समय : कल्पना जड़ेजा

मोहब्बत में चिराग जलाने की क्यों बातें करते हो …
विज्ञान का जमाना है.. बिजली जला लो न ..
प्रदुषण फैलता है ..इतना भी नहीं जानते हो …
भावनाओं का स्थान नहीं है यहाँ ..
यहाँ दिल में दिल नहीं पत्थर है ..
क्यों अपनी भावनाओं को दुखाते हो …
गया वो जमाना भी जब सिने में दिल रहा करते थे .
एक दुसरे के दुःख सुख में रहा करते थे साथ साथ …

अपने लिए भी समय नहीं है अब कहाँ तुम दूसरों की बात करते हो ..
कभी समय निकाल कर तुम दिल से अपनी बात कर लिया करो ..
अपनी भावनाओं को तुम भी सजा लिया करो ..
और समय मिले तब उसे सजा लिया करो …

लोग हँसते है अब भावनाओं को दूर रखा करो ..
मोहब्बत में क्यों अब चिराग जलाने की बात करते हो …
गया वो जमान जब सिने में दिल रहा करता था..
पत्थर की इस नगरी में ..अब पत्थर ही रहा करते है ||

कल्पना जड़ेजा

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