शिवभक्त व कृष्ण का प्रशंसक था यह मुग़ल बादशाह

शिवभक्त व कृष्ण का प्रशंसक था यह मुग़ल बादशाह

शीर्षक पढ़कर आपका चौंकना लाजमी है कि कट्टर साम्प्रदायिक सोच रखने वाला कोई मुस्लिम बादशाह शिवभक्त कैसे हो सकता है? पर कर्नल टॉड द्वारा लिखित राजस्थान के इतिहास की बात माने तो एक मुग़ल बादशाह कृष्ण की आराधना का प्रशसंक था और उसका खुद का झुकाव शिव की आराधना के प्रति अधिक था| यही इस मुग़ल बादशाह ने एक सिद्धरूप सन्यासी से शिव की दीक्षा भी ली थी| बेशक इतिहास मुस्लिम बादशाहों की साम्प्रदायिक हिंसा से भरा पड़ा हो पर इतिहास में कुछ ऐसे प्रसंग भी दबे पड़े है जो कई बादशाहों की धार्मिक सहिष्णुता की पुष्टि करते है| आज हम आपके साथ एक ऐसे ही बादशाह की जानकारी साझा करने जा रहे है जिसने इस्लाम धर्म में रहते हुए शिव की आराधना की|

जी हाँ ! हम बात कर रहे है मुग़ल बादशाह जहाँगीर की| कर्नल टॉड कृत राजस्थान का पुरातत्व इतिहास के भाग 2 में मुग़ल और कृष्ण पूजा शीर्षक के अंतर्गत के जानकारी दी गई कि जहाँगीर कृष्ण की आराधना का प्रशंसक था और उसका झुकाव शिव की आराधना के प्रति अधिक था तथा एक सिद्धरूप सन्यासी ने उसे शिव की दीक्षा प्रदान की थी| आपको बता दें बादशाह जहाँगीर जयपुर के राजा भारमल की पासवान (रखैल) की पुत्री हरखाबाई की कोख से पैदा हुआ था| ज्ञात हो फिल्म वालों द्वारा प्रचारित अकबर की पत्नी जोधा का असली नाम हरकू बाई या हरखू बाई था और वह जहाँगीर की माँ थी|

राजपूत राजा की पासवान की पुत्री का पुत्र के कारण कर्नल टॉड ने जहाँगीर को आधा राजपूत लिखा है| हालाँकि उसके आधे राजपूत होने पर विवाद है पर कर्नल टॉड द्वारा लिखा यह तथ्य बादशाह जहाँगीर की साम्प्रदायिक सोच को अवश्य उजागर करता है| यही नहीं इतिहास में एक और प्रसंग है जो साबित करती है कि जहाँगीर के मन में हिन्दुत्त्व के प्रति आकर्षण अवश्य था| जहाँगीर ने अपने आत्मरचित ग्रन्थ में लिखा– “राजा मानसिंह ने बनारस में एक मंदिर बनवाया, उसने मेरे पिता के कोषागार से उस पर 10 लाख रूपये खर्च किये। यह विश्वास है कि जो यहाँ मरते है सीधे स्वर्ग जाते है – चाहे बिल्ली, कुतिया, मनुष्य कोई भी हो। मैंने एक विश्वासी आदमी को मंदिर के बारे में सभी जानकारियां लाने के लिए भेजा। उसने सूचना दी कि राजा ने इस मंदिर के निर्माण में अपने स्वयं के एक लाख रूपये खर्च किये है। इस समय इससे बड़ा दूसरा मंदिर वाराणसी में नहीं है।” मौलाना एच. एम. की पुस्तक दरबार ए अकबरी के अनुसार जहाँगीर आगे चलकर लिखता है – “मैंने इसके पास इससे भी बड़ा मंदिर बनाने का आदेश दिया।”

इतिहास में दर्ज उपरोक्त प्रसंग ये साबित करते है कि जहाँगीर के मन में हिन्दुत्त्व के प्रति आकर्षण था, वो बात अलग है कि कट्टरपंथियों के डर से सार्वजनिक रूप से उसे अपनी साम्प्रदायिक रखनी पड़ी हो|

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