सती प्रथा पर सदियों पहले रोक लगा दी थी इस महाराजा ने

सती प्रथा पर सदियों पहले रोक लगा दी थी इस महाराजा ने

दिवराला सती प्रकरण के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार सती प्रथा निवारण कानून बनाकर श्रेय लेने की कोशिश की कि उन्होंने इस गलत परम्परा को समाप्त करने के लिए कानून बनाये है| हालाँकि सरकार द्वारा श्रेय लूटने के इस कृत्य की राजस्थान विधानसभा में तत्कालीन विपक्ष के नेता व पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह जी ने हवा निकालते हुए अपने भाषण में आजादी पूर्व राजस्थान की रियासतों द्वारा सती प्रथा निवारण हेतु बनाये कानून का जिक्र किया| भैरोंसिंह जी ने अपने भाषण में कहा-  “अब प्रश्न आता है, सभापति महोदय, कि सती का कानून केवल राज्य सरकार ने बनाया हो ऐसी बात नहीं है। जयपुर रियासत में कानून था, मेवाड़ में कानून था। अगर आप गौरशंकर हीराचंद का राजस्थान का इतिहास पढें तो आपको उस इतिहास से मालूम होगा कि राजस्थान की 22 रियासतों में से 4 को छोड़कर 18 रियासतों में सती के विरोध में कानून बनाये थे।”

महाराजा सवाई रामसिंह जी के प्रधानमंत्री ठाकुर फतेहसिंह चाम्पावत ने अपनी पुस्तक “ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ जयपुर” में महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वारा सती प्रथा व बाल हत्या जैसी गलत परम्पराओं को समाप्त करने के लिए किये गए प्रयासों का जिक्र करते हुए लिखा है कि – महाराजा ने सती प्रथा व बाल हत्या को समाप्त करने के लिए कानून बनाया और इसके लिए उन्होंने अपनी प्रजा का सहयोग प्राप्त करने के लिए प्राचीन कानून और हिन्दू धर्म ग्रन्थों व ऋषियों के कथनों का सहारा लिया| अनेक धार्मिक ग्रन्थों के अंशों का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा| उन्होंने कछावा वंश के सभी 53 परिवारों के मुखिया, अपने सरदारों, कई राज्यों के वकीलों और पंडितों को अपने दरबार में आमंत्रित किया| इन सबकी उपस्थिति में जनसमूह में उन्होंने घोषणा की कि बाल हत्या सबसे बड़ा पाप और अपराध है| उन्होंने चाहा कि उनके राज्य में कोई राजपूत अपनी कन्या की हत्या ना करें| यदि कोई निर्धन कछावा अपनी कन्या की शादी करने में असमर्थ है तो वह जयपुर आ जावे उसकी कन्या का विवाह राज्य द्वारा संपन्न करा दिया जायेगा|

यही नहीं महाराजा ने चारण-भाटों से भी वादा करवाया कि शहर में विवाह के अवसर पर किसी तरह के त्याग की मांग नहीं करेंगे| फतेहसिंह जी लिखते है कि वर्तमान समय तक चारण-भाट इस वादे से बंधे हुए है और वे शहर की चारदीवारी में होने वाले विवाह आदि में त्याग की मांग नहीं करते|

इस तरह महाराजा जयसिंह जी ने अपनी प्रजा के सहयोग से व उन्हें समझाकर सती प्रथा व कन्या हत्या जैसे अपराधों के खिलाफ कानून बनाने के साथ उन्हें दूर करने के उपाय किये|

जौहर, History of sati pratha in Rajasthan in Hindi