शेखागढ़ अमरसर : राव शेखाजी का किला अमरसर

शेखागढ़ अमरसर : साम्प्रदायिक सौहार्द और नारी सम्मान के प्रतीक राव शेखाजी का शेखागढ़ राजस्थान के अमरसर में स्थित है | अमरसर जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर व जयपुर दिल्ली राजमार्ग पर शाहपुरा से लगभग 16 किलोमीटर दूर है| किले के मुख्यद्वार में प्रवेश करते ही खाली मैदान नजर आता है, और बायीं तरफ फिर एक द्वार नजर आता है | इसी द्वार में आगे जाने पर दाहिनी और एक हवेलीनुमा ईमारत का छोटा द्वार नजर आता है, जिस पर वीर शिरोमणि महाराव शेखाजी का जन्म स्थान लिखा हुआ है | हालाँकि इतिहास में राव शेखाजी के जन्म स्थान को लेकर विरोधाभास है | इतिहासकार ठाकुर सुरजन सिंह जी शेखावत की पुस्तक “राव शेखा” में जन्म स्थान को लेकर प्रचलित मान्यताओं के बारे में जिक्र किया गया है| उन मान्यताओं में शेखाजी का जन्म स्थान बरवाड़ा, नांण, घोड़ा खुर्रा, मानगढ़, अमरा धाभाई की ढाणी आदि स्थानों प्रचलित है | वहीं “अदम्य योद्धा महाराव शेखाजी” पुस्तक के लेखक कर्नल नाथू सिंह शेखावत राव शेखाजी का जन्म त्योंदा गढ़ में मानते हैं | आपको बता दें त्योंदा शेखाजी का ननिहाल था | कर्नल नाथू सिंह शेखावत त्योंदा गढ़ को राव शेखाजी की जन्म स्थली मानते है | कर्नल साहब इसके पीछे राजपूतों में सदियों से चली आ रही एक परम्परा का तर्क देते हैं, परम्परा के अनुसार राजपूत महिलाओं का पहला प्रसव उसके पीहर यानी मायके में ही होता है | इस तरह राव शेखाजी के जन्म स्थान को लेकर इतिहास में विरोधाभास है|

शेखागढ़ के निर्माण को देखकर लगता है कि यह छोटा सा द्वार ही कभी इस गढ़ का मुख्य द्वार था और एक स्त्री का अपमान करने वाले कोलराज गौड़ का सिर काटकर शेखाजी ने इसी दरवाजे पर लटकाया गया था | ज्ञात हो राव शेखाजी ने एक स्त्री की मान रक्षा के लिए अपने ही निकट सम्बन्धी गौड़ राजपूतों से ग्यारह लड़ाई लड़ी थी और घाटवा नामक स्थान पर गौडों की संयुक्त शक्ति से युद्ध करते हुए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया था | अमरसर का यह किला इतिहास में शेखा गढ़ के नाम से जाना जाता है और इसका निर्माण खुद राव शेखाजी ने वि.सं. 1517 में करवाया था | आपको बता दें इससे पूर्व शेखाजी की राजधानी अमरसर के पास स्थित नांण गांव में थी| इतिहासकार कर्नल नाथूसिंह शेखावत के अनुसार बेशक शेखा गढ़ शेखाजी का मुख्यालय था पर राजधानी नांण ही थी| शेखागढ़ सैन्य छावनी था, कर्नल साहब के अनुसार शेखाजी की फ़ौज तीन चार स्थानों पर रहती थी, जिनमें एक जगह शेखागढ़ भी थी| शेखागढ़ के बाद शेखाजी ने अजीतगढ़ के पास शिखर गढ़ का भी निर्माण कराया था| जिसके बारे में हम अगले किसी वीडियो में जानकारी देंगे |

शेखागढ़ के निर्माण को देखते हुए भी लगता है कि यह गढ़ सैन्य जरूरतों के अनुरूप ही बना है क्योंकि इसमें राव शेखाजी की शाल नामक एक कमरा ही ऐसा है जिस पर दरवाजा लगा है बाकी दो ओर खुले बरामदे बने है| इतिहासकारों के अनुसार शेखाजी की टांक रानी ही यहाँ निवास करती थी | शेखाजी की इसी टांक रानी ने अमरसर बसने के साथ ही यहाँ कल्याण जी का मंदिर बनवाया था| यह मंदिर गढ़ के वर्तमान मुख्य द्वार के बाहर ही है पर तब शायद यह मुख्य द्वार नहीं था | गढ़ और मंदिर के मध्य एक सुरंग बनी है जिसके बारे में कहा जाता है कि रानी मंदिर में दर्शन करने इसी सुरंग से आती थी| बेशक रानी के खुद के रहने के लिए इस गढ़ में शानदार महल नहीं था, लेकिन रानी ने अपने आराध्य के लिए यह शानदार मंदिर बनवाया था| जिसमें आज भी नियमित पूजा अर्चना होती है|

शेखागढ़ के आकर व उसमें बने निर्माण देखकर लगता ही नहीं कि 360 गांवों पर राज करने वाला कोई राजा यहाँ रहता था | यह यह सच है कि 360 गांवों पर राज्य करने वाले व अपने से बड़े बड़े राज्यों को युद्ध में हराने वाले शेखाजी यहाँ निवास करते थे| इसी से राव शेखाजी की जीवन शैली का अंदाजा लगाया जा सकता है | किले का आकार देखकर आप भी विचार कर रहे होंगे कि शेखावाटी राज्य व शेखावत वंश के प्रवर्तक राव शेखाजी का किला बस इतना सा ही है |

वर्तमान में गढ़ के पीछे राव शेखाजी का पैनोरमा बनाया जा रहा है, राजस्थान सरकार द्वारा इस पैनोरमा पर साढ़े तीन करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे हैं , इस पैनोरमा में राव शेखाजी के इतिहास व उनके जीवन को चित्रित किया जायेगा|

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