है उस कागज के जैसा ,
मुझे यूँ जमीं से उठाएगा कौन .
जिस कागज पे कोई …………………..
मेरा जीवन भी उस कागज के जैसा ,
लिखी हैं इबादत मुहब्बत की जिस पे .
मगर टूटे वादे कदम लडखडाये ,
पड़ा हैं वो कदमो में कागज का टुकड़ा.
हुआ धुल अब तो जीवन ये मेरा .
जिस कागज पे …………………
जिस मंदिर में कोई पुजारी ना हो ,
उस मंदिर में दीपक जलाएगा कौन .
जिस दीपक के संग कोई बाती न हो ,
उस दीपक को घर में सजाएगा कौन .
जिस आँगन में किलकारी गूंजी नहीं ‘
उस आँगन में खुशिया लायेगा कौन .
जिस कागज पे ……………………..
दुख देखे बहुत में रोया नहीं ,
सोचा बादल हे ये टल जायेगा भी ,
पर बादल रुका बन के ये काली घटा,
गम बरसने लगा बन के सावन यहाँ .
दिल हुआ चूर चूर मन बहकने लगा ,
काली पलके ये आंसू बन बरसने लगी ,
जिस कागज पे……………………………
मैं चाहूँ की चंदा की किरणे सभी,
मेरे दिल के चिरागों को रोशन करे,
मगर चाँद भी छुप गया डर के हम से ,
जो साथी था दिल का हुआ दूर हमसे .
जिस कागज पे ……………………

Himmat Singh Shekhawat

24 Responses to "सूनापन"

  1. Pagdandi   August 15, 2010 at 6:57 pm

    realy nice

    Reply
  2. खूबसूरत रचना ..

    Reply
  3. सुज्ञ   August 15, 2010 at 8:38 pm

    खूब!! कागज में सूनापन सजाया है।

    ॰ रतनसिंह जी,

    एक नजर इस राजस्थानी गीत पर डालें
    http://shrut-sugya.blogspot.com/2010/08/blog-post_15.html

    Reply
  4. चिट्ठाप्रहरी टीम   August 15, 2010 at 8:44 pm

    एक अच्छी पोस्ट लिखी है आपने ,शुभकामनाएँ और आभार

    आदरणीय
    हिन्दी ब्लाँगजगत का चिट्ठा संकलक चिट्ठाप्रहरी अब शुरु कर दिया गया है । अपना ब्लाँग इसमे जोङकर हिन्दी ब्लाँगिँग को उंचाईयोँ पर ले जायेँ

    यहा एक बार चटका लगाएँ

    आप का एक छोटा सा प्रयास आपको एक सच्चा प्रहरी बनायेगा

    Reply
  5. चिट्ठाप्रहरी टीम   August 15, 2010 at 8:45 pm

    एक अच्छी पोस्ट लिखी है आपने ,शुभकामनाएँ और आभार

    आदरणीय
    हिन्दी ब्लाँगजगत का चिट्ठा संकलक चिट्ठाप्रहरी अब शुरु कर दिया गया है । अपना ब्लाँग इसमे जोङकर हिन्दी ब्लाँगिँग को उंचाईयोँ पर ले जायेँ

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    Reply
  6. चिट्ठाप्रहरी टीम   August 15, 2010 at 8:45 pm

    एक अच्छी पोस्ट लिखी है आपने ,शुभकामनाएँ और आभार

    आदरणीय
    हिन्दी ब्लाँगजगत का चिट्ठा संकलक चिट्ठाप्रहरी अब शुरु कर दिया गया है । अपना ब्लाँग इसमे जोङकर हिन्दी ब्लाँगिँग को उंचाईयोँ पर ले जायेँ

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    Reply
  7. Ratan Singh Shekhawat   August 16, 2010 at 12:46 am

    मेरा जीवन भी है उस कागज के जैसा ,
    मुझे यूँ जमीं से उठाएगा कौन
    @ वाह ! बहुत बढ़िया पंक्तियाँ |

    Reply
  8. Uncle   August 16, 2010 at 1:02 am

    NIce

    Reply
  9. क्षत्रिय   August 16, 2010 at 1:04 am

    बढ़िया रचना

    Reply
  10. Ratan Singh Shekhawat   August 16, 2010 at 1:10 am

    @ हिम्मत सिंह जी
    इस शानदार रचना के साथ हिंदी ब्लोगिंग में शामिल होने पर आपको बधाईयाँ व शुभकामनाएँ | आशा है आप नियमित और इसी तरह की बढ़िया रचनाओं द्वारा आगे भी हिंदी को इन्टरनेट पर बढ़ावा देने के पुनीत कार्य में सक्रीय रहेंगे |

    Reply
  11. वाणी गीत   August 16, 2010 at 1:45 am

    जिस कागज पर इबादत ना हो …
    उसे दिल से लगाएगा कौन …
    सोचने की बात है …!

    Reply
  12. ana   August 16, 2010 at 4:10 am

    ati sundar

    Reply
  13. Mahavir   August 16, 2010 at 6:27 am

    really dil ko chune vali poem likhi aapne Himmat sa

    Reply
  14. वन्दना   August 16, 2010 at 7:10 am

    सुन्दर रचना।

    Reply
  15. अल्पना वर्मा   August 16, 2010 at 8:17 am

    जिस मंदिर में कोई पुजारी ना हो ,
    उस मंदिर में दीपक जलाएगा कौन .
    जिस दीपक के संग कोई बाती न हो ,
    उस दीपक को घर में सजाएगा कौन .
    -वाह!क्या बात कही है आप ने …बहुत खूब!
    उदासी लिए है मगर बहुत अच्छा गीत लिखा है..
    हिम्मत जी,पहली बार आप की रचना यहाँ पढ़ी है.पसंद आई.लिखते रहीये.
    शुभकामनाएँ.

    Reply
  16. अल्पना वर्मा   August 16, 2010 at 8:18 am

    चित्र चयन भी रचना के भाव अनुरूप है,बहुत सुन्दर.

    Reply
  17. नरेश सिह राठौड़   August 16, 2010 at 9:00 am

    सुन्दर रचना के लिए हिम्मत सिंह जी,आपका धन्यवाद |

    Reply
  18. Surendra Singh Bhamboo   August 16, 2010 at 10:22 am

    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    मालीगांव
    बहुत अच्छी कविता है आपकी इस लेखने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद
    साया
    आपकी पोस्ट यहा इस लिंक पर भी पर भी उपलब्ध है। देखने के लिए क्लिक करें
    लक्ष्य

    Reply
  19. Gupta   August 16, 2010 at 1:47 pm

    very very very nice usha ji kya kavita likhi hai

    Reply
  20. प्रवीण पाण्डेय   August 16, 2010 at 1:58 pm

    बड़ी ही सुन्दर रचना है। भावों का मुक्त प्रवाह बना रहे।

    Reply
  21. Rahul Singh   August 17, 2010 at 2:57 am

    चलिये अब तो आप स्‍क्रीन पर हैं और आते भी रहेंगे. नई आशाओं के साथ नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं.

    Reply
  22. Education for All   August 17, 2010 at 1:52 pm

    bahut sundar rachna Himmat ji

    Reply
  23. संजय भास्कर   August 19, 2010 at 1:05 am

    बहुत ही सुंदर …. एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया …

    Reply
  24. संजय भास्कर   August 19, 2010 at 1:05 am

    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    Reply

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