वाइन ने बनाया लिनक्स को इस्तेमाल में और व्यवहारिक

वाइन ने बनाया लिनक्स को इस्तेमाल में और व्यवहारिक

उबुन्टू लिनक्स इंस्टाल करने के बाद भी विण्डो एक्सपी का मोह छोड़ नहीं पा रहे थे क्योंकि फोटोशोप , ड्रीम वीवर , टेली आदि विण्डो में चलने वाले कई सोफ्टवेयर है जिनके इस्तेमाल के चलते विण्डो एक्सपी इस्तेमाल करना मज़बूरी बनी हुई थी और इसके लिए दिन में जरुरत के हिसाब से अपने डुअल बूट कंप्यूटर को जिसमे विण्डो एक्सपी व लिनक्स दोनों इंस्टाल है को बार बार री -बूट कर कभी विण्डो एक्सपी तो कभी लिनक्स चलाना पड़ता था | एक दिन अंकुर गुप्ता का हिंदी ब्लॉग पर उबुन्टू लिनक्स में फोटोशोप इंस्टाल करने की विधि पढ़ते हुए पता चला कि लिनक्स के लिए वाइन (wine) एक ऐसा प्रोग्राम है जो उन ढेरों एप्लीकेशंस को जो सिर्फ विण्डो पर चलती है को लिनक्स प्लेटफार्म पर भी चलाने में सक्षम है |


हालाँकि इन सॉफ्टवेयर्स के बदले लिनक्स में कई सारे सॉफ्टवेयर्स है जिनका इस्तेमाल कर अपना काम चलाया जा सकता है लेकिन लिनक्स के नए उपयोगकर्ता के लिए पहले तो इन सॉफ्टवेयर्स को तलाशना मुश्किल होता है और तलाश लिए तो इनके इस्तेमाल हेतु सिखने के लिए नए सिरे से मत्थापच्ची करनी होती है | अतः लिनक्स में वाइन इंस्टाल कर उसके जरिए लिनक्स में विण्डो एप्लीकेशंस चलाना ज्यादा व्यवहारिक है | मेरी नजर में तो वाइन प्रोग्राम एक ऐसी सौगात है जिसके इस्तेमाल से कंप्यूटर उपयोगकर्ता माइक्रोसॉफ्ट के विण्डो की निर्भरता से पूरी तरह मुक्त हो सकता है | कुल मिलाकर वाइन (wine) ने लिनक्स को आम कंप्यूटर उपयोगकर्ता के इस्तेमाल के लिए और व्यवहारिक बना दिया है |
वाइन इंस्टाल करना भी बहुत आसान है इसके लिए एप्लीकेशंस में एड / रिमूव में जाकर वाइन सर्च कर अप्लाई चेंज पर चटका लगा दे आपका लिनक्स कंप्यूटर अंतरजाल के माध्यम से वाइन डाउनलोड कर अपने आप इंस्टाल कर देगा |

13 Responses to "वाइन ने बनाया लिनक्स को इस्तेमाल में और व्यवहारिक"

  1. काजल कुमार Kajal Kumar   September 26, 2009 at 2:50 am

    ये हुई न बात.
    पढ़कर ऐसे लगा कि मानो ये कैंसर के ईलाज ढूंढ लिए जाने की ख़बर है.
    अब सही में आएगा मज़ा.

    Reply
  2. हिमांशु । Himanshu   September 26, 2009 at 4:34 am

    कामयाब जानकारी । आभार ।

    Reply
  3. अच्छा विश्लेषणात्मक आलेख.. हैपी ब्लॉगिंग

    Reply
  4. Pankaj Mishra   September 26, 2009 at 5:29 am

    अच्छी जानकारी दिया है आपने

    Reply
  5. Raviratlami   September 26, 2009 at 6:02 am

    आपने जो स्नैपशॉट स्क्रिप्ट लगाया हुआ है उसे कृपया हटा दें. यह पढ़ने में समस्या पैदा करता है.

    Reply
  6. संजय बेंगाणी   September 26, 2009 at 9:01 am

    क्या बात है!!!

    Reply
  7. अर्शिया   September 26, 2009 at 10:12 am

    जानकारी के लिए आभार।
    दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    ( Treasurer-S. T. )

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  8. राज भाटिय़ा   September 26, 2009 at 10:40 am

    अब हम चाहे दोनो हाथो मे लड्डु हो ओर वो भी दो दो तो केसे होगा?? आप ने बहुत अच्छी जानकारी दी ओर आप की वाईन भी बहुत स्वाद लगी, यानि दोनो हाथो मै लाड्डु भी ओर वाईन भी
    धन्यवाद

    Reply
  9. ताऊ रामपुरिया   September 26, 2009 at 11:29 am

    बहुत बढिया जानकारी दी आपने.

    रामराम.

    Reply
  10. ताऊ रामपुरिया   September 27, 2009 at 7:42 pm

    इष्टमित्रों और परिवार सहित आपको, दशहरे की घणी रामराम.

    रामराम.

    Reply
  11. नरेश सिह राठौङ   September 30, 2009 at 11:49 am

    लिनिक्स को बढावा देने मे एक ओर सहायक पोस्ट । अभार

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  12. Govind   March 9, 2011 at 1:17 pm

    Is it not possible to install softwarer in ubuntu offline?
    Some of my friends and colleagues haven't internet facility so they
    asked me the same question..
    Please provide this facility with ubuntu …
    This facility would help those ubuntu users who haven't internet facility..
    Thanks again for your kind service. I would spread the ubuntu and
    kubuntu everywhere possible.

    Reply
  13. दाढी वाले बाबा   September 1, 2012 at 8:43 am

    कुन्‍नू जी के ब्‍लॉग के जमाने से मैं आपसे नेट के माध्‍यम से जुड़ा हुआ हूँ। कुन्‍नू जी ने और आपने काफी प्रेरित किया। अरसे से लिनक्स प्रयोग करना चाहता था, कई बार इंस्टॉल भी किया लेकिन कोई व्यावहारिक काम नहीं कर सका।
    पिछले दिनों मेरे कम्प्यूटर की हार्ड ड्राइव खराब हुई तो मजबूरन पेन ड्राइव में लिनक्स इंस्टॉल करके लगभग एक महीने तक चलाया। कुछ परेशानियां जो मुझे आईं, उनका जिक्र करना चाहता हूँ, शायद आपके पास (सीनियर होने के नाते) कोई समाधान हो।
    1- कोई एप्लिकेशन इंस्टॉल करने में समय विंडोज की अपेक्षा अधिक लगता है।
    2- (एडोब) फ्लैश नहीं होने के कारण अन्य कार्यक्रम जैसे जी-नैश या लाइटस्‍पार्क इंस्टॉल करना अपने आप में प्रोजेक्ट है।
    3- टीम व्‍यूवर बूटिंग के समय स्वत: शुरू नहीं होता।

    Reply

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