सस्ता इलाज

सस्ता इलाज

बचपन में बीमार होने पर पडौस के कस्बे में वैध जी के पास ईलाज के लिए जाया करते थे वे नब्ज,जीभ व आँखों की पुतलियाँ देखकर बिना बीमारी पूछे चूर्णनुमा दवा की पुडिया बनाकर दे देते थे और हाँ हमें बीमारी क्या है वह भी वे खुद ही बता दिया करते थे | उनके द्वारा दी गयी दवा कुछ दिन खाते रहने के बाद स्वास्थ्य ठीक हो जाया करता था |पर धीरे धीरे लोगों में जल्दी व तुरंत ठीक होने की लालसा पनपने के चलते एलोपेथ दवाओं के प्रति रुझान बढ़ा और देखते देखते हमारे वैद्य भी आयुर्वेदिक दवाओं के स्थान पर एलोपेथी दवाओं का इस्तेमाल करने लगे |
आज हर शहर व गांव में मौजूद डाक्टरों में सेवा भावना तो दूर की बात हो गयी मरीज के प्रति संवेदना तक ख़त्म हो चुकी है | (एक आध प्रतिशत को छोड़ कर) | ज्यादातर डाक्टर इसी उधेड़बुन में लगे रहते है कि मरीज की किस बहाने कितनी जेब ढीली की जाये , ऐसे डाक्टर बेवजह दुनिया भर की जाँच लिख देते है और तरह तरह की जाँच के बहाने मरीज को लुटते है | एक डाक्टर की छोटी सी दूकान देखते ही देखते कुछ ही वर्षों में एक बड़े अस्पताल का स्वरुप ले लेती है | बड़े व नामचीन अस्पतालों में तो वही डाक्टर नौकरी कर पाते है जो अंट-शंट जांच व इलाज के बहाने मोटे बिल बनवाते हों | ऐसे अस्पतालों में डाक्टर द्वारा ठीक किये गए मरीजों की संख्या नहीं उसके द्वारा इलाज के बहाने कराई गयी बिलिंग देखि जाती है | इन बड़े-बड़े अस्पतालों ने मानवता , सेवा व संवेदना ताक पर रख सिर्फ व्यवसायिक नजरिया अपना लिया है |

पर अभी भी हमारे देश में ऐसे डाक्टरों ,वैद्यों , पारम्परिक चिकित्सकों व संस्थानों की कमी नहीं है जो सस्ता ,सटीक व बढ़िया ईलाज उपलब्ध करा मानवता की सेवा जैसा पुनीत कार्य करने में लगे है | लेकिन इन संस्थानों के बारे आम जन को मालूम नहीं होने के चलते वे इनका फायदा नहीं उठा सकते | आज मैं आपको एक ऐसे ही संस्थान से परिचित करा रहा हूँ जो राजधानी दिल्ली में सस्ता ,सटीक व बढ़िया इलाज उपलब्ध करा मानवता की सेवा में लगा अनूठा उदहारण पेश कर रहा है |

तिब्तिन मेडिकल एंड एस्ट्रो इन्सटीट्युट नाम का यह चिकित्सालय १३ जयपुर एस्टेट , निजामुद्दीन , नई दिल्ली में स्थित है जिसका हेड ऑफिस धर्मशाला (हिमाचल) में Men-Tsee-Khang ( Tibetan Medical & Astrological Institute of H.H. The dalai Lama) है | इस चिकित्सालय में तीन तिब्बती डाक्टर मरीजों को देखने के लिए सुबह 8.30 बजे से 1.00 बजे तक व शाम 2.00 बजे 5.00 बजे तक बैठते है | जो बिना किसी एक्सरे ,खून आदि लेबोरेटरी जाँच के सिर्फ हाथ की नाडी देखकर रोगी को उसका रोग बताते है व अपनी तिब्बती दवाओं से उसका ईलाज करते है |देश भर में इस संस्थान की कोई 45 शाखाएँ है जहाँ पर योग्य तिब्बती डाक्टर मरीजों की सेवा सुश्रुषा में जुटे है | इस चिकित्सालय में भी दूर दूर से लोग ईलाज कराने पहुँचते है पिछले पांच महीनों में मुझे खुद वहां आते जाते भरतपुर ,बगड़, मुरादाबाद और ना जाने कहाँ कहाँ के मरीज आये हुए मिले है और हर मरीज इन डाक्टरों के ईलाज से संतुष्ट दिखा है | यहाँ उपलब्ध तीन डाक्टरों में डा.टी .डी.करछंग (मेन-रम-पा , एम् डी ) यहाँ आने वाले मरीजों की ईलाज के लिए पहली पसंद है | इस चिकित्सालय में भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि नंबर लगाने के लिए सुबह जल्दी जाना पड़ता है |
कम फीस के साथी यहाँ दी जाने वाली तिब्बती दवाएं भी बहुत सस्ती है रु. २०० से ३०० के बीच पुरे महीने भर की दवा मिल जाती है | गठिया , जोड़ों में दर्द , मोटापा , कब्ज ,गैस व पेट की समस्त बिमारियों के साथ यहाँ हर बीमारी का बढ़िया इलाज मौजूद है | इस चिकित्सालय में आर्थिक दृष्टि से कमजोर ही नहीं बल्कि धनाढ्य तबके के लोग भी इलाज के लिए रोज आते है | जिसका सबूत चिकित्सालय के बाहर खड़ी बड़ी- बड़ी गाड़ियाँ देती है |

शेखावाटी
नरेगा की वजह से महंगाई में वृद्धी
ताऊ डाट इन: ताऊ पहेली – 72 (लौह स्तम्भ, दिल्ली) विजेता : श्री प्रकाश गोविंद
एलोवेरा (एफ़ एल पी का व्यवसाय सर्वश्रेष्ट है )
सावधान! मेरा मोबाईल हैक हो गया-आपका भी हो सकता है…………….!

19 Responses to "सस्ता इलाज"

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.