सीकर की आन-बान बचाने के लिए इस मुस्लिम महिला ने ये किया ..

सीकर आखिरी और लोकप्रिय राजा कल्याणसिंह जयपुर की सेना व अंग्रेज अधिकारीयों द्वारा अपने राज्य से निष्कासित किये जा चुके थे| सीकर के गढ़ का पूरा परकोटा जनता ने अपने प्रिय राजा व उनके परिवार को बचाने के लिए घेर रखा था| जयपुर सेना सीकर गढ़ पर कब्जे के लिए डटी थी| रावराजा कल्याणसिंह जी के राज्य से निष्कासन के बाद रावरानी जोधीजी रनिवास में रहते हुए आन्दोलन का संचालन कर रही थी| शहर का हर निवासी और राज्य की प्रजा अपने राजा के खिलाफ कार्यवाही से उद्वेलित थी और उनके विकट समय में साथ देने को तन मन धन से तत्पर थी|

उसी वक्त सीकर की मुस्लिम महिला जिसका परिवार रंगरेज था, को लगा कि जयपुर से लड़ाई में राजा को धन की जरुरत होगी और उसके पास थोड़े से जो गहने है वे अब भी काम नहीं आये तो कब आयेंगे| यह सोच उस रंगरेज मुस्लिम महिला ने अपने गहने एक पोटली में बांधे और सीकर के गढ़ की जाननाढ्योढी में चली आयी और गहनों की पोटली रानी जोधीजी के क़दमों में रख दी| पोटली क़दमों में रखकर वह मुस्लिम महिला रानी से अनुरोध करने लगी कि- सीकर की आन रखने के लिए मेरे गहने रख लीजिये| मुसीबत का समय है ये गहने अब भी आन बचाने के लिए काम नहीं आये तो इनका क्या फायदा| असली गहने तो आन ही है जब वह भी नहीं रही तो गहने पहन कर ही क्या करुँगी?

रावरानी जोधीजी अपनी प्रजा का यह त्याग देखकर अभिभूत हो गई, उन्होंने अपने हाथों से उस मुस्लिम महिला को उठाते हुए कहा- “मै थारो त्याग देख नै दंग हूँ, अबार धन की जरुरत कोनी, जद चाय्सी जद मंगा लेस्यां|” यानी मैं तुम्हारा त्याग देखकर दंग हूँ अभी धन की आवश्यकता नहीं है, जब होगी तब मंगवा लेंगे| रानी के ये वचन सुन रंगरेज मुस्लिम महिला गद-गद हो गयी और बोली- “अन्नदाता ! मनै खिदमत को मौको कोनी दियो, जद बी म्हारी जरुरत पड़े याद कर लिज्यो|”

यह उदाहरण राजा और प्रजा के मध्य सम्बन्धों, प्यार और आत्मीयता के भाव को उजागर करता है और साबित करता है कि राजाओं के खिलाफ शोषण, अत्याचार के आरोप मात्र कांग्रेसी दुष्प्रचार है| आपको बता दें यह घटना ज्यादा पुरानी नहीं, सन 1938 की ही है| पर कांग्रेसी दुष्प्रचार के कारण हम कुछ समय पूर्व के माहौल को ही भुला बैठे तो सोचो अपने पुराने इतिहास की हमें कितनी सही समझ है| उस महिला ने सिर्फ राजपरिवार के प्रति ही अपनी स्वामिभक्ति प्रदर्शित नहीं की, बल्कि उसके मन में सीकर की आन-बान की रक्षा का भाव था| जयपुर राज्य की सेना द्वारा सीकर पर हमला उसे सीकर राज्य की आन-बान पर हमला लगा और अपने शहर की आन बचाने के लिए उसने अपने गहनों की पोटली रानी के क़दमों में समर्पित कर दी| काश देश के नेताओं के मन में भी अपने देश की आन-बान-शान बचाने के लिए ऐसा ही भाव हो|

सन्दर्भ पुस्तक : “लोक कल्याणकारी शासक राव राजा कल्याणसिंह जी, सीकर”  लेखक – महावीर पुरोहित | इस पुस्तक पर इस घटना का जिक्र पृष्ठ संख्या 112 पर किया गया है|

One Response to "सीकर की आन-बान बचाने के लिए इस मुस्लिम महिला ने ये किया .."

  1. Sumit   October 10, 2018 at 10:16 am

    Nice Post

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