शहीद राइफल मेन कुलदीप सिंह शेखावत, लामियां

शहीद राइफल मेन कुलदीप सिंह शेखावत : शेखावाटी की संस्कृति में शक्ति व भक्ति का बड़ा महत्व है | महाराव शेखाजी की वीरता और यहाँ के संतों की भक्ति हमें युगों युगों तक राष्ट्र धर्म का निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं | इसी से प्रेरित होकर शेखावाटी के हर जाति, वर्ग और समुदाय के लोग देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करते आये हैं | शहादत की इसी कड़ी में राइफल मैन अमर शहीद कुलदीप सिंह शेखावत ने 19 मार्च 1994 को ऑपरेशन रक्षक में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया | देश के दुश्मन आतंकवादियों के खिलाफ कार्यवाही में अपने प्राण न्योछावर कर शहीद कुलदीप सिंह ने देशभक्ति और उत्कृष्ट कर्तव्य परायणता का परिचय दिया | कुलदीप सिंह शेखावत शेखावाटी आँचल के सीकर जिले के लामिया गढ़ में ठाकुर जगमालसिंह जी की ठकुरानी निवेन्द्र कौर की कोख से जन्में थे | उनका जन्म 30 जून 1973 को हुआ था | अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण कर कुलदीप सिंह ने 13 फरवरी 1991 को राजपुताना राइफल्स ज्वाइन की | कुलदीप के पिता ठाकुर जगमाल सिंह जी भी राजपुताना राइफल्स में सेवाएँ दे चुके थे |

वर्ष 1993 में राइफल मेन कुलदीप सिंह को राजपुताना राइफल्स से राष्ट्रीय रायफल्स की प्रथम बटालियन में भेजा गया | 19 मार्च 1994 को आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसका राइफल मेन कुलदीप सिंह ने अपने साथी सैनिकों सहित कड़ा मुकाबला किया | कुलदीप को बाएं कंधे में गोली लगी और वो घायल हो गया पर कुलदीप घायल होने की परवाह ना करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ डट गया और घायलावस्था में भी दो आतंकवादियों को मार दिया | अंत में सिर में गोली लगने पर भारत माता का यह वीर सैनिक दुश्मनों पर गोलियों की बौछार करता हुआ चिर निंद्रा में सो गया | इस तरह राइफल मेन कुलदीपसिंह ने देश के दुश्मनों के खिलाफ अदम्य साहस से जूझते हुए अप्रतिम वीरता और कर्तव्य परायणता का श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया | कुलदीप के बलिदान ने अपनी पलटन, समाज और देश का गौरव बढाया और आज भी वह गांव के युवाओं का प्रेरणास्रोत बना है |

लामिया गांव के मुख्य चौक का नामकरण शहीद कुलदीप सिंह के नाम पर है | चौक के मध्य लगा “शहीद कुलदीपसिंह शेखावत चौक” नाम का बोर्ड हर आने जाने वाले को उसकी शहादत याद दिलाता है | गांव की सीनियर सैकंडरी स्कूल शहीद कुलदीप सिंह के नाम पर बनी है | स्कूल के विकास में शहीद के परिजनों ने सहयोग किया है | स्कूल के स्टेडियम में शहीद की प्रतिमा लगी है, जिससे विद्यार्थी प्रेरणा लेते हैं |

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